“झूठे दिखावे से जिंदगी नही चलती — बच्चो,” अध्यापक जी क्लास में बच्चों को बता रहे थे।लेकिन उनकी बात सुनकर महेश बोला,” सर– जीवन को अच्छी तरह से जीने के लिए कुछ झूठा दिखावा तो करना ही पड़ता है,” इसपर अध्यापक जी ने कहा कि,” अभी तुम्हें शायद मेरी बात समझ में नही आयेगी लेकिन जिंदगी में कभी एक दिन ऐसा आयेगा तो तुम मेरी बात को दौहराओगे और मुझे याद करोगे और शायद तब मैं ना रहूँ इस दुनिया में।”
इस बात को एक अरसा बीत गया और अब सब बच्चे से युवा हो गए।
महेश भी बड़ा हो गया।बहुत बड़ा व्यापारी बन गया हीरे का।उसके परिवार का पुश्तैनी कारोबार था। उसके दादा जी बड़े सधे व्यक्तित्व के थे।वो बहुत गरीबी से आए थे।उन्होंने वो दिन देखे थे जब उनके घर में कभी कभी रोटी भी नसीब नही होती थी।पाँच भाई बहन थे।एक दूसरे के कपड़े पहनते थे।
उनकी माँ कहती थी कि,” लाला– जिंदगी असलियत से चलती है– अगर हम झूठा दिखावा करेंगे तो वो बहुत दिन नही चलेगा इसलिए अपनी सच्चाई के साथ चलो जो है उसी के अनुसार चलो– झूठे दिखावे का आवरण कभी मत ओढ़ना बेटा– हमेशा सुखी रहोगे।” और दादा जी ने हमेशा अपनी माँ की बात मानी और मेहनत चरते करते सफल
व्यापारी बन गए। समाज में उनकी साख थी।
महेश बहुत मेहनती था।उसने काम भी बहुत बढ़ाया लेकिन वो जिंदगी को शानो-शौकत से जीने की तमन्ना रखता था।और इसके लिए वो खूब खर्च करता।अपने दोस्तों को पार्टी देता।अंधाधुंध खर्च करता दिखावे के लिए। उसके दादा जी और पिताजी मना करते तो महेश कहता कि,” जब ईश्वर ने हमें इतना दिया है तो हम दिखावा क्यों ना करें– पैसा होता ही दिखाने के लिए– गर हम दिखावा नहीं करेंगे तो किसी को क्या पता चलेगा कि हमारे पास इतना पैसा है।”
किसी के समझाने से भी महेश को बात समझ में नही आई। अब उसकी शादी एक अमीर घर की लड़की से होगई और वो उससे भा ज्यादा खर्चीली थी।आये दिन किटी पार्टी करती और अपनी सहेलियों पर दिखाने के लिए खूब खर्च करती। सब झूठी वाहवाही करतीं और पीठ पीछे कहती कि,” देखो– इसको कितना घमंड है पैसों का– कितना दिखाती है।”
समय बीतता गया एक दिन एक एक्सीडेंट में महेश का एक पैर और हाथ कट गया।अब उसके व्यापार को संभालने वाला कोई नही था।दादा जी का कुछ दिन पहले स्वर्गवास होगया था और पिताजी भी अस्वस्थ थे।
उसके दोस्त थोड़े दिन तो उसके पास आते रहे उससे मिलने।फिर सबने धीरे धीरे आना कम कर दिया। अब महेश के पास जमापूंजी भी नही थी।वो सब तो उसने झूठे दिखावे में उड़ा दी थी।पत्नी के पास भी कुछ नही बचा था।
आज बिस्तर पर पड़े पड़े महेश को टीचर की बात याद आई कि,” झूठे दिखावे से जिंदगी नही चलती– जिंदगी वास्तविकता के धरातल पर टिकी होती है।” अब उसकी पत्नी को भी समझ आगई। उसकी पत्नी पढ़ी लिखी थी।उसको स्कूल में अध्यापिका की नौकरी मिल गई। धीरे धीरे महेश थोड़ा ठीक हुआ तो एक रिश्तेदार ने उसे कृत्रिम अंग के विषय में बताया।महेश ने नारायण सेवा संस्थान में जाकर अंग लगवा लिए और अपने काम को संभालने लगा।ईश्वर ने सुनी और उसके दिन फिरे और काम फिर से जम गया।
लेकिन अब महेश को सीख मिल गई कि “,झूठे दिखावे से जिंदगी नही चलती।”
उसके दो बेटे होगए थे। वे भी काम संभालने लगे।अब फिर से उसका हीरे का व्यापार चमक गया लेकिन उसको सीख देकर।।
लेखिका: डॉ आभा माहेश्वरी अलीगढ