” निखिल क्या कर रहे हो इतनी रात को!” पानी ले जाती आशा अपने बेटे के कमरे से आती रौशनी देख उसके कमरे मे आई और बोली.
” मम्मा हम कुछ दोस्त है जिनकी पहचान ऑनलाइन गेम खेलते हुई थी.. इसमे कुछ इंडिया के है कुछ बाहर के भी बस उन्ही से थोड़ी चैटिंग चल रही है !” सोलह साल का निखिल बोला.
” पर बेटा रात के एक बज रहे है इस वक़्त चैटिंग ठीक नही चलो सो जाओ!” आशा ने कहा.
” मम्मा दिन मे हम सब पढाई मे लगे रहते है तो रात को ही थोड़ा वक़्त मिलता है.. बस दस मिनट मे बंद करता हूँ.. आप जाके सो जाइये!” निखिल बोला और फोन मे लग गया।
आशा अपने कमरे मे आ गई.. उसे निखिल का इस वक़्त अंजान लोगों से बात करना अच्छा तो नही लग रहा था पर युवा होते बेटे पर ज्यादा बन्दिश भी ठीक नही होती ये सोच वो लेट गई पर उसकी आँखों से नींद गायब हो गई.
“सुनो निखिल को कल मैने अंजान लोगों से चैटिंग करते देखा वो भी रात के एक बजे!” सुबह आशा ने अपने पति राजेश से कहा.
” क्यों बेवजह चिंता करती हो ऑनलाइन चैटिंग ही तो कर रहा है.. वैसे भी बेटा बड़ा हो रहा है ज्यादा टोकाटाकी मत किया करो तुम!” राजेश ने कहा.
अब तो ये रोज का सा हो गया निखिल देर रात तक चैटिंग और गेम खेलने मे लगा रहता।
आशा ने महसूस किया धीरे धीरे निखिल सबसे कटने भी लगा है स्कूल से आता और कमरे मे घुस जाता… अपनी बहन मिष्टी से भी कम बात करता अब.
” निखिल ये सब क्या है हर वक़्त कंप्यूटर के आगे बैठे रहते.. ना अब क्रिकेट खेलते हो ना टी वी देखते हो!” एक दिन आशा ने निखिल से कहा.
” मम्मा नेक्स्ट ईयर मेरा टवेल्थ का बोर्ड है तो अभी से उसकी तैयारी कर रहा हूँ !” निखिल नज़र चुराते हुए बोला.
” पर तुम तो गेम और ऑनलाइन चैटिंग मे इतना वक़्त बिताते हो.. !” आशा बोली.
” मम्मा सारा दिन पढ़ने के बाद थोड़ा गेम खेल लेता हूँ , चैटिंग कर लेता हूँ तो क्या गलत है… आपको तो मुझमे कमियां ही नज़र आती है बस!” निखिल गुस्से मे बोला.
” सही तो कह रहा है निखिल.. तुम भी ना बच्चे के पीछे ही पड़ जाती हो !” तभी राजेश वहाँ आ बोला.
आशा ने बात बढाना उचित ना समझा और कमरे से बाहर आ गई.. !
धीरे धीरे समय गुजरने लगा निखिल ने अब तो सबसे बात करना बंद कर दिया . मिष्टी को बात- बात पर झिड़क देता.. आशा की बातों का भी उल्टा सीधा जवाब देता.
” आशा… आशा.. तुमने मेरी जेब से पैसे लिए!” एक दिन ऑफिस से आ राजेश आशा से बोला.
” नही तो मैं ऐसे बिना पूछे कभी लेती क्या पैसे जो आज लूंगी!” आशा बोली.
” तो पैसे गए कहा मुझे अच्छे से याद है रात तक जेब मे थे..!” राजेश कुछ सोचते हुए बोला.
” कहीं निखिल ने तो नही लिए आप उससे पूछिये!” आशा बोली.
” निखिल.. बेटा निखिल..!” राजेश ने निखिल को आवाज़ लगाई.
” जी पापा!” निखिल कमरे से आ बोला.
” तुमने मेरी जेब से पैसे लिए क्या ?”
” हाँ पापा मुझे बुक लेनी थी आप सो रहे थे तो मैंने जेब से ले लिए दो हजार ले लिए..!” निखिल लापरवाही से बोला.
“पर तुम्हे पापा को या मुझे बताना था ना!” आशा गुस्से मे बोली.
” अरे कोई बात नही जल्दबाज़ी मे भूल गया होगा वो तुम शांत रहो!” राजेश आशा से बोला.
” पर राजेश ये गलत है… आज उसने तुम्हारी जेब से कुछ पैसे लिए कल को कुछ और भी करेगा तुम्हे पूछना चाहिए था कौन सी बुक लेनी.. !” निखिल के कमरे मे जाने के बाद आशा ने राजेश से कहा.
” आशा उसे जरूरत थी उसने ले लिए इसमे इतना क्या सोचना हमारा बेटा हमसे नही लेगा पैसे तो किससे लेगा.” राजेश बोला.
आशा को ये सब सही नही लग रहा था पर वो क्या कर सकती थी उसे समझ नही आ रहा था…. राजेश उसकी बात समझने को तैयार नही थे और बेटा निखिल हाथ से निकला जा रहा था. ऐसे ही निखिल ने कई बार पैसे निकाले पर हर बार राजेश ने उसका बचाव किया.
” सुनो राजेश… निखिल अभी तक स्कूल से घर नही आया.. मैने उसके सभी दोस्तों को फोन किया पर किसी को कुछ पता नही!” एक दिन आशा ने राजेश को फोन किया.
” आशा घबराओ मत… मै बस घर पहुँचने ही वाला हूँ… यही कहीं होगा वो आ जायेगा!” राजेश ने कहा.
राजेश ने घर आके उसके स्कूल टीचर को फोन किया उसकी बस के ड्राइवर को भी फोन किया पर किसी को नही पता वो स्कूल के बाद कहाँ गया.
” राजेश कहाँ होगा हमारा बेटा.. किस हाल मे होगा..!” आशा रोती हुई बोली.
” पापा भाई कब आयेंगे..!” मिष्टी बोली.
” बेटा जल्दी आयेगा तुम रूम मे जाओ अपने!” राजेश ने उसके सिर पर हाथ फैरते हुए कहा. और कुछ सोचता हुआ अपने कमरे मे जा अलमारी टटोलने लगा.
” आशा इधर आओ जल्दी… !” घबरा कर उसने आशा को आवाज़ दी.
” क्या हुआ राजेश निखिल का कुछ पता लगा!” आशा भागती हुई आई.
” नही पर मेरी अलमारी मे से क्लाइंट को देने के चार लाख रुपए गायब हैं!” राजेश घबराता हुआ बोला.
” क्या……!” आशा धम से वहीं बैठ गई.
” तुम खुद को संभालो आशा मैं पुलिस स्टेशन जाता हूँ!” राजेश बोला.
राजेश निखिल की फोटो ले पुलिस स्टेशन गया और इंस्पेक्टर को सब बात बताई.
” क्या पिछले कुछ दिनों से आप कोई बदलाव देख रहे थे अपने बेटे मे!” इंस्पेक्टर ने पूछा.
” जी वैसे तो कुछ नही बस कुछ दिनों से वो ऑन लाइन गेम ज्यादा खेलने लगा था और तभी कुछ लोगों से चेटिंग भी होती थी उसकी!” राजेश ने कहा.
” ओह्ह्ह… मुझे लगता है ये किसी गिरोह की साजिश है जो ऐसे गेम खेलने वाले बच्चों को बेवकूफ बना उनसे घर मे चोरी करवाते है । कई बार तो बड़े बड़े क्राइम भी करवाते है !” इंस्पेक्टर ने कहा.
” सर मुझे मेरा बेटा ढूंढ कर दे दो आप प्लीज़..!” राजेश रोने लगा.
” देखिये हम पूरी कोशिश करेगे ऐसे केस मे कई बार बच्चे खुद भी वापिस आ जाते.. आप चिंता मत कीजिये मै अभी इस काम पर अपने आदमी लगाता हूँ आप घर जाइये जैसे ही कुछ पता लगता है मैं आपको फोन करता हूँ!” इंस्पेक्टर बोला.
” मेरा बेटा कहाँ है आप उसे लाये नही!” घर पहुँचते ही आशा ने राजेश से पूछा.
” मुझे माफ कर दो आशा मैने तब तुम्हारी बात नही मानी काश मैं तभी तुम्हारी बात सुन लेता तो ये सब ना होता!” राजेश फूट फूट कर रो दिया.
आज निखिल को गए दो महीने बीत गए अभी तक उसका कोई पता नही चला… पुलिस पूरी कोशिश कर रही पर नतीजा अभी ज़ीरो ही है..उसका फोन भी लगातार बंद ही आ रहा है… आशा निखिल के गम मे जिंदा लाश बन गई है… मिष्टी जैसे हंसना भूल गई है.. और राजेश उसकी तो मानो दुनिया उजड़ गई… एक हँसता खेलता परिवार आज बिखर सा गया।
दोस्तों मोबाइल और कंप्यूटर आज भले बहुत बड़ी जरूरत बन गए है.. पर हमे ये देखना होगा हमारे बच्चे उनका इस्तेमाल किस लिए कर रहे.. ये ऑनलाइन गेम बच्चों का ब्रेनवाश कर देते है और इन्हे चलाने वाले उन्हे अपने इशारों पर नचाते है। वक़्त बीत जाए और आपके पास पछताने के सिवा कुछ ना बच्चे उससे पहले अपने बच्चों को बचा लीजिये इससे पहले की वो किसी की साजिश का शिकार हो जाये ।
आपकी दोस्त
संगीता अग्रवाल
#साजिश