अरे दीदी , जेठानी जी का गिफ्ट क्या देखना , उनके भाई ने तो सिर्फ एक पाँच सौ रुपए की हल्की साड़ी और मिठाई का डिब्बा पकड़ा दिया हैं , रानी हंसते हुए अपनी ननद आकांक्षा से बोली !!
देवरानी के लिए जेठानी के मायके से आया हुआ गिफ्ट उपहास का विषय बन चुका था यह मजाक माया ने सुन लिया तो उसकी आंखों में आंसू छलक गए क्योंकि वह ननद के कहने पर अपने भाई का दिया हुआ गिफ्ट लेने अपने कमरे में आई हुई थी !!
आज सुबह से ही जेठानी माया और देवरानी रानी दोनों घर के कामों में जोर- शोर से लगी हुई थी , घर में दोनों ने मिलकर बहुत से व्यंजन बनाए हुए थे , तीन तरह की मिठाईयां बाहर से मंगवाई गई थी , सब बहुत खुश थे क्योंकि आज रक्षाबंधन का त्योहार था !! माया और रानी के भाई – भाभी राखी बंधवाने घर आने वाले थे और दोनों की ननद आकांक्षा भी अपने भाईयों को राखी बांधने घर आने वाली थी !! सास मीना जी भी बाहर बरामदे में बैठकर आरती की थाल सजा रही थी उतने में उन्होंने देखा कि गेट पर गाडियां आकर रुकी , मीना जी बरामदे से बोली अरे माया और रानी बेटा , तुम दोनों के भाई एक साथ आ गए हैं , गेट खोलो !! अंदर रसोई से फटाफट माया अपने हाथ पोंछकर बाहर आई और उसने गेट खोला, सामने उसका भाई एक थैले में गिफ्ट लिए माया को देख मुस्कुरा रहा था , माया अपने भाई को देख बहुत खुश हुई , पीछे से रानी का भाई अपनी चमचमाती कार से उतरा और उसके हाथ में बहुत ब्रांडेड और महंगा गिफ्ट था ! माया ने दोनों के भाईयों का स्वागत किया और घर के अंदर ले आई !! आरती की थाल और सब कुछ तैयार था , राधा ने पहले अपने भाई राजीव को राखी बांधी , उसके भाई राजीव ने उसे गिफ्ट पकड़ाते हुए बोला – ज्यादा तो कुछ नहीं ला पाया मगर हां यह साड़ी मैंने खुद पसंद की हुई हैं !! राधा बोली भैया , आप वक्त निकाल कर राखी बंधवाने आते हो मेरे लिए यही सबसे महंगा तोहफा हैं !!
मीना जी बड़ी बहू की समझदारी भरी बातें सुन मुस्कुरा दी !! अब बारी थी रानी की , रानी ने भी अपने भाई को तिलक किया , राखी बांधी और मिठाई खिलाई ! रानी का भाई विराज उसे महंगा गिफ्ट का डिब्बा पकड़ाते हुए बोला – इस बार तेरे लिए महंगी डिजाइनर साड़ी और साथ में थोड़े कैश पैसे भी हैं , करीबन पाँच हजार हैं इन पैसों से तुम्हारा जो जी चाहे खरीद लेना !!
रानी हाथ में गिफ्ट और कैश लेकर एक अजीब सी नजरो से राधा को देखने लगी जैसे वह इतरा रही हो कि देखो भाभी मुझे मेरे मायके से कितना कुछ मिला हैं और आपको सिर्फ एक सस्ती सी साड़ी ! उसकी इन नजरो को राधा ने भांप लिया था साथ ही साथ मीना जी ने भी देख लिया था कि कैसे छोटी बहू बड़ी बहू को नीचा दिखा रही हैं !! राधा का चेहरा रानी की इस हरकत की वजह से बुझा बुझा सा हो गया फिर भी वह चुप रही और सभी को खाना – पीना कराने में व्यस्थ हो गई ! थोड़ी देर बाद दोनों के भाई वापस अपने घर चले गए तब तक मीना जी की बेटी आकांक्षा भी घर आ गई और उसने भी अपने भाईयों को राखी बांधी !! माया अपने कमरे में जाकर आकांक्षा के लिए एक झुमके का सेट और एक पायल का सेट ले आई , माया को गिफ्ट देते हुए देखकर रानी भी अपने कमरे में गई और आकांक्षा के लिए एक ड्रेस पीस और अंगूठी का सेट ले आई फिर से वह एक कुटिल मुस्कान माया के सामने दिखा रही थी , माया सब देखकर भी अनजान बनकर चुपचाप सब नजरअंदाज कर रही थी !
आज मीना जी की नजरें भी लगातार छोटी बहू रानी पर बनी हुई थी और वे रानी की सारी हरकते देख रही थी !! आज मीना जी को रानी में अहंकार की झलक साफ साफ दिखाई दे रही थी , रानी के मायके में बहुत पैसा था क्योंकि उसके पापा एक बहुत बड़े बिजनसमैन थे , वहीं माया के मायके वाले बहुत मिडल क्लास फैमिली के लोग थे , आज रानी बार बार माया को नीचा दिखा रही थी , वह अपने मायके वालो की तुलना माया के मायके वालो से कर रही थी यही चीज उसकी नजरो से साफ साफ झलक रही थी !!
खैर आकांक्षा की भी राखी हो गई थी और मीना जी ने आकांक्षा को आज रात यहीं रोक लिया था ! सभी परिवार वाले मिलकर बाते कर ही रहे थे कि रानी अपने कमरे से अपने मायके का गिफ्ट ले आई और आकांक्षा को दिखाते हुए बोली – यह देखो दीदी , मेरे भाई ने मुझे प्योर सिल्क की साड़ी और उपर से यह पाँच हजार रुपए दिए हैं , सचमुच मेरा भाई मुझसे बहुत प्यार करता हैं !! आकांक्षा ने माया की तरफ देखा और बोला भाभी , आप अपना गिफ्ट नहीं दिखाएंगी जैसे ही माया अपने कमरे में गिफ्ट लाने गई आकांक्षा माया का उपहास उड़ाते हुए बोली – अरे दीदी , जेठानी जी का गिफ्ट क्या देखना , उनके भाई ने तो उन्हें सिर्फ पाँच सौ रुपए की साड़ी दी हैं जिसे माया ने सुन लिया और उसकी आंखों में आंसू आ गए !!
माया एक बहुत ही सुलझी हुई समझदार इंसान थी , वह रानी के मुँह नहीं लगना चाहती थी इसलिए कब से रानी की हरकतें बर्दाश्त कर रही थी ! वैसे भी माया रुपए पैसो की लालची नहीं थी उसे तो बस अपने भाई के प्यार और लगाव से मतलब था ! उसकी नजरो में भाई के गिफ्ट से ज्यादा भाई के प्यार की कीमत थी उसका भाई उससे बहुत प्यार करता था उसके लिए वही काफी था !! मीना जी को रानी की हरकते बर्दाश्त नहीं हुई क्योंकि कोई रोकने वाला ना होने की वजह से उसका बड़बोलापन बढ़ता जा रहा था आखिरकार रात को जब सभी का खाना- पीना हो गया उसके बाद मीना जी बोली – रानी , एक बात बताओ कभी आगे चलकर अगर तुम्हें कुछ हो गया और तुमसे लोग सिर्फ इसलिए प्यार करना बंद कर दे कि तुम अब उतना दे नहीं सकती जितना पहले दिया करती थी तो तुम्हें कैसा लगेगा ??
मीना जी के अजीब से सवाल पर पहले तो रानी हैरान हुई फिर बोली बुरा लगेगा मम्मी जी क्यों क्या हुआ आप ऐसा क्यों पूछ रही हैं ??
मीना जी बोली – तो फिर तू अपनी जेठानी के रिश्ते की कीमत सस्ते गिफ्ट से क्यों लगा रही हैं और तुम्हारे भाई के प्यार की कीमत महंगे गिफ्ट और पैसो से क्यों लगा रही हो ?? अच्छा एक बात बताओ तुम्हारा भाई जो यह महंगे गिफ्ट तुम्हें देता है वह क्या उसकी खुद की कमाई के हैं ?? सास की बातें सुन रानी चुप रही तब मीना जी बोली – मैं जानती हुं तुम्हारा भाई अभी कुछ नहीं करता क्योंकि तुम्हारे पापा का इतना बड़ा बिजनेस हैं वह भी उसी में हाथ बंटा दिया करता हैं वह भी थोड़ा बहुत क्योंकि तुम्हारे पापा के पास बहुत से नौकर मौजूद हैं इसलिए तुम्हारे भाई पर अभी कोई जिम्मेदारियां भी नहीं , वह तो बस इसलिए महंगे गिफ्ट और पैसे दे पाता हैं क्योंकि तुम्हारे पापा उसे लाकर तुम्हें देने कहते हैं जब कि दूसरी तरफ माया का भाई जो कि पुरे परिवार की जिम्मेदारी अकेले उठा रहा हैं , माता- पिता , भाई – बहन , रिश्तेदारो में रिश्तेदारी निभाना वह सारी जिम्मेदारी निभाता हैं और उसमें भी बहन के लिए वक्त निकाल कर उसके लिए गिफ्ट खरीदने खुद जाता हैं ताकि बहन को अच्छा लगे !! भगवान ना करें कल के दिन तुम्हारे भाई की हालत यदि माया के भाई जैसी हो जाए फिर भी ईमानदारी से बताना क्या वह महंगे तोहफे और इतने सारे पैसे तुम्हें गिफ्ट कर पाएगा ?? कहते हुए मीना जी ने ध्यान से रानी की ओर देखा , रानी की तो बोलती बिल्कुल बंद हो गई थी और उसका चेहरा शर्म से झुक गया था !!
तभी मीना जी बोली – बेटा , भाई- बहन का असली प्यार गिफ्ट या पैसो का मोहताज नहीं , भाई- बहन का प्यार तो भावनात्मक होता हैं और रक्षाबंधन का असली मतलब भी यही हैं !! आज माया को कुछ भी तकलीफ होने पर उसका भाई उसकी एक आवाज पर तुरंत दौड़ा चला आता हैं ! भाई- बहन का रिश्ता भाई की हैसियत से नहीं , भाई की नीयत से तय होता हैं !! रिश्ते भाव से चलते हैं , पैसो से नहीं और अगर फिर भी विश्वास ना हो तो अभी कर लो तुम दोनों के भाईयों को फोन और देख लो दुबारा लौटकर कौन आता हैं ? मैंने भी यूं ही धूप में बाल सफेद नहीं किए बेटा , यह अनुभवी आंखें सब पहचानती हैं !
रानी का घमंड , पैसो का दिखावा आज मीना जी ने बहुत प्यार से चकनाचुर कर दिया था ! सांप भी मर गया और लाठी भी नहीं टूटी इस कहावत के जैसे ही रानी का घमंड भी टूट गया और उसे बुरा भी नहीं लगा क्योंकि मीना जी ने अपनी सारी बातें इतनी प्यार से कही थी ! आकांक्षा , माया और मीना जी सभी रानी की तरफ देख रहे थे ! रानी की आंखें भरी हुई थी , वह माया के पास गई और माफी मांगते हुए बोली – दीदी , मुझे माफ कर देना, मैं मेरी हद पार कर गई थी ! माया मुस्कुराकर बोली – नहीं छोटी , सुबह का भूला अगर शाम को घर वापस आ जाए तो उसे भूला नहीं कहते ! चलो अब अपने कमरे में जाकर आराम करते हैं , रात काफी हो चुकी हैं और फिर दोनों बहुएँ सोने चली गई ! उनके जाने के बाद आकांक्षा अपनी मां से बोली- मम्मी , यह आपने एकदम सही किया छोटी भाभी को रोककर वर्ना आगे चलकर छोटी भाभी बड़ी भाभी को खुन के आंसू रुलाती और फिर दोनों भाभियों में दरार पड़ना तय था !
बेटी की बात सुनकर मीना जी मुस्कुरा दी ! माया भी अपने कमरे में लेटे- लेटे यह सोचकर मुस्कुरा रही थी कि आज उसकी सास ने उसे अपनी देवरानी के सामने बेइज्जत होने से बचा लिया , अपने मायके की परेशनियों को समझने वाला ससुराल नसीब वालों को मिलता हैं !!
दोस्तों , असली रिश्ते प्यार और परवाह चाहते हैं , महंगे तोहफे नहीं !
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आपकी सहेली
स्वाती जैंन