रिश्ता निस्वार्थ प्रेम का । – अंजना ठाकुर  

ये क्या मां आप कमला को दस लाख रुपए दे रही हो दिमाग खराब हो गया क्या तुम्हारा राजीव अपनी मां सुधा जी से गुस्से से बोला।सुधा ने राजीव से चेक बुक निकलवाई और उसमें रकम भरी जिसे देख राजीव बौखला गया।

सुधा बोली शुक्र करो दस लाख ही कर रही  वो तो ममता आड़े आ गई नहीं ये घर भी उसे ही दे  जाती जानते हो तुम्हें तो पता है तुम्हें ये सब मिलेगा फिर भी तुम्हें मां से कोई प्रेम ,और जरूरत नहीं पर उसे तो अभी पता भी नहीं है फिर भी वो तन, मन और दिल से मेरी सेवा कर रही  ।

सुनकर राजीव गुस्से में बोला आप ऐसा नहीं कर सकती उसने तुम्हें मीठी मीठी बातों मै फंसा लिया में आज ही उसको निकाल दूंगा ।सुधा जी भी आज गुस्से में आ गई उन्होंने कहा अगर ऐसा किया तो मैं जरूर सबकुछ उसके नाम कर जाऊंगी सुनकर राजीव गुस्से से बाहर चला गया

सुधा जी अपने फैसले पर खुश थी हालांकि उन्हें लग रहा था ये कमला के निस्वार्थ प्रेम के आगे कुछ नहीं है पर ये एक संतुष्टि थी उनके मन की।

उन्हें याद आया राजीव के जन्म के समय उनके पति ने कहा था काम के लिए किसी को रख लो बच्चे के संग काम बढ़ जाता है तब कमला बीस साल की थी उसकी भी नई नई शादी हुई थी और काम की तलाश ही कर रही थी।

सुधा जी के पति बड़े पद पर थे अच्छी आय थी और सुधा से बहुत प्यार करते राजीव के बाद एक बेटी नैना हुई कमला को पूरे दिन के लिए रख लिया अब हर सुख दुख दोनों आपस में बांट लेती कब कमला  घर की सदस्य बन गई पता नहीं चला।कुछ भी परेशानी होती सुधा पूरी मदद करती राजीव  और नैना बड़े हो गए और उनकी शादी हो गई ।शुरू मै राजीव की पत्नी सुधा जी का बहुत ख्याल रखती फिर एक दिन उन्हें पैर मै लकवा मार गया और वो बिस्तर पर आ गई तब से उसका व्यवहार बदल गया लेकिन कमला ने पूरी जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली इसके लिए न उसने पैसा बढ़ाने की बात कही बस एक अपनेपन से सेवा करती रही दो साल बाद सुधाजी के पति चल बसे अब तो सुधाजी को और टूट गई ऐसे में भावनात्मक रूप से जुड़ी कमला ने उनका दर्द कम किया ।

बहू की बातों मै आकर राजीव भी बदल गया दिन भर में एक बार आता और दूर से ही हाल चाल पूछ लेता बेटी भी अपनी गृहस्थी में फंसी थी वो भी कम आती फोन पर बात कर लेती ।

सुधाजी को इस बात का दुख था कि अपनों का साथ नहीं है जिनसे खून का रिश्ता है ।वो तो ईश्वर का धन्यवाद करती की कमला को उन्होंने जिंदगी में भेज दिया राजीव के दो बच्चे हो गए पर वो भी दूर ही रहते क्योंकि उनकी बहू को पसंद नहीं था

धीरे धीरे सुधाजी का शरीर घुलने लगा था उन्हें अहसास हो गया कि वो ज्यादा दिन नहीं रहेंगी उनके पति सब कुछ उनके नाम ही कर गए थे और पेंशन भी थी उनके खर्चे के बाद भी रकम जुड़ रही थी कल कमला बोल रही थी कि उसे घर खाली करना है मकान मालिक बेच रहा है सात लाख में।अपना दुख बता रही थी किराए के घर की यही दिक्कत है खुद का हो तो सुकून रहता है ।

बस तभी से सुधा जी को लगा कि उसकी सेवा का छोटा सा मोल दे दें ।

आज कमला के आने पर उन्होंने उसे चेक देते हुए कहा कमला तू घर खरीद लेना में तेरी सेवा का मोल तो नहीं चुका सकती बस मेरा प्रेम है

कमला बोली नहीं भाभी इतनी बड़ी रकम नहीं ले सकती ।और मैने पैसों के लालच मै ये सब नहीं किया आपसे मेरा एक गहरा रिश्ता बन गया है।

सुधा जी बोली हां कमला मेरा भी ,कई बार खून के रिश्ते भी काम नहीं आते तेरी वजह से में जिंदगी काट पा रही हूं  ।मुझे सुकून मिलेगा कि मै भी तेरे लिए कुछ कर पाई।

कमला ने बेमन से चेक लिया और घर लिया उसने घर पर सुधा कृपा लिखवाया पता चलने पर सुधा जी बोली कमला अगले जन्म में भी तू मेरा साथ देना ।

आज सुधाजी दुनियां से विदा हो गई सबसे ज्यादा दुखी कमला ही थी ।

रिश्तों की परिभाषा कभी समझ नहीं सकते कई बार अपनों से भी प्यार नहीं मिल पाता कई बार गैर इतने अपने हो जाते है ।लेकिन सबकी चाह यही रहती है कि रिश्ता कोई भी हो बस प्यार बना रहे ।आपकी क्या राय है ..

स्वरचित

अंजना ठाकुर  

Thanking you

Regards

Anjana thakur

#एक रिश्ता ऐसा भी।।

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