सम्मान का मोल – रीमा साहू

सर्दियों की एक सर्द शाम थी, जब सुमेधा अपने कमरे में बैठी हुई फोन के रिसीवर को अपने हाथों में पकड़े हुए सुन्न सी रह गई थी। बाहर हल्की-हल्की धुंध छाने लगी थी, लेकिन सुमेधा के मन के भीतर विचारों का एक घना कोहरा उमड़ पड़ा था। फोन कट चुका था, लेकिन दूसरी तरफ से … Read more

असली राजकुमार

रामनारायण जी ने अपने दोनों बेटों, सूरज और मयंक का विवाह कराकर घर में दो सर्वगुण संपन्न बहुओं का प्रवेश कराया था। रितु और कविता, दोनों ही बहुएँ स्वभाव से बहुत ही संस्कारी और घर को बांध कर रखने वाली थीं। देखते ही देखते दो-तीन सालों के भीतर घर का आँगन पोते-पोतियों की किलकारियों से … Read more

कंगन की गूंज – निभा राजीव “निर्वि”

“एक मां ने अपनी बेटी के लिए वो दुनिया चुनी जो समाज की नजर में ‘उतरन’ थी, लेकिन उस दुनिया में बेटी को वो मिला जो मां ने पूरी जिंदगी खोया था।” शादी की शहनाई की आवाज़ के बीच, हर तरफ जश्न का माहौल था। रंग-बिरंगे कपड़ों में सजी-धजी औरतें, मेहमानों की हंसी-ठिठोली और पकवानों … Read more

ऑनलाइन ज़िंदगी – मुकेश पटेल 

रामकिशोर जी ने अपने चश्मे को नाक पर थोड़ा ऊपर खिसकाया और हाथ में पकड़े हुए त्यागपत्र (Resignation Letter) को दोबारा पढ़ा। उनके हाथ हल्के से काँप रहे थे। सामने उनका बेटा मोहित सोफे पर टांग पर टांग चढ़ाए अपने मोबाइल में कुछ टाइप कर रहा था, उसके चेहरे पर एक अजीब सी बेफिक्री थी। … Read more

अब मुझसे नहीं होती तुम्हारे बाबूजी की सेवा – अर्चना खंडेलवाल 

“समीर, मेरी बात ध्यान से सुनो। अब मुझसे नहीं होती तुम्हारे बाबूजी की सेवा। बस, बहुत हो गया।” आवाज़ में न तो गुस्सा था, न ही कोई ऊँचा स्वर। एक अजीब सी ठंडी, सपाट और निर्णय लेने वाली दृढ़ता थी। समीर पलटा। सामने उसकी पत्नी, वंदना खड़ी थी। उसके चेहरे पर थकान की लकीरें थीं, … Read more

सम्मान को अधिकार ना समझे। – लतिका पल्लवी

  जाड़े के दिन थे। कड़ाके की ठंड पर रही थी। 1से 5तक की कक्षा विद्यालय नें स्थगित कर दिया था पर 6 से 12 की पढ़ाई चल रही थी। विद्यालय सात बजे की जगह नव बजे से खुलता था पर बच्चों को जाना पड़ता था और जब बच्चे विद्यालय जाएंगे तो उनके खाने के लिए … Read more

भाभी हो तो ऐसी – आरती शुक्ला

सूरज की शादी में अब बस तीन हफ्ते रह गए थे। घर में हलचल थी—कभी टेंट वाले की बात, कभी कार्ड का डिजाइन, कभी मेहमानों की लिस्ट। लेकिन सूरज के मन में एक खालीपन था जो किसी लिस्ट से नहीं भरता। वह रात को देर तक जागता, और सुबह उठते ही अपने माथे की शिकन … Read more

मै भी तो एक बेटी हूं – विनीता सिंह

आज रमेश जी कुर्सी पर बैठे अपनी मां शन्ति देवी से बात कर रहे थे ।तभी वहां प्रिया आई और बोली पापा मां बुला रही है ।शान्ति देवी ने कहा रमेश बेटा जल्दी जा देख। बहू को परेशानी होगी। इसलिए बुला रही है और फिर शान्ति देवी भगवान के हाथ जोड़कर कहने लगी । भगवान … Read more

ये कैसी इज्जत है – आरती कुशवाहा

“मीरा, आज कंपनी की फाउंडेशन डे पार्टी है, मेरे सम्मान में स्पेशल अवॉर्ड भी मिलने वाला है… शाम को जल्दी तैयार रहना, ऑफिस से लौटकर फ्रेश होकर सीधे क्लब चले जाएँगे,”आरव ने ड्रॉअर से अपनी घड़ी उठाते हुए कहा। मीरा चहक उठी,“सच में? वाह, ये तो बहुत बड़ी खुशखबरी है! तुम्हारे साथ चलूँगी, मुझे भी … Read more

ढलती उम्र का साया

सुबह का समय था। रसोई में रिया टिफिन पैक कर रही थी। रवि ऑफिस जाने की जल्दी में तैयार हो रहा था। उसने ऊँची आवाज़ में कहा —“रिया, मेरा टिफिन तैयार हो तो जल्दी दो। मुझे देर हो रही है।” रिया ने टिफिन आगे बढ़ाते हुए धीरे से कहा —“सुनिए, क्या आज भी आप पापा … Read more

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