परिचय की जरूरत -लतिका श्रीवास्तव :

हेलो जी क्या आप समर्थ जी केघर से बोल रहे हैं मैं राकेश उनका पुराना परिचित बोल रहा हूं ।मुझे उनसे मिलना है क्या वे घर पर है आवाज सुनते ही समर्थ ने तुरंत कहा नहीं मैं उनका भाई बोल रहा हूं भैया तो ऑफिस निकल गए हैं आप फिर कभी आइए और उधर से … Read more

एक मुँह दो बात और पंडित जी का फलसफ़ा – डॉ० मनीषा भारद्वाज :  Moral Stories in Hindi

“बिलकुल फाइनल है बाबूजी! अब चाहे सूरज पश्चिम से निकले या इंद्रदेव मूंगफली बेचने आ जाएँ, हमारी ललिता का रिश्ता उसी के साथ तय है। मेरी मर्जी के बिना इस घर में पंखा भी नहीं घूमता, फिर रिश्ते की बात ही क्या!” पंडित बृजकिशोर शुक्ला ने अपनी चाय का घूँट भरा और अखबार को जोर … Read more

पता नहीं क्यों ससुराल वाले बड़ी बहू को इंसान नहीं समझते” – रितिका सोनाली :  Moral Stories in Hindi

प्यार वाला पति मिला या पैसे वाला इस बात की कशम कश में जिंदगी बीती  जा रही है. आशा के पति का मिज़ाज़ अजीब ही है. सारी दुनिया की खुशियां खरीदने को तैयार लेकिन अपने घर में अपने भाई- बहन और माँ-बाप के आगे बिलकुल अदना सा किरदार बना कर रखने वाला व्यक्ति. अपनी आँखों … Read more

काली रात – मनु वाशिष्ठ : Short Story in Hindi

वो आखिरी रात__ आज भी याद है मुझे वह काली रात। हां काली ही कहूंगी, वैसे तो पूर्णिमा थी पर हम बच्चों के लिए, मां के लिए तो वह काली रात ही बनकर आई थी। बैठक में पिताजी के साथ अचानक कुछ अप्रिय घटित हुआ था, हवेली में सूचना मिलते ही दीदी, मां तुरंत बदहवास … Read more

ससुराल वाले बड़ी बहू को इंसान क्यों नहीं समझते – डोली पाठक :  Moral Stories in Hindi

मैके में छोटी बेटी होने के कारण संगीता कुछ अधिक हीं ‌नकचढ़ी थी। और हो भी क्यों नहीं,घर के सारे बड़े उसे इतना चाहते जो थे…. पिता को तो सदैव बस यहीं चिंता सताती रहती कि बिटिया ससुराल में कैसे सबसे घुल-मिल पाएंगी क्यों कि,इसे तो हर चीज में नखरे दिखाने की आदत है…. संयोगवश … Read more

काली रात – खुशी :  Moral Stories in Hindi

आराधना एक छोटे से कस्बे की लड़की जो दिल्ली शहर में पढ़ने आई। यहां पर उसकी कोई जान पहचान तो नहीं थी तो उसने एक गर्ल्स हॉस्टल  में रहने का ठिकाना ढूंढ लिया।वो पढ़ाई भी करती पर शहर के अलग खर्चे जो पिता द्वारा भेजे गए पैसों से पूरे नहीं होते थे इसलिए उसने एक … Read more

ससुराल वाले बड़ी बहु को इंसान क्यों नहीं समझते -सुदर्शन सचदेवा :

 Moral Stories in Hindi परिवार में जब बड़ी बहु आती है तो सबकी निगाहें उसी पर टिक जाती हैं , उससे उम्मीद की जाती है कि वो ही सारे घर को संभाले और छोटे बड़े का ध्यान रखे | हर परिस्थितियों में मुस्कराती रहे, वो इंसान की तरह नहीं बल्कि जिम्मेदारियों के बोझ तले दबे … Read more

शांति – प्रतिभा भारद्वाज ‘प्रभा’ :

 Moral Stories in Hindi “तुम्हें नींद आती भी है या नहीं सुबह से ही खटर-पटर शुरू कर देती हो…कम से कम अपना नहीं तो बाकी घरवालों का तो ध्यान रखा करो…” विजय अपनी पत्नी तारा को गुस्से में सुनाता जा रहा था। “सभी का ध्यान रखती हूं इसीलिए इतना सुबह जल्दी उठती हूं और सबके … Read more

ससुराल वाले बड़ी बहू को इंसान क्यों नहीं समझते – विधि जैन :

Moral Stories in Hindi बड़ी बड़ी बहू सुमन की शादी को लगभग 10 साल हो गए थे घर का सारा काम ससुराल में आकर सिखा सुमन बहुत समझदार पढ़ी लिखी थी लेकिन उसे जॉब करने नहीं मिला था जब भी वह अपनी इच्छा जाहिर करती कि मुझे भी घर से बाहर निकलना है तब सांस … Read more

काली रात – उमा वर्मा :

Moral Stories in Hindi मेरे जीवन की वह रात  “काली रात “बन गई थी मेरे लिए ।स्मृति के पन्ने बिखरने लगे थे।क्या क्या याद करूँ? उसदिन रात से ही विनय की तबियत बहुत खराब हो गई थी ।रात भर सो नहीं पा रहे थे ।बेचैनी और उल्टियाँ हो रही थी ।मैंने दिलासा दिया “अस्पताल चलते … Read more

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