ऑनलाइन ज़िंदगी – मुकेश पटेल 

रामकिशोर जी ने अपने चश्मे को नाक पर थोड़ा ऊपर खिसकाया और हाथ में पकड़े हुए त्यागपत्र (Resignation Letter) को दोबारा पढ़ा। उनके हाथ हल्के से काँप रहे थे। सामने उनका बेटा मोहित सोफे पर टांग पर टांग चढ़ाए अपने मोबाइल में कुछ टाइप कर रहा था, उसके चेहरे पर एक अजीब सी बेफिक्री थी। … Read more

अब मुझसे नहीं होती तुम्हारे बाबूजी की सेवा – अर्चना खंडेलवाल 

“समीर, मेरी बात ध्यान से सुनो। अब मुझसे नहीं होती तुम्हारे बाबूजी की सेवा। बस, बहुत हो गया।” आवाज़ में न तो गुस्सा था, न ही कोई ऊँचा स्वर। एक अजीब सी ठंडी, सपाट और निर्णय लेने वाली दृढ़ता थी। समीर पलटा। सामने उसकी पत्नी, वंदना खड़ी थी। उसके चेहरे पर थकान की लकीरें थीं, … Read more

सम्मान को अधिकार ना समझे। – लतिका पल्लवी

  जाड़े के दिन थे। कड़ाके की ठंड पर रही थी। 1से 5तक की कक्षा विद्यालय नें स्थगित कर दिया था पर 6 से 12 की पढ़ाई चल रही थी। विद्यालय सात बजे की जगह नव बजे से खुलता था पर बच्चों को जाना पड़ता था और जब बच्चे विद्यालय जाएंगे तो उनके खाने के लिए … Read more

भाभी हो तो ऐसी – आरती शुक्ला

सूरज की शादी में अब बस तीन हफ्ते रह गए थे। घर में हलचल थी—कभी टेंट वाले की बात, कभी कार्ड का डिजाइन, कभी मेहमानों की लिस्ट। लेकिन सूरज के मन में एक खालीपन था जो किसी लिस्ट से नहीं भरता। वह रात को देर तक जागता, और सुबह उठते ही अपने माथे की शिकन … Read more

मै भी तो एक बेटी हूं – विनीता सिंह

आज रमेश जी कुर्सी पर बैठे अपनी मां शन्ति देवी से बात कर रहे थे ।तभी वहां प्रिया आई और बोली पापा मां बुला रही है ।शान्ति देवी ने कहा रमेश बेटा जल्दी जा देख। बहू को परेशानी होगी। इसलिए बुला रही है और फिर शान्ति देवी भगवान के हाथ जोड़कर कहने लगी । भगवान … Read more

ये कैसी इज्जत है – आरती कुशवाहा

“मीरा, आज कंपनी की फाउंडेशन डे पार्टी है, मेरे सम्मान में स्पेशल अवॉर्ड भी मिलने वाला है… शाम को जल्दी तैयार रहना, ऑफिस से लौटकर फ्रेश होकर सीधे क्लब चले जाएँगे,”आरव ने ड्रॉअर से अपनी घड़ी उठाते हुए कहा। मीरा चहक उठी,“सच में? वाह, ये तो बहुत बड़ी खुशखबरी है! तुम्हारे साथ चलूँगी, मुझे भी … Read more

आशीर्वाद

“वाह री नई बहू! सुबह-सुबह सोफे पर पैर चढ़ाकर बैठी है, हाथ में मोबाइल, सामने लैपटॉप… और सासू माँ वहाँ किचन में बर्तन खटखटा रही हैं। ज़रा-सा भी ख्याल नहीं कि घर में बड़ों की भी कोई ज़रूरत होती है कि नहीं!” शारदा चाची ने ड्राइंग रूम से ही ऊँची आवाज़ में कहा ताकि उनकी … Read more

बहू सिर्फ़ काम करने के लिए नहीं होती – आरती कुशवाहा

सुबह के दस ही बजे थे, पर शर्मा हाउस में शोर ऐसा था जैसे पूरा मुहल्ला जुट आया हो। ड्रॉइंग रूम में बड़े से स्पीकर पर गाने बज रहे थे, किचन में गैस पर एक साथ तीन-तीन बर्तन चढ़े थे, और आँगन में प्लास्टिक की कुर्सियाँ पोंछी जा रही थीं। “अरे नेहा, जरा जल्दी कर, … Read more

घूँघट

शादी के बाद पहली बार नैना अपने पति के साथ मायके आ रही थी  नैना की भाभी( मधु)—सुबह से ही बिना रुके दौड़-भाग में लगी थी। चूल्हे पर खीर उबल रही थी, गैस पर कढ़ी चढ़ी थी और बीच-बीच में वह सजावट भी ठीक करती जा रही थी। उधर, मधु की देवरानी निधि, जो नई-नई … Read more

आप बड़ी हैं

    अपने हाथ में ‘वरिष्ठ नागरिक ‘का प्रमाण-पत्र देखकर कामिनी खुशी-से झूमने लगी।आज वो सचमुच की बड़ी हो गई थी।अब वो भी बड़ी कहलाएगी..उसे भी सम्मान मिलेगा जिसके लिये वो बरसों से…हाँ,बरसों से ही तो तरस रही थी…।          तीन भाई-बहनों में वो सबसे छोटी थी।उससे बड़े राजेश भईया थे और सबसे बड़ी थीं रागिनी दी।घर में … Read more

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