साज़िश – समिता बडियाल Moral Stories in Hindi

रीमा गुनगुनाती हुई अपने छोटे से बैग में कपडे डाल रही थी। उसकी माँ ने पूछा बेटा सारा सामान रख

लिया ना कुछ और तो नहीं चाहिए। नहीं माँ सब हो गया , और हाँ कल सुबह ११-१२ बजे तक वापिस आ

ही जाएंगे। आप परेशान मत होना। रीमा ने अपनी माँ से कहा और कॉलेज के लिए निकल गई। ये है रीमा

, कॉलेज सेकंड ईयर स्टूडेंट। आज शाम को कॉलेज ख़त्म होने के बाद वो और उसके दोस्त घर से थोड़ा दूर

घूमने जा रहे हैं। उसके ग्रुप में निशा , विवेक और अजय हैं। चारों का यही प्लान था कि शाम को कॉलेज के

बाद ही घूमने निकल जाएंगे और अगले दिन दोपहर तक वापिस आ जायेंगे। जगह ज्यादा दूर नहीं थी।

रीमा अपनी माँ को लोकेशन बता कर आयी थी। क्लास का समय हो गया तो सब अपनी-अपनी सीट पर

जाकर बैठ गए। थोड़ी देर में रीमा के फ़ोन पर एक व्हाट्स अप मैसेज आया। जिसे पढ़कर रीमा शॉक हो

गयी। मैसेज जय का था। जय कभी उसका बहुत अच्छा दोस्त हुआ करता था। जय शांत स्वभाव , हंसमुख

तो था ही पढ़ाई में भी बहुत अच्छा था। पिछले साल की परीक्षा में टॉप किया था उसने। पहले रीमा उसके

साथ ही होती थी , पर फिर वही जो लगभग सभी बच्चों के साथ होता है , रीमा को निशा और उसके दोस्तों

की लाइफ ज्यादा आकर्षित करती थी। बाइक्स , गाड़ियों में घूमना, पब में जाना ये सब रीमा को बहुत कूल

लगता था। जय उसे समझाने की कोशिश करता कि इन सबमें मत पड़ो। अच्छे से पढ़ाई कर लो, इन सब

बातों के लिए पूरी जिंदगी पड़ी है। पर रीमा, धीरे -धीरे निशा के ग्रुप में ही सम्मिलित हो गयी तब से जय

ने भी ज्यादा बात करना छोड़ दिया था।

आज बहुत दिनों बाद जब जय का उसे मैसेज आया तो वो हैरान हो गयी। मगर उससे भी ज्यादा परेशान

करने वाला उसका मैसेज था।उसमें लिखा था : रीमा इन लोगों के साथ घूमने मत जाना, इनके इरादे ठीक

नहीं हैं। इरादे ठीक नहीं हैं मतलब ? रीमा सोचने लगी ऐसा क्या हो सकता है ? जय ने ऐसा मैसेज क्यों

भेजा ? पर फिर भी उसे लगा शायद जय यूँही कह रहा हो , आखिरकार इन लोगों के लिए उसे जो छोड़

दिया था। पर फिर भी उसके मन में ये बात बैठ गई। कॉलेज ख़तम होते ही सब अजय की गाड़ी में बैठ

गए। जैसे ही रीमा गाड़ी में बैठी एक बार फिर जय का मैसेज आया : जा ही रही हो तो अपना ध्यान रखना

, थोड़ा चौकन्ना रहना और हाँ अपने फ़ोन से लोकेशन जरूर भेज देना। मैसेज पढ़कर रीमा फिर परेशान हो

गयी पर फिर भी उनके साथ चली गयी।

लोकेशन पर पहुंचकर रीमा ने फॉर्मेलिटी के लिए ही सही जय को लोकेशन भेज दी फिर अपने दोस्तों के

साथ मस्त हो गई। घूम फिर के , खाना खाकर जब रीमा और उसके दोस्त होटल पहुंचे तो वो काफी थक

चुके थे इसलिए अपने -अपने कमरों में सोने चले गए। निशा और रीमा एक कमरे में थीं , तो विवेक और

अजय उनके बगल वाले कमरे में थे।

रीमा सोच रही थी , जय बेकार में ही परेशान हो रहा था। कितना मजा आया इनके साथ। सोचते -सोचते

कब नींद के आगोश में चली गयी उसे पता ही नहीं चला। कुछ देर बाद अचानक ही रीमा की नींद खुली तो

उसने देखा निशा उसके साथ नहीं है। रीमा ने उठकर बाथरूम चेक किया तो वो वहां भी नहीं थी। कुछ

सोचकर वो अजय और विवेक के कमरे की तरफ़ बढ़ गयी। दरवाजे पर दस्तक देने ही वाली थी कि अपना

नाम सुनकर वही दरवाजे के पास खड़ी हो गयी. दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं था तो उन लोगों की बातें

आसानी से सुन सकती थी। निशा विवेक से कह रही थी : देख भाई हमने अपना काम कर दिया है , अब तू

जा और अपनी ड्रीमगर्ल के साथ मजे कर। विवेक बोला : अरे यार वो बड़ी संस्कारी टाइप की है , खुद को

हाथ भी नहीं लगाने देगी। तभी अजय कहता है : अरे भाई तो हम किस मर्ज़ की दवा हैं। ये ले बेहोशी की

दवा। रुमाल पर लगाकर उसे सुंघा दे फिर जो मन में आये वो कर। और सुन जल्दी करना थोड़ा , हम भी

तो उसकी जवानी का स्वाद चखेंगें , कहकर तीनों बेशर्मी से हंसने लगे। इतना सुनकर रीमा के पैरों के नीचे

से जमीन ही खिसक गयी। लड़खड़ाते हुए अपने कमरे में आ गयी , आखिरकार उसका भरोसा टूटा था। वो

उन तीनों की साजिश का शिकार होने जा रही थी। उसके हाथ -पैर ठन्डे हो रहे थे , दिल की धड़कन जोर –

जोर से चल रही थी। समझ नहीं आ रहा था उसे क्या करे। तभी जय का ध्यान आया , उसने तुरंत उसको

फ़ोन किया। जय ने पहली रिंग के साथ ही फ़ोन उठा लिया, जैसे उसी के फ़ोन का इंतजार था। रीमा ने

सारी बात रोते-रोते जय को बताई। जय ने सिर्फ इतना कहा , तुम सीधे रिसेप्शन पर आ जाओ। रीमा ने

जल्दी से अपना सामान लिया और रिसेप्शन की तरफ़ भागी। वहां जाकर देखा तो जय पहले से ही वहां

था। जय ने तुरंत उसका हाथ पकड़ा और अपनी गाड़ी में बिठाकर ले गया। उधर होटल में निशा और उसके

दोस्तों को पता चल गया कि रीमा वहां से भाग गयी है तो वो बस हाथ मलते रह गए।

गाड़ी में रीमा ने जय से पूछा तो उसने बताया, की वो कल क्लास से पहले जब वाशरूम गया था, तो उसने

अजय और विवेक की बातें सुन ली थी। तभी से उसे शक़ पड़ गया कि वो तुम्हारे साथ कुछ गलत करने की

सोच रहें हैं। तभी तुम्हें मैसेज करके चेतावनी भी दी थी। मैं तुम्हारे पीछे -पीछे ही आ गया था और इसी

होटल में था। तुमने वक़्त रहते फ़ोन कर दिया नहीं तो कुछ भी हो सकता था।

रीमा बार -बार भगवान को धन्यवाद कर रही थी की जय के जैसा दोस्त उसे मिला, नहीं तो वो किसी की

साजिश का शिकार हो जाती। उसने खुद से वादा किया कि आज के बाद ऐसे दिखावे वाले लोगों से दूर

रहेगी।

दोस्तों , आजकल बच्चे दिखावे के चक्कर में गलत संगत में पड़ जाते हैं। गन्दी चीज़ों की आदतें लगा लेते हैं ,

और अपनी जिंदगी तबाह कर लेते हैं। कई लड़कियां ऐसे ही साजिशों का शिकार होकर अपनी जान तक से

हाथ धो बैठतीं हैं। माता -पिता से अनुरोध है कि बच्चों के दोस्तों के बारे में खबर रखें , वो क्या करते हैं ,

कैसे रहते हैं ,उनसे हमेशा खुल कर बात करें। आपकी थोड़ी सी सावधानी आपके बच्चे की जिंदगी बर्बाद होने

से रोक सकती है।

कहानी प्रतियोगिता : साज़िश

स्वरचित , समिता बडियाल

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