उपहार वही जो दिल से दिया जाए – कुमुद मोहन : Moral Stories in Hindi

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“नीता!तुम्हारे विकास भैया का फोन मेरे ऑफिस में आया था तुम्हार भतीजे कुणाल की शादी तय हो गई ,मई में शादी है, हमें बहुत इसरार और सम्मान से ब्याह का न्यौता दे रहे थे! कह रहे थे “आप घर के दामाद हैं बहन से पहले आप को फोन कर रहा हूं!पता है नीता मुझसे झगड़ा … Read more

नज़ाकत रिश्तों की – कुमुद मोहन : Moral Stories in Hindi

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सुधा की ननद रीना और ननदोई सुरेश अपने छः साल के दो जुड़वा बेटों के साथ राखी के लिए उसके घर आने वाले थे| सुधा और विकास की शादी को छः महीने ही हुए थे, दोनों ने मिलकर अपना छोटा सा फ्लैट बड़े मन से सजाया था| नया फर्नीचर, नये पर्दे, नया कालीन, नई क्राक्ररी, … Read more

ननदिया ने हाये राम बड़ा दुख दीना – कुमुद मोहन : Moral Stories in Hindi

New Project 50

विनी डियर! इस बार रीना-जीजा जी और बबली होली हमारे साथ मनाने आ रहे हैं ध्यान रखना कोई कमी ना रह जाए। सुधीर ने अपनी नई नवेली दुल्हन विनी से कहा। सुधीर और विनी के ब्याह को एक महीना ही हुआ था। नई-नई शादी का खुमार नया सामान नया घर सजाने में दोनों तन-मन से … Read more

“कड़वा सच” – कुमुद मोहन : Moral Stories in Hindi

New Project 60

” आज हमारे परिवार में एक डॉक्टर और जुड़ गया!अब से मेरी बेटी डॉक्टर नीना मेरे साथ मेरी क्लीनिक में बैठेगी “! नीना के पिता डॉक्टर रवि चंद्रा ने गर्व और खुशी से कहा! वे बहुत खुश थे कि उनकी तीसरी पीढ़ी भी डॉक्टर बन गई!  “क्या मतलब नीना आपके साथ क्लीनिक पर बैठेगी?अरे भई … Read more

मैं अपने अहंकार के आगे रिश्तों का महत्व भूल गई – कुमुद मोहन : Moral Stories in Hindi

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“हलो टीना!रिनी बोल रही हूं!विकास एक हफ्ते को मुंबई ट्रेनिंग में जा रहे हैं!बड़ा मन है दो-चार दिन तुम्हारे साथ रहने का!तुम कहो तो मैं तुम्हारे पास आ जाऊं”? टीना ने अपने पति मुकेश को रिनी के आने के बारे में बताया तो उसने मुँह बनाकर जवाब दिया”बस तुम मिडिल क्लास लोगों के साथ यही … Read more

जीवन संध्या – कुमुद मोहन : Moral Stories in Hindi

New Project 72

“तुम्हें कितनी बार कहा दरवाजे पर खड़ी ना मिला करो” सुरेश जी ने घर का गेट खोल कर अंदर आते हुए सीमा जी से कहा!”इतनी ठंडी हवा चल रही है और बिना शाॅल लिए बाहर खड़ी हो! चलो अंदर चलो”,और कुर्सी पर पड़ा शाॅल सीमा जी को उढ़ाकर उन्हें हाथों का सहारा देकर अंदर ले … Read more

पापा! नीता की जगह अगर आपकी बेटी होती तो… – कुमुद मोहन : Moral Stories in Hindi

New Project 84

नीता और रमन की शादी का दिन था। यह वह दिन था जिसका नीता ने बचपन से सपना देखा था। अपने मन में अनेक सपनों और उम्मीदों के साथ वह रमन के साथ फेरे लेने के लिए तैयार थी। मंडप में सजी हुई नीता के चेहरे पर एक मीठी सी मुस्कान थी, उसकी आँखों में … Read more

परिवार ही सबसे बड़ी जमापूंजी है – कुमुद मोहन : Moral Stories in Hindi

New Project 34

 रमा जी के लिए यह दिन विशेष रूप से कठिन था। उनके पति रात में घर में अचानक गिर पड़े थे, और डॉक्टर ने बताया कि उनकी पैर की हड्डी में फ्रेक्चर है। उम्र के इस पड़ाव पर एक छोटी सी चोट भी बड़ी मुश्किल बन जाती है, और वे अकेले अपने पति की देखभाल … Read more

सच्चे रिश्ते प्यार, सम्मान और समझ पर टिके होते हैं – कुमुद मोहन : Moral Stories in Hindi

New Project 36

  आज नीता की शादी थी। नीता ने जब से अपनी दुल्हन की जोड़ी पहनी थी, तब से उसके चेहरे पर चमक और मुस्कान थी, लेकिन मन में कुछ हल्का सा डर भी था, जो हर दुल्हन के मन में होता है—अपने मायके से विदा होने का, एक नये घर में कदम रखने का। नीता के … Read more

“नज़ाकत रिश्तों की” – कुमुद मोहन : Moral Stories in Hindi

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“कान खोल कर सुन लो तुम दोनों! नीमा और दामाद जी राखी पर आ रहे हैं कोई कमी ना होनी चाहिए!और बहू जी तुम? तुम तो अपनी कंजूसी अपने घरवालों के लिए ही बचा के रखना !मेरी बेटी की आवभगत खूब अच्छी तरह होनी चाहिए बस!” मयंक तुम आज ही जाके बैंक से पैसे निकाल … Read more

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