बस मां अब इस गुनाह की माफी नहीं ! – स्वाती जैंन

इतनी हल्की साड़ी , कम से कम शादी के थोड़े दिन तो भारी सड़ियां पहन लो भले दिखावे के लिए सही , जरूर यह साड़ी तुम्हारे मायके वालो ने ही दी होगी , जाओ और इसे तुरंत बदलकर हमारे घर की भारी साड़ी पहनो रमीला जी अपनी बहू सपना से बोली ! सपना सास की … Read more

एक बहन का त्याग बना दूसरी बहन की खुशी !! – स्वाती जैंन

आंटी जी गर्म- गर्म खा लिजिए , वैसे मुंबई के समोसे और गुजरात के समोसे में काफी फर्क होता हैं , खुशबु के ऐसा बोलते ही सभी लोग हंस पड़े ! घर में खुशनुमा माहौल था , आज खुशबु की बड़ी बहन शैली को लड़के वाले देखने आए हुए थे !  खुशबु के पिताजी कमलेश … Read more

जब मां की नसीहत बेटी पर पड़ी भारी – स्वाती जैंन

सोनी , तुम सास के पास गांव जाकर क्या करोगी ? उन्होंने वैसे भी वहां अपनी बेटी को बुला रखा हैं तो तुम भी यहां मायके दिवाली मनाने आ जाओ , सास – ससुर को कितना भी अपना बना लो वह कभी माँ- बाप नहीं बन सकते ! सोनी की मां ममता जी सोनी से … Read more

रिश्ते महंगे तोहफो के मोहताज नहीं होते ! – स्वाती जैंन

अरे दीदी ,  जेठानी जी का गिफ्ट क्या देखना , उनके भाई ने तो सिर्फ एक पाँच सौ रुपए की हल्की साड़ी और मिठाई का डिब्बा पकड़ा दिया हैं , रानी हंसते हुए अपनी ननद आकांक्षा से बोली !! देवरानी के लिए जेठानी के मायके से आया हुआ गिफ्ट उपहास का विषय बन चुका था … Read more

यह तो हमारे गांव का नौकर हैं !!-स्वाती जैंन

अरे वाह !! पापा जी फाईनली कल गाँव जा रहे हैं यह सोचकर आरती को आज सुकुन की नींद आ गई और दूसरे दिन आरती सुबह जल्दी उठ गई , सबसे पहले उसने फटाफट टिंडे की सब्जी और पराठे बना दिए ताकि ससुर जी को गांव जाते समय पैक करके दे पाए !! आज उसके … Read more

बुढ़ी आंखें सब पहचानती है !! – स्वाती जैन

अर्जुन ,  कुछ सीखो तुम्हारे दोनों बड़े भाईय़ों से, राजीव पढ़- लिखकर नौकरी पर लग गया और आनंद की भी बस पढ़ाई पुरी होने को हैं और एक तुम हो जिसे बस एक्टिंग का भूत सवार हैं , गुस्से में बोले हरिशंकर जी !! अर्जुन बोला- पापा, पढ़ाई में मन नहीं लगता हैं मेरा, मैं … Read more

जब घी सीधी उंगली से नहीं निकलता तो उंगली टेढ़ी करनी पड़ती हैं !! – स्वाती जैंन

बहु , यह कैसा बेढ़ंगा खाना बनाया हैं तुमने ?? दाल- सब्जी में तो कुछ स्वाद ही नहीं हैं , दाल में नमक कम हैं और सब्जी में मिर्च ज्यादा हैं !!मेरे बेटे सन्नी को तो मेरे हाथो का खाना बहुत स्वाद लगता हैं , तुम्हारे हाथों में वह स्वाद नहीं !! अब क्या करूं … Read more

एक मां की चुप्पी को उसकी कमजोरी मत समझना – स्वाती जैंन

दरवाजे की बेल बजी वैसे ही तान्या बोली -लो आ गई तुम्हारी मां पार्क से , आज ऐसी डांट लगाना रोहित कि तुम्हारी मां पार्क जाना ही भूल जाए !! रोहित ने दरवाजा खोला और यशोदा जी से बोला – मां यह बार – बार पार्क घूमने क्यों चली जाती हो ?? घर में कितने … Read more

जो मायके की ना हुई वह ससुराल वालों की क्या होगी – स्वाती जैंन

भाभी , कितनी चालाकी से फंसाया होगा ना आपने मेरे भैया को तभी तो भैया ने पुरे परिवार के खिलाफ जाकर आपसे शादी की हैं , यह मेंहदी , यह लिपस्टिक , यह चेहरे पर इतनी सारी लिपापोती यही सब करके मेरे भाई को अपने वश में कर लिया होगा ना , सिम्मी अपनी नई … Read more

देहाती लोग कभी नहीं सुधरेंगे !! – स्वाती जैंन

सुनीता बोली सच गाँव के लोगो को शहर के कितने भी तौर – तरीके सीखा लो मगर वे गाँव वाली हरकतें ही करेंगे !! यह सुनकर रुक्मणि जी का दिल एक बार फिर टूट गया , कितनी उम्मीदे लेकर गाँव से आए थे रमाकांत जी और रूक्मणि जी मगर सुनीता दोनों को कुछ भी सुनाने … Read more

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