आखिर वो दिन आ ही गया जब जतिन ने रिया से अपने दिल की बात कह दी,उस दिन जतिन बहुत सहमा हुआ सा था उसे पूरा विस्वास था कि रिया उसे ना नही बोलेगी, पर दिल के किसी कोने से ये आवाज भी आ रही थी कि रिया अपने परिवार और अपने सपने को पहले महत्व देगी ,उसके लिए इन दोनों से बढ़कर कुछ भी नही था,
दोनो साथ ही कॉलेज में पढ़ते थे,आखिरी साल चल रहा था जतिन को जॉब की उतनी टेंसन नही थी क्योकि उसके पापा का अच्छा खासा व्यापार था और जतिन की रुचि भी उसी में थी, पर रिया…..हा वो अपने सपनो को पंख देना चाहती थी अपने सपनों को जीना चाहती थी जिसके लिए वो काफी मेहनत भी कर रही थी!!
आखिर वो दिन भी आ गया जब जतिन ने रिया से अपने दिल की बात बोल ही दी, रिया सुनो,,,रिया ने धीमे स्वर में कहा हम्म्म्म बोलो न……वो तो बस अपनी आंखें पुस्तको में ही जमाई हुई थीं, पर जतिन तो उसकी आँखों मे ही देख कर बोलना चाहता था सब कुछ, पर डर रहा था कि कही रिया की आंखों में वो अपने लिए रिजेक्शन न देख ले, इतनी देर जतिन को चुप देख कर आखिर कार रिया ने जतिन को घूरकर देखा,,,,
अब जतिन की हालत तो और भी ज़्यादा खराब हो गयी पता नही रिया की आंखों में देख के ही उसे 1000वाट का करंट लग जाता था,कैसे सम्भाले अब खुद को कैसे बोले रिया से, रिया तो बस जतिन को घूरे ही जा रही थी ये तुम्हे हुआ क्या है जतिन आज,नींद पूरी नही हुई क्या तुम्हारी ,अजीब सी हरकते कर रहे हो ,अब जतिन रिया को कैसे बताये की उसकी नींद तो रिया ने चुरा ली है,
बस जतिन ने डरते-डरते आखिर रिया को बोल ही दिया कि वो रिया को बहुत पसंद करता है, पर जिस कॉन्फिडेंस से उसने रिया की आंखों में देखा था आखिर वो फिर डगमगा गया और वो ईधर -उधर देखने लगा,,,रिजेक्शन का जो डर था उसके मन में, इतना डर तो सेकंडियर का रिज़ल्ट् आने में भी नही था, क्यों न हो मोहब्बत की डगर जो थी,बाकी सब तो उसके सामने फीका ही था,और अगर वो हमें मिल जाये तो समझो सारी कायनात भी फीकी है इसके सामने,
बस यही सब सोचते-सोचते जतिन इधर-उधर देख रहा था,रिया के जवाब के इंतजार में, और रिया बस उसकी तरफ अपलक देखे जा रही थी, मन में यही सोच रही थी हा बोलूंगी तो मेरा करियर मार खायेगा और न बोलूंगी तो मैं जतिन को खो दूंगी हमेशा के लिए,क्योंकि जतिन ने रिया को वादा जो किया था कि उसकी रिजेक्शन होगी तो वो उस से कोई सवाल नही पूछेगा, उसकी जिंदगी से हमेशा के लिये चला जाएगा,
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रिया ने भी तो हमेशा से नोटिस किया था कि जतिन उसकी कितनी केअर करता है, रिया एक दिन भी कॉलेज न जाये तो कितना तड़प उठता था जतिन, उसकी सारी सहेलियों से पूछताछ करने लग जाता था, बैचैन हो जाता था रिया के लिए, रिया को इन सारी बातों की खबर थी,
रिया थी तो पढ़ाकू टाइप, पर क्या ऐसा सम्भव है कि इतना केअर और प्यार करने वाला कोई शख्स हमे मिल जाये और किसी का दिल न पिघले,आखिर कैसे प्यार में नही पड़ती रिया भी, आखिर उसने पूरी जांच परख और सोच-विचार के ही अपने मन मे पूरी तरह से स्वीकार कर ही लिया कि हा जतिन उसे सच्चा और अथाह प्रेम करता है,
आखिर रिया ने भी जतिन के सामने स्वीकार कर ही लिया की हां जतिन मुझे भी तुमसे प्यार हो गया है,अब जतिन की खुशी का तो ठिकाना ही नही मानो उसका कोई जैकपॉट लग गया हो, पगला सा गया वो,बस रिया का हाथ पकड़े उसने बोल ही दिया,,रिया क्या तुम मुझसे शादी करोगी, रिया उसके प्रपोसल को सुन के बहुत खुश तो हुई पर चेहरा उतरा हुआ था,जतिन ने उसकी तरफ देखा…..
क्या हुआ रिया किस सोच में डूबी हुई हो क्या अब भी मन मे कोई भरम है तुम्हारे बोलो न बात क्या है, रिया ने आखिर संकोच में बोलना शुरू किया, क्योंकि वो जतिन का मन नही दुखाना चाहती थी, जतिन मैं तुमसे प्यार बहोत ज्यादा करती हूं और तुमसे शादी करने को एक पैर पे भी तैयार हूं पर मेरे लिए मेरे सपने और करियर बहोत मायने रखते है, मैं अपने सपनो के साथ ही तुम्हारे प्यार को जीना चाहती हु तो क्या तुम भी अपने प्यार के साथ मेरे सपनों को जी पाओगे जतिन,
जतिन ने रिया की तरफ देखा थोड़ा सोचा और लड़खड़ाते हुए शब्दों में बोला अरे इतनी सी बात पगली मैं तो तुम्हारे लिए सबकुछ कर सकता हु ,बहोत प्यार करता हु तुमसे वादा करता हु शादी के बाद तुम्हारे सारे सपनो को पूरा करूँगा, और तुम्हारे घर वाले?????रिया ने कौतूहल वश पूछा, जतिन ने तपाक से कहा अरे उनकी चिंता छोड़ो उनको मैं सम्भाल लूंगा, मेरे घर वाले मुझसे बहोत प्यार करते है जो बोलूंगा मानेंगे आखिर मैं उनकी एकलौती औलाद हूँ,
अब तो रिया की आंखों में खुशी की लहर दौड गयी, अब वो पूरी तरह आश्वस्त हो गयी कि जतिन कभी उसके सपनो को मरने नही देगा बस अब वो जतिन के प्यार में पूरी तरह से डूब के अपने भविष्य के सपने सँजोने लगी,
अब दोनों ने अपने- अपने घर मे अपने प्यार के बारे में सबकुछ बता दिया और शादी की इक्छा सामने रख दी,बस क्या था इत्तेफाक से दोनों एक ही जाती के थे तो घर वाले न नही बोल पा रहे थे फर्क बस इस बात का था कि जतिन का परिवार पैसेवाला और वो लोग बडे व्यापारी थे जबकि रिया का परिवार मिडिल क्लास और सरकारी जॉब वाला था,
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अब वो दिन आ ही गया जब जतिन अपने परिवार वालो को लेके रिया के घर आ ही गया, उनको तो रिया जैसी सुंदर ,सुशील और घर को चला सकने वाली मिडिल क्लास लड़की ही चाहिए थी,बस जतिन के पापा ने रिया को देखते साथ ही बोल दिया हमे आपकी बेटी बहुत पसंद है और हमने उसे बहु स्वीकार कर लिया है,
रिया के मा-बाप तो खुशी के मारे खुद को सम्भाल ही नही पा रहे थे सबने एक-दूसरे को बधाई दी और मुह मीठा कराया , पर ये क्या वहा किसी ने भी रिया के सपनो के बारे में कोई भी बात नही की,रिया ने तो पहले ही अपने पिता को बोल दिया था कि जतिन ने उसे वादा किया है कि वो उसके सारे सपनो को पूरा करेगा और घर वालो को भी मना लेगा तो आप कोई बात मत करियेगा….
.शायद रिया ने यहा पर जतिन के प्यार में अंधी होकर कुछ ज्यादा ही जल्दबाजी कर दी या शायद बहुत बड़ी भूल?????, पर जब वहा पर जतिन के परिवार वालो ने भी कुछ नही बोला, न ही रिया के सपनो का जिक्र तक किया तो रिया बहुत ज्यादा बेचैन हो गयी,उसने जतिन की तरफ देखा दुखी होकर जतिन ने उसे इशारा किया कि उसने घर वालो को समझा दिया है तब जाके रिया की जान में जान आयी,
ये रिया को हुआ क्या है, क्यों उससे इतनी बड़ी गलती होने जा रही थी, क्यों वो समझ नही पा रही थी,पता नही ये मोहब्बत है क्या चीज की इसमे इंसान डूबते ही कैसा हो जाता है ,कि की अगर अपने ही समझाईश देने लगे थोड़ा भी तो वो सबसे बड़े दुश्मन बन जाते है,औरजो सिर्फ कुछ दिनों पहले ही हमारी जिंदगी में आया है,वो अपना बन जाता है,
खैर वो दिन आ ही गया जो रिया की जिंदगी का सबसे खूबसूरत और हसीन पल था, जी हां रिया की शादी, रिया की हल्दी,संगीत सब कुछ धूमधाम से चल रहा था,रिया के पापा ने कोई भी कसर नही छोड़ी थी रिया की शादी की तैयारी में क्योंकि जतिन के घर वालो ने कोई डिमांड नही की थी,उनको कोई कमी नही थीं, वो बस इतना चाहते थे कि शादी बढ़िया से हो जाये, फिर भी रिया के पापा ने अपनी हैसियत से ज्यादा तैयारी की अपनी बिटिया रिया के लिए,
रिया ने भी अपने हाथों में जतिन के नाम की मेहंदी लगा ही ली,आज रिया सच मे बहुत ज्यादा खुश थी उसका प्यार जो उसे मिलने वाला था ,वो भी उसके सपनो के साथ, सच मे आज रिया तो खुद को दुनिया मे सबसे ज्यादा भाग्यशाली लड़की समझ रही थी,
उधर जतिन तो इतना ज्यादा खुश था कि बस वो उस पल का इंतजार कर रहा था कि कब रिया को अपनी दुल्हन के रूप में देखे,रिया थी भी बड़ी सूंदर जब जतिन उसकी सादगी में ही उस पर मर मिटा था, तो सोचो दुल्हन के रूप में देखेते ही उसका क्या हाल होता,
आखिर जतिन और रिया शादी के बंधन में बंध ही गए एक-दूसरे को सात वचन की कसमे देते हुए,सात जन्मों के रस्मो और बंधन को निभाते हुए आखिर रिया जतिन के साथ विदा हो कर चली गयी, साथ ले गयी तो अपने अधूरे सपने जो उसने अपने आंखों में संजोय थे, हा चली गयी अपने पीहर को सुना करके,साथ ले गयी तो अपने माँ पापा की यादें,और छोड़ गई अपना बचपन,
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अब जतिन और रिया खो गए अपने सपनो की दुनिया में,जतिन के घर तो भीड़ सी लगी हुई थी नए बहु के स्वागत में ,जतिन की माँ को दिखावा करना ज्यादा ही पसंद था,हा दिल की बहुत अच्छी थी और काफी आजाद खयालातों की भी,पर आगे ये देखना था क्या रिया के लिए भी उनके खयालात आजाद रहते है कि नही,
बस अब तो आस-पड़ोस के लोग भी आ चुके थे आज रिया की मुह दिखाई की रस्म जो थी,रिया भी सज-सवर के एकदम तैयार थी, अहा!!!!!! आज तो रिया और भी ज़्यादा खूबसूरत लग रही थी कि चाँद भी उसके सामने फीका नजर आ रहा था,
जतिन तो रिया को देखते ही रह गया उसकी तो नजर ही नही हट रही थी रिया से,वो रिया को देखने मे ही इतना मगन था जतिन की उसे अपने आस-पास कोई नजर ही नही आ रहा था, मानो उसे बड़ो का कोई लिहाज ही न हो,ये देख जतिन की माँ को थोडा अजीब लग रहा था, शायद वो सोच रही थी कि गया रे उसका बेटा तो अब उसके हाथ से,
हम्म्म्म कुछ सासु की ऐसी मानसिकता जो होती है,बस उन्होंने जतिन का ध्यान रिया की तरफ से हटाया और उसे अंदर जाने का इशारा किया,जतिन फिर चुपचाप अंदर मन मसोस के चला गया,
अब बस रिया की मुह दिखाई शुरू हो गयी,सब रिया को देखते ही रह गए,कोई उसकी खूबसूरती की तारीफ करते नही थक रहा था, सब शुरू हो गए अरे मिसेज शर्मा आपकी बहु तो चाँद का टुकडा लग रही है ,आप तो बहुत ही किस्मत वाली है जो इतनी सुंदर बहु मिली ह, मिसेज शर्मा भी थोड़ी अकड़ गयी उनके तेवर तो आज किसी लोकल विधायक से कम नही लग रहे थे,हो भी क्यों न इतनी सूंदर बहु पाकर तो सास को शुरू-शुरू में थोड़ा घमण्ड हो ही जाता है,
मिसेज शर्मा तो बस अपनी बहू की खूबसूरती की तारीफ सुन-सुनकर ही फूल के ढोलक हुए जा रही थी,उन्होने तुरन्त अकड़ के बोला अरे मेरी बहु सिर्फ सूंदर ही नही सुशील भी है ,घर के सारे काम तो आते ही है ऊपर से बहुत ज्यादा पढ़ी-लिखी भी है मेरी बहु, अब समझ लो कि सर्वगुणसम्पन्न है मेरी बहु मिसेज शर्मा ने ऐंठते हुए कहा, उसमे से मिसेज शर्मा की एक सहेली जो उनसे थोड़ा जलती भी थी ,चुहल लेते हुए उनसे पूछ ही बैठी क्यों मिसेज शर्मा जब आपकी बहु इतनी ही पढ़ी-लिखी है ,तो वो ऐसे तो घर मे न बैठने वाली जरूर उसके कुछ सपने होंगे जरूर उसने अपने लिए कुछ सोचा होगा, जॉब तो जरूर करवाएंगी आप ????
रिया वही बैठी सब -कुछ सुन रही थी, वो तो बहुत खुश थी उसे तो यही उम्मीद थी कि सासु मा तो हाँ ही बोलेंगी, पर ये क्या मिसेज शर्मा ने अपनी सहेलियों से चिढ़ते हुए कहा, भला हम क्यों कराने लगे अपनी बहू से नॉकरी हमे पैसो की कोई कमी है क्या, हमारी बहु तो बस रानियों की तरह राज करेगी और पूरा घर संभालेगी बस ,
ये सब सुन के तो रिया मानो ठगी सी रह गयी,उसे कुछ समझ ही नही आ रा था कि ये सब उसके साथ सच मे हो रहा हैं या फिर कोई सपना हैं, आंसू तक नही बहा पा रही थी रिया सबके सामने ,उसका पूरा गला भर आया था कुछ शब्द ही नही निकल रहे थे उसके मुंह से, उसे ऐसा लग रहा था कि मानो उसे उम्र कैद की सजा मिल गयी हो ,वो तो उड़ना चाहती थी, अपने सपनो को पंख देना चाहती थी, पर उड़ने से पहले ही उसके पर काट दिए गए ,जिस ससुराल में रिया अपने प्यार और सपनों के साथ आई थी ,अब तो उस घर मे एक भी पल काटना रिया के लिए मुश्किल हो रहा था,
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जतिन के सामने आते ही वो कुछ नही बोली बस उसकी लाल-लाल आँखे जतिन को घूर रही थी मानो उसमे से अग्नि की प्रचण्ड ज्वाला निकल कर जतिन को भस्म ही कर देगी, रिया को देखकर जतिन सब कुछ भांप चुका था की अब तो रिया को सब कुछ पता चल चुका है, पर अब हो भी क्या सकता था जतिन करता भी क्या अब तो पानी सर से ऊपर भी जा चुका था, और रिया तो अब अपने मां-बाप को कभी तकलीफ में नही देख सकती थी ,वही तो उसकी दुनिया थे,जतिन से अलग होने का विचार तो वो सपने में भी नही ले सकती थी, क्योंकि उसे अपने और अपने मां- बाप के मान सम्मान की बहुत परवाह थी अपनी जान से भी ज्यादा,
बस उसने विचार किया अब जो भी हो ऐसे ही मुझे जीना है अपने सपनो का गला घोंट कर, बस उसकी बहती हुई आंखे जतिन से एक ही सवाल कर रही थी, कि जतिन आखिर क्यों किया तुमने मेरे साथ ऐसा मुझसे इतना ज्यादा प्यार करते थे तुम की मुझे पाने की खातिर तुमने मेरे सपनों और अब तो मेरीे आत्मा तक को मार डाला आखिर क्यों जतिन काश तुम मेरे साथ-साथ मेरे सपनों से भी प्यार कर पाते,सच मे जतिन तुम मुझसे बहोत ज्यादा प्यार करते हो, आज तोे तुमने मुझे सच्चे प्यार की परिभाषा ही समझा दी , जतिन चुपचाप सर झुकाये अपराधियो की भांति रिया के सामन खडा था,
आखिर हुआ क्या जतिन और रिया के सच्चे प्यार में खटास आ ही गयी, जतिन ने रिया का देह तो पा लिया पर उसकी आत्मा को न तो छू पाया यहा तक कि सारा विस्वास भी खो दिया जतिन ने,
हमारे समाज मे अक्सर ये देखने को मिल रहा है की शादी के बाद ज्यादातर कुर्बानी लड़कियों को ही देनी पडती है, ससुराल वालों की खातिर अपने सपनो तक को मारना पड़ता है,
अगर जतिन ने सच मे अपने घर वालो को रिया के सपने के बारे में बता दिया होता और उन्हें मना लिया होता तो, शायद मामला इतना नही बिगड़ता और दूसरी बड़ी गलती रिया के घर वालो ने कर दिया उन्होंने जतिन पे आंख बंद करके विस्वास कर डाला अगर शादी की बातचीत के दौरान ही रिया के घर वाले रिया के सपनो के बारे में उसके ससुराल वालों को बता देते तो पूरी बात क्लियर हो जाती, भले ही जतिन को उसका प्यार नही मिल पाता पर झूठ की बुनियाद पर इस रिश्ते की नींव न खड़ी होती कम से कम ,,,आखिर ऐसा रिश्ता कैसे निभेगा!!!!!!!!
©निशा रावल
बिलासपुर