गिरिराज, सरपंच का बेटा, बचपन से ही पढ़ाई लिखाई से दूर भागता था, जैसे तैसे कक्षा 7 तक पहुंच कर पढ़ाई छोड़ दी। उसे प्यार था तो बस लड़ाई झगड़े ओर मार पीट से। समय के साथ साथ उसकी दादागिरि बढ़ती गई। एक बार चुनाव के दौरान अपने नेेताजी गांव में आये तो सरपंच ने अपना बेटे का दुख बताया और नोकरी के लिये कहा।
नेताजी ने ऑफिस आने के लिए बोला। गिरिराज नेताजी से मिलने ऑफिस गया तो उन्होंने उसे अपने ऑफिस में लगा लिया ओर सुबह से शाम तक वहीं रहता। वहाँ 4-5 लड़के और भी थे, सबके साथ समय अच्छा निकल जाता। खाना पीना ओर जेब खर्च मिल जाता था। आस पास के लोगों की छोटी छोटी समस्या खुद ही हल करने लगा।
धीरे धीरे वो नेताजी का खास बन गया ओर उसे फुल टाइम कार्यकर्ता बना लिया। अब घर खर्च अच्छे से चल जाता था, फिर एक दिन एक साथी कार्यकर्ता ने अपनी बेटी से शादी करा दी।
पार्टी को कही भी धरना, जाम, जलूस वगैरह करना होता तो सबसे आगे होता। कई बार पुलिस के डंडे खाकर चोटिल भी हुआ और जेल भी गया। नेताओं की ऐसी धारणा है कि जितना लंबा जलूस, जितना बड़ा जाम, जितनी ज्यादा भीड़, उतना बड़ा नेता। आम जनता को जितना परेशान किया, उतना बड़ा नेता। कुछ समय बाद
सरपंच का निधन हो गया और गिरिराज की पत्नी मॉ बनने वाली थी। उधर पार्टी ने गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ने पर देश भर मे “चक्का जाम” का एलान किया।
गिरिराज सुबह से ही नेताजी के ऑफिस चला गया और जाम की तैयारी में लग गया। हजारों लोगो को इकट्ठा कर सड़कों पर जाम लगा दिया। चारो तरफ भीड़ ही भीड़, नारे बाजी, हो हल्ला। प्रशासन ने जाम हटाने के लिए लाठीचार्ज करदी ओर कई लोगो को अरेस्ट भी किया। गिरिराज को सर पर चोट लगी और अरेस्ट भी हो गया।
गिरिराज की पत्नी को लेबर पेन स्टार्ट हो गए। पड़ोसियों ने हॉस्पिटल ले जाने के लिए रिक्शा बुलाया पर जाम की बजह से हॉस्पिटल तक नही पहुंच पाये। रिक्शा वापिस घर
की तरफ ले लिया और गावँ की औरतें मिलकर संभालती रही पर कामयाबी नही मिली। गाँव से दाईं को बुलाया पर जाम की वजह से वो खेतो के रास्ते होकर आई, पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी, ओर बच्चे को बचाया न जा सका।
अगले दिन जब गिरिराज जमानत पर बाहर निकल कर आया, तो उसे अपनी बीवी के साथ हुए हादसे का पता चला, वो बुरी तरह बोखला गया और नेताजी के ऑफिस जाकर जोर जोर से चिल्लाने लगा। नेताजी को बुरा भला कहा और हादसे का सारा इल्जाम उन्ही पर लगा दिया। गिरिराज की चिल्लाने की आवाज सुनकर
ऑफिस के सारे लड़के बाहर आ गए।नेताजी बोले, मुझ से ऊंची आवाज में बात करता है, ज्यादा उड़ मत, तू अभी जमानत पर है, कही ऐसा न हो कि फिर अन्दर करा दू, ओर अंदर ही सड़ जाये। नेताजी ने इशारा किया ओर ऑफिस के लड़कों ने गिरिराज को धक्के मारकर बाहर निकल दिया।
गिरिराज, जो नेताजी का खास हुआ करता था, आज दूध से मख्खी की तरह निकाल कर बाहर फेंक दिया। आज उसको समझ आया कि नेता लोग किसी के सके नहीं होते, बस अपना उल्लू सीधा करते हैं। बेचारी जनता सब कुछ जानते हुए भी, चन्द पैसों के लिए अपनी जाति /
धर्म के गुंडे मवाली लोगो तो वोट देकर नेता बना देती हैं। न जाने ऐसे कितने ही गिरिराज है, जो अपने जरा से फायदे के लिए आम जनता के जीवन से खिलवाड़ करते हैं। उनकी आँखें तब खुलती है जब वो खुद इसके शिकार बनते हैं, पर तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।
अब आप ही बताये की आपका अगला वोट जनता और देश का भला करने वाले के लिये होगा या आम जनता को जाम/बन्द में धकेलने वाले वालो के लिए ?
लेखक
एम पी सिंह
(Mohindra Singh)
स्वरचित, मौलिक, अप्रकाशित
21 dec.24