साज़िश – सीमा सिंघी : Moral Stories in Hindi 

 रवि और किशन दोनों ही देसाई जी बेटे थे ! मगर दोनों के स्वभाव एक दूसरे के बिल्कुल विपरीत  ! जहां रवि हर छोटी-छोटी बात पर घर हो या बाहर सब पर क्रोध किया करता था और तो और किसी को नीचा दिखाने के लिए वह बुरी  से बुरी साज़िश करने से भी नहीं चूकता था ।

 हर वक्त उसके मन में किसी न किसी के प्रति साज़िश चलती रहती थी जबकि किशन कोई भी बात सुनकर हर बात का जवाब सोच समझ कर दिया करता था। सबके साथ बड़े सम्मान से पेश आता था और मन का भी बड़ा भला था। गांव में हर किसी की मदद के लिए वह सदा तैयार रहता था।

 यही वजह थी, कि गांव में सब कोई किशन को बहुत प्यार करते थे ,जबकि रवि को कोई पसंद नहीं करता था और कई लड़के तो उससे मन ही मन दुश्मनी भी रखने लगे ।

 इसी तरह दिन गुजरते गए! एक दिन रवि जंगल के रास्ते से घर की ओर आ रहा था। तब गांव के कुछ लड़के उसी रास्ते पर पहले से घात लगाकर बैठ गए, जैसे ही रवि उनके नजदीक आया । उन लड़को ने उसे घेर लिया तो रवि भी क्षमा मांगने की जगह क्रोध में आकर बिना सोचे समझे उन सबके साथ हाथा-पाई करने लगा ! 

जब किशन को इस बात का पता चला तो वह तुरंत पहुंच गया क्योंकि वह घर के नजदीक ही आपस में हाथापाई कर रहे थे । अपने भाई रवि को उन लड़कों के बीच इस तरह घिरा हुआ देख  कर किशन को बहुत तकलीफ हुई । 

उन्होंने उन सभी लड़कों को समझाया तो उन लड़कों ने बताया की रवि ने उनके साथ बहुत बुरा बर्ताव किया था, इसीलिए उन लोगों ने इसका बदला लेने की ठान ली और यह भी कहा कि वह सिर्फ किशन के कहने पर ही वह रवि को छोड़ रहे हैं, क्योंकि वे सब किशन की बात को टाल नहीं सकते थे । 

किशन ने उन लड़कों को अपने-अपने घर भेजा और  रवि को जो थोड़ा घायल हो चुका था। उसे भी किसी तरह घर लेकर आ गया। रवि की ऐसी हालत देखकर देसाई जी को बहुत तकलीफ हुई और वह रवि को समझाने लगे।

 देखो बेटा किसी का बुरा करके या किसी के प्रति अपने मन में बुरी बुरी साज़िश रच के आज तक किसी का भला नहीं हुआ है। यह तो अच्छा हुआ। जो उस वक्त तुम्हारा भाई किशन वहां पहुंच गया,नहीं तो आज बहुत बड़ी दुर्घटना हो सकती थी।

 यह सच है रवि हम मन ही मन जब किसी के लिए साज़िश रच रहे होते हैं तो कोई हमारे लिए अपने मन में साज़िश रच रहा होता है यानी की हम जैसा व्यवहार करेंगे वैसा ही व्यवहार हमें मिलेगा।

 रवि अपने पिता की बात सुनकर बेहद शर्मिंदगी महसूस कर रहा था। वह नज़रें झुकाए ही बोल उठा। हां पिताजी मैं समझ गया हूं कि मैं कितना गलत था और किशन बिल्कुल सही। आज के बाद मैं भी आपको किशन जैसा ही बन कर दिखाऊंगा। 

रवि की यह बात सुनते ही देसाई जी बोल उठे यह हुई ना बात । अब मेरे दोनों बेटों की जिंदगी सही पटरी पर चल पड़ी हैं तो इससे बड़ी खुशी और मेरे लिए क्या होगी कहकर वह भी मुस्कुराने लगे।

स्वरचित 

सीमा सिंघी 

गोलाघाट असम

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