अनिका वनिका दोनों बहनों की शादी एक ही शहर में हुई| दोनों के बच्चे भी सेम स्कूल में पढ़ते थे| अनिका का बेटा लक्ष्य दसवीं में और वनिका की बेटी सुमि आठवीं में|अनिका का घर स्कूल के पास था इसलिए लक्ष्य तो खुद ही घर आ जाता था| जबकि वनिका का घर दूर होने के कारण सुमि वेन से आना-जाना करती थी|
एकदिन वनिका ने अपनी दीदी को कॉल किया “दीदी आज वेन की स्ट्राइक है और मुझे भी डेंटिस्ट के पास जाना है तो आज सुमि को आप अपने घर ले आना| मैं शाम को उसे पिक कर लूँगी|
“ठीक है, तू आराम से अपने काम निपटा| मैं उसे ले आऊँगी|”
छुट्टी के समय अनिका स्कूल पहूँची| उसे देखते ही सुमि दौड़ कर उसके पास आ गई “मौसी आप यहाँ? आपको ही लेने आई हूँ| आपकी मम्मा को आज कुछ काम है, इसलिए वह शाम तक आएगी| तब तक आप मौसी के यहाँ चलो|”
“मौसी, आपको पता है, मैं ‘स्कूल पेंटिंग कॉम्पिटिशन’ में फर्स्ट आई हूँ और मेरा ‘स्टेट लेवल’ में सेलेक्शन हो गया है|”
“वाह! ‘वेरी गुड|’ यह तो बहुत खुशी की बात है| चलो,इसी खुशी में मैं तुम्हें पिज़्ज़ा बना कर खिलाती हूँ|”
“पर मौसी, मम्मा नहीं मानेगी| वह मुझे नहीं जाने देगी| पेंटिंग कॉम्पिटिशन में|” सुमि ने उदास होते हुए कहा|
“क्यों,नहीं जाने देगी जरूर देगी| मैं हूँ ना| चलो अभी फटाफट घर चलो|”
शाम सुमि को लेने वनिका घर आई| जब अनिका ने उसे सुमि के ‘पेंटिंग कॉम्पिटिशन’ में फर्स्ट आने के बारे में बताया तो उसने कोई खास इंट्रेस्ट नहीं दिखाया और जब स्टेट लेवल पर भेजने की बात की तो साफ मना कर दिया “दीदी इससे कहो पढ़ाई लिखाई में ध्यान लगाए| इस पेंटिंग-वेंटिंग से कुछ नहीं होना|”
“देख छोटी, हर बच्चे का टैलेंट अलग होता है| यह सच में बहुत बढ़िया पेंटिंग करती है| इसे मत रोक| अपनी दीदी की बात नहीं मानेगी|
“ठीक है दीदी, लेकिन यह लास्ट है| फिर इसे यह पेंटिंग-वेंटिंग छोड़ कर पढ़ाई पर ध्यान देना होगा|”
सुमि ‘स्टेट लेवल’ पर भी फर्स्ट आई| अनिका अपनी सुमि की कामयाबी पर बहुत खुश थी| तभी एक दिन लक्ष्य ने स्कूल से आकर उसे बताया “मम्मा आज सुमि बहुत रो रही थी| मौसी ने उसे ‘पेंटिंग कॉम्पिटिशन’ में जाने से मना कर दिया है| प्लीज, आप मौसी से बात करो ना| उसका बहुत मन है|”
“ठीक है बेटा, मैं बात करती हूँ |”
“हैलो, छोटी जाने दो ना सुमि को ‘पेंटिंग कॉम्पिटिशन’ में| कितनी मेहनत की है बच्ची ने|”
“नहीं, दीदी पिछली बार तो आपकी बात मान ली थी| इस बार नहीं| पता है, ‘मैथ्स टेस्ट’ में 50 में 30 नंबर लाई है| इस बार तो बिल्कुल नहीं| वनिका ने साफ इंकार कर दिया|”
इधर लक्ष्य उसे रोज आकर बताता कि “सुमि बहुत रोती है, स्कूल में| उसे ‘पेंटिंग कॉम्पिटिशन’ में जाना है, लेकिन मौसी मान ही नहीं रही|
एक दिन अनिका से नहीं रहा गया तो उसने लक्ष्य से कहा “सुमि को बोल दे,कॉम्पिटिशन की तैयारी करें| मैं लेकर जाऊँगी|
फिर उसने वनिका को कॉल किया “छोटी, बहुत दिन हो गए| सुमि को यहाँ आए| इस शनिवार को मैं उसे स्कूल से यहाँ ले आती हूँ | फिर रविवार को उसे शाम तक छोड़ दूँगी|”
“ठीक है, दीदी|”
शनिवार को सुमि जैसे ही स्कूल पहुँची| अनिका वहाँ अपनी कार के साथ रेडी खड़ी थी| वह उसे लेकर कॉम्पिटिशन के लिए दिल्ली चली गयी| शाम तक वे दोनों वापस अपने घर नोएडा आ गए|
एक दिन वनिका के पास स्कूल से कॉल आया कि सुमि पेंटिंग कॉम्पिटिशन में फर्स्ट आई है| उसकी पेंटिंग को ‘नेशनल आर्ट गैलरी’ में लगाया जायेगा| यह सुनते ही वह भौंचक्की रह गई| उसे तो विश्वास ही नहीं हो रहा था| वह बहुत खुश थी लेकिन उसे समझ नहीं आ रहा था की सुमि ने कॉम्पिटिशन कैसे दिया? उसने तो मना कर दिया था|
तभी डोर बेल बजी बाहर उसकी दीदी वनिका बड़ा सा केक लेकर खड़ी थी|
“अरे! दीदी, आप यहाँ इतनी सुबह और यह केक|”
“हमारी प्यारी सुमि के लिए है| कमाल कर दिया उसने|”
“पर, आपको कैसे पता चला?”
“मेरे पास भी कॉल आया था| जब मैं उसे कॉम्पिटिशन के लिए ले गई थी तो तेरा और मेरा दोनों का नंबर दिया था|”
“मतलब, आप लेकर गई थी उसे! पर कब ?” उसने आश्चर्य से पूछा|
“हाँ, पिछले शनिवार को लेकर गयी थी तुझे बिना बताये| तो और क्या करती? तेरी जिद में उसके सपने,उसके टैलेंट को चूर हो जाने देती|”
“सॉरी दीदी, माँ होकर मैं जो ना देख पाई| वह आपने देख लिया|”
“छोटी, हर बच्चे में अलग-अलग टैलेंट होता है| जरूरी नहीं कि हर बच्चा पढ़ाई में अव्वल हो| सबकी अपनी अपनी खूबी होती है| इसलिए सॉरी नहीं, यह प्रॉमिस कर कि तू अब उसके इस टैलेंट को उभारने में उसकी हेल्प करेगी|”
“जी दीदी |” कहती हुई वनिका अनिका के गले लग गई ।
धन्यवाद।
लेखिका -श्वेता अग्रवाल, धनबाद, झारखंड
शीर्षक -सपनों का आसमां
कैटिगरी-लेखक/लेखिका बोनस प्रोग्राम