मौन घुंघरू – डॉ उर्मिला सिन्हा

*”पच्चीस साल तक उसने अपनी कला को रसोई के डिब्बों के पीछे छिपाए रखा, इस डर से कि दुनिया क्या कहेगी। लेकिन जब एक दिन उसके कदम थिरके, तो उसी दुनिया को अपनी हथेलियां लाल करनी पड़ीं। पढ़िए एक ऐसी मां की कहानी जिसने साबित किया कि सपनों की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती।”* रमेश … Read more

आज़ाद पंख – आरती कुशवाहा 

*”वो समझता था कि वो उसे दबाकर रखेगा क्योंकि वो ‘औरत’ है, पर वो भूल गया कि वो एक ‘पिता’ की बेटी भी है। जब एक पिता अपनी बेटी की ढाल बना, तो बिखर गया रईसी और अहंकार का वो खोखला महल।”* “विमल, मुझे घरेलू हिंसा और दहेज़ प्रताड़ना का मतलब समझाने की ज़रूरत नहीं … Read more

उधार की शान – गरिमा चौधरी

*”दूसरों को अपनी रईसी दिखाने के चक्कर में बेटा कर्ज़ के दलदल में धंसता चला गया, लेकिन पिता ने अपनी बरसों की जमा-पूंजी देकर उसे दौलत का नहीं, बल्कि ‘सुकून’ का असली मतलब समझाया।”* राघव के हाथों से लिफाफा छूट गया। वह रो पड़ा और पिता के घुटनों पर सिर रख दिया। “नहीं बाबूजी, मैं … Read more

**ज़ायका ज़िन्दगी का: दूसरी पारी** – रीमा साहनी 

*”रिटायरमेंट के बाद जब दुनिया ने उन्हें ‘बेकार’ मान लिया, तब उनकी बहू ने रद्दी की टोकरी से उनके पुराने सपनों को ढूँढ निकाला और उन्हें ‘बेमिसाल’ बना दिया। पढ़िए एक ससुर और बहू की दिल छू लेने वाली दास्तां।”* “अक्सर लोग कहते हैं कि बेटा बुढ़ापे की लाठी होता है। मेरे पास बेटा भी … Read more

*पहला प्यार* – तोषिका

अर्शी चलो जल्दी से आकर अपना खाना खा लो उसके पापा रजत किचेन से आवाज लगाते हुए बोले। अर्शी जो स्कूल से बस आई ही थी, उत्सुकता से अपने पापा से पूछती है पापा आज मुझे मेरी क्लास के लड़के ने चाकलेट दी है, इसका मतलब वो मुझसे प्यार करता है। रजत निर्मल स्वर में … Read more

पहला प्यार – एम. पी. सिंह

बात बहुत पुरानी हैं लेकिन यादें एकदम ताज़ा. ये बात हैं जब में कॉलेज में था, मेरी क्लास में एक लड़की ने एडमिशन लिया, नाम था सरिता, उसे देखते ही मुझे प्यार हो गया. सरिता सुन्दर, सिंपल और कम बोलने वाली लड़की थीं और बस काम से काम रखती थीं. मैं मन ही मन उससे … Read more

पहला प्यार – प्रतिमा पाठक

कभी-कभी जीवन में कुछ मुलाक़ातें शोर नहीं मचातीं, बस मन में चुपचाप जगह बना लेती हैं। नेहा के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था। बस एक सादा-सा एहसास, जो धीरे-धीरे गहराता चला गया। नेहा शहर के सरकारी कॉलेज में पढ़ती थी। रोज़ वही बस, वही रास्ता, वही भीड़। लेकिन उस भीड़ में एक चेहरा … Read more

रिश्ते अधिकार से नहीं करूणा से निभते हैं। – परमा दत्त झा

नहीं चाचाजी हमारे साथ रहेंगे -यह करूणा थी जो अपने पति से लड़-झगड़कर उन्हें रखना चाहती थी जबकि उसका पति करूणेश उन्हें गांव भेजना चाहता था। ठीक है कहकर करूणेश अपने माता-पिता को लेकर गांव चला गया जबकि विजयी भाव से करूणा अपने पापा को फोन करने लगी। अरे यह क्या किया?-उस बूढे को क्यों … Read more

पहला प्यार – खुशी

दोस्तों प्यार एक ऐसा शब्द है जो किसी के जीवन में आये तो उसकी दुनिया बदल देता है सच्चा हो तो जीवन को स्वर्ग बनाता है और झूठा हो तो नर्क पर ये प्यार का मौसम है तो कहानी भी रूमानी सी होनी चाहिए। राज का बचपन का सपना था कि मैं आर्मी ऑफिसर बनूंगा।वो … Read more

सोने का दिल – अर्चना खंडेलवाल

*”हम अक्सर जिसे ‘कबाड़’ समझकर घर के कोने में फेंक देते हैं, मुसीबत के वक्त वही तिनका हमारी डूबती हुई नाव का सहारा बनता है। पढ़िए एक ऐसी सास की कहानी जिसने अपनी ‘कंजूसी’ से अपने बच्चों की दुनिया खरीद ली।”* “मम्मी जी, प्लीज! अब इस पुराने, जंग लगे लोहे के संदूक को स्टोर रूम … Read more

error: Content is protected !!