सबसे गहरा जख्म अपने ही देते हैं – संजय सिंह

अलार्म की घंटी बजी। राजू का हाथ अलार्म की तरफ बढ़ा।अलार्म की घड़ी को हाथ में पकड़कर टेबल लैंप को ऑन किया और देखा ।सुबह के 6:00 चुके हैं। रोजाना की तरह राजू अलार्म को बंद करके एकदम से उठा। कमरे की बड़ी लाइट ऑन करके, माता-पिता के कमरे की तरफ गया ।माता-पिता पहले ही … Read more

*सबसे गहरा ज़ख्म अपने ही देते हैं* – प्रतिमा पाठक

“अरे कलमुही! क्या रोना-धोना लगा रखा है? रोज सुबह-सुबह शुरू हो जाती है। कुछ चाय-नाश्ता मिलेगा या तेरे आँसुओं से ही पेट भरना होगा?” रमा की सास आशा देवी की कड़वी आवाज़ पूरे घर में गूँज उठी। रमा चुपचाप आँसू पोंछकर रसोई में चली गई। शरीर से वह बेहद कमजोर हो चुकी थी। अभी एक … Read more

मेहरबान किस्मत – गीता वाधवानी

 सुभद्रा जी, वृद्धाश्रम में अपने साथ रहने वाली एक सहेली विमला  को वापस घर जाते देख रही थी और मन ही मन सोच रही थी कि विमला की किस्मत कितनी अच्छी है पोती की समझदारी के कारण उन्हें अपना घर परिवार वापस मिल गया। दरअसल विमला के पोते को पता चल गया था कि उसकी … Read more

मेरा आईना – लतिका श्रीवास्तव

मां क्या जरूरत थी ये सब करने की अब इस उम्र में ..!! अमन की आवाज का लहजा तीखा और व्यंग्यपूर्ण था। शुभी के ठहरे कदम तेजी से वहां तक आ गए। क्या बात है इस तरह क्यों बोल रहे हैं आप उसने गर्दन झुकाए कुर्सी पर बैठी सास जी नीरजा की ओर देखते हुए … Read more

किस्मत – खुशी

चारु का बचपन बहुत ही खुशहाल था।पिताजी प्रणय  बिजली विभाग में थे तो मां  विनीता प्राध्यापिका घर में दादी शीला और 2 भाई बहन शिक्षा और विकास ।मां सुबह 8:00 बजे जाती और 1 बजे घर ।चारु कॉलेज के फाइनल ईयर में थी।बहन 12 वीं में और भाई 10 वी में था । विनीता के … Read more

नींव का पत्थर – मीनू त्रिपाठी

*”दिखावे की रोशनी में हम अक्सर उस दीये को बुझा देते हैं जो अंधेरे में चुपचाप जलकर हमारे घर की आबरू बचाता है। जानिए क्यों एक ‘एमबीए’ बहू झुक गई एक ‘घरेलू’ जिठानी के सामने।”* रसोई में बर्तनों की खनखनाहट के बीच सुमेधा के मन में चल रही उथल-पुथल का शोर कहीं ज्यादा तेज था। … Read more

वह किताब जो उसने छीन ली – रमा साहू 

*दुनिया ने उसे एक क्रूर सौतेली माँ कहा जिसने अपने बेटे के हाथ से किताबें छीनकर उसे अनपढ़ बना दिया, लेकिन सालों बाद जब उस बेटे ने माइक थामकर सच बोला, तो हर आँख शर्म से झुक गई।* — कमरे में दीवार घड़ी की टिक-टिक रात के सन्नाटे को चीर रही थी। रात के दो … Read more

वक्त की मार – गरिमा चौधरी

*”जब दौलत के नशे में चूर भाई ने चांदी के सिक्के को ‘भिखारी की भीख’ बताकर ठुकरा दिया, तब उसे नहीं पता था कि एक दिन वही ‘छोटा भाई’ अपनी पत्नी के गहने बेचकर उसकी सांसें खरीदेगा।”* हीरे की अंगूठी से सजी उंगलियों ने व्हिस्की का गिलास टेबल पर ऐसे पटका जैसे कोई फैसला सुनाया … Read more

*ऐसी किस्मत कहाँ* – तोषिका

मैं बस एक विकल्प ही हू और वो ही रहूंगी, मैं कभी किसी की प्राथमिकता नहीं बन सकती। मैं चाहे जितना भी कोशिश कर लू पर कुछ नहीं होता, मैने सपने में भी नहीं सोचा था ऐसी किस्मत होगी मेरी की कोई पूछने वाला ही नहीं है। शुरूआत में अब मीठे होते है बाद में … Read more

“राख से उजला आसमान”

“पिता के बनाए साम्राज्य को अपने घमंड में राख कर देने वाले बेटे को जब अपनी ही गर्भवती पत्नी की दवाइयों के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ीं, तो उसे वो सबक मिला जो दुनिया की कोई किताब नहीं सिखा सकती थी… पढ़िए एक घमंडी बेटे के टूटकर दोबारा खड़े होने की रोंगटे खड़े कर … Read more

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