अहसास – बीना शर्मा

,”मौसी जी आपने इतने सारे कपड़े क्यों रख दिए?” इनमें से कुछ कम कर दीजिए…. अब हमको समाज में दिखावा नहीं करना…… बस जरूरी कपड़े दे दीजिए* आकाश ने अपनी बहन की सास वंदना से कहा तो वंदना आकाश की बात सुनकर आश्चर्यचकित हो गई थी।

        कुछ महीने पहले जब उसने अपने बेटे विनय का रिश्ता आकाश की बहन विजेता से किया तो वह यह सोचकर खुद को बेहद किस्मतवाली समझ रही थी  कि उसकी होने वाली बहू और उसके परिवार वाले भी उनकी उनकी तरह बेहद सादगी से जीने वाले इंसान हैं क्योंकि उनके एक रिश्तेदार ने उन्हें बताया था

कि विजेता के घर वाले बेहद साधारण ढंग से रहने वाले इंसान हैं और आप भी आर्थिक रूप से संपन्न होने के बावजूद साधारण ढंग से रहते हैं तब उन्होंने खुशी-खुशी अपने बेटे विनय का रिश्ता विजेता के साथ पक्का कर दिया था परंतु, उन्हें उस वक्त अपनी किस्मत पर बहुत दुख हुआ

जब एक त्यौहार से कुछ दिन पहले ही उनके पड़ोस में एक युवक की बीमारी के कारण मौत हो गई थी तब पड़ोस का वातावरण दुखी होने के कारण उसने अपनी होने वाली बहू को सीमित मात्रा में अपने घर की रीति रिवाज के अनुसार वस्त्र, फल ,मिठाई और कई चीज भेंट में दी थी

जिन्हें पाकर विजेता और उसके परिजनों ने  उन्हें खुशी से धन्यवाद देने की बजाय उन पर सामान कम देने का आरोप लगाते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा “कि लगन सगाई पर लड़की के लिए ज्यादा से ज्यादा सामान भेजना ताकि समाज में आए हुए लोग ज्यादा सामान देखकर  उनकी प्रशंसा करें।

    तब वंदना ने आकाश को  अपनी मजबूरी के कारण कम सामान देने के लिए समझाने की बहुत कोशिश की थी लेकिन आकाश ने उनकी मजबूरी समझने की बजाय उनकी बात को नजर अंदाज कर दिया था तब वंदना का मन बेहद आहत हुआ था।

       आकाश की इच्छा पूरी करने के लिए उसने विजेता और उसके परिजनों को देने के लिए बहुत सारा सामान खरीद लिया था और उसे लगन सगाई पर देने की पुरी तैयारी कर लीं थी लेकिन संयोग से लगन सगाई से एक दिन पहले ही आकाश के परिवार  में भी एक युवक कि अचानक एक हादसे में मौत हो गई थी जिससे उसके घर का माहौल भी बेहद दुखदाई हो गया था। 

          अगले दिन जब वह लगन सगाई के अवसर पर अपनी बहन की ससुराल गया तो लगन सगाई की रस्म संपन्न हुई तब विदा करते हुए वंदना जब उन्हें सारा सामान देने लगी तो आकाश उनसे हाथ छोड़कर बोला “मौसी जी अब इतना सामान मत दो परिवार में मौत होने के कारण अब हम बेहद दुखी हैं अब हमें किसी को सामान नहीं दिखाना इसमें से सामान कम कर दीजिए।”

  तब आकाश की बात सुनकर वंदना को अपना वक्त याद आ गया था वह आकाश से दुखी स्वर में बोली”बेटा जब इंसान किसी की मजबूरी नहीं समझता तब उस इंसान को समझाने के लिए भगवान उसके साथ वैसा ही व्यवहार करता है तब उसे दूसरे का दुख समझ आता है j इंसान को दूसरे का दुख भी तभी समझ में आता है जब वह खुद उस पीड़ा से गुजरे काश !.तुम उस वक्त मेरी मजबूरी समझ लेते तो शायद आज तुम्हें यह दुख झेलना नहीं पड़ता अब मैं इस सामान को घर में रखकर क्या करूंगी ?” तुम इसे  अपने साथ ही ले जाओ।”

       वंदना की बात सुनकर आकाश को अपनी भूल का एहसास हो गया था अपनी गलती का पश्चाताप करने के लिए वह बार-बार हाथ जोड़कर वंदना से माफी मांगने लगा तो वंदना ने बड़ा दिल रखते हुए उसे माफ करके खुशी खुशी सारा सामान देकर उसे उसके घर के लिए विदा कर दिया था।

इस रचना के माध्यम से मैं यही कहना चाहूंगी कि लोगों को एक दूसरे का दुख और उनकी मजबूरी समझनी चाहिए यदि लोग एक दूसरे की मजबूरी नहीं समझते तब भगवान कुछ ऐसा करते है कि उन्हें जल्द ही दूसरे की मजबूरी समझ में आ जाती ती है क्योंकि कर्म लौट कर जरूर आते हैं।

#किस्मतवाली

लेखिका : बीना शर्मा 

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