करियर – करुणा मलिक : Moral Stories in Hindi

माँ , कल ग़ाज़ियाबाद जाना है तो आरती के लिए गाजर का हलवा बना दो , ले जाऊँगा । कुणाल ट्यूशन से आता ही होगा , सामान ले आएगा ।  बता ! एक- आध दिन पहले बता देता तो तिल के लड्डू भी बना देती । अब कल जाना है और अब बता रहा है … Read more

नया फ़्लोर – करुणा मलिक : Moral Stories in Hindi

किससे बात कर रही थी सीमा ? खाना दे दो फिर मुझे बाज़ार जाना है… वो रसोई के केबिन लगवाने के लिये कुछ सैंपल लाने हैं । बहुत देर से इंतज़ार कर रहा था कि कब तुम फ़ोन रखोगी ।  जी-जी ….. बस अभी सेकी गर्म-गर्म रोटियाँ । वो वीना दीदी का फ़ोन था , … Read more

पछतावे के आँसू – करुणा मलिक : Moral Stories in Hindi

रोनित  , कब  तक तुम छुट्टी लोगे यार …. तुम्हारा और  चंचल भाभी का इतना ही साथ था । जीवन में आगे बढ़ना ही पड़ेगा । मैं और इशिता भारत जा रहे हैं । तुम भी चलो ….. कैसे जाऊँ? एक तो मैंने घर में बिना बताए शादी की । ऊपर से छोटी सी रुमी … Read more

कलयुग की यशोदा माँ – करुणा मलिक : Moral Stories in Hindi

सरोज! अब मेरी भी टिकट बुक करवा दो । ब्याह के पूरे एक महीने पहले आ गई थी । सारे काम बढ़िया से निपट गए , बहू- बेटा भी घूमफिर कर आ गए । ब्याह की थकान भी उतर गई , भई ! अब मत रुकने को कहना ।  चलो ठीक है जीजी ! कल … Read more

अपमान – करुणा मलिक: Moral Stories in Hindi

रवीश , आप क्यों बार-बार चाहत को यह महसूस कराना चाहते हो कि अभि से शादी करनी उसकी गलती है। जब हमारी बेटी उसके साथ खुश है तो फिर परेशानी क्या है?  वो उसके साथ खुश नहीं है गीता ! कमाल है कि तुम माँ होकर भी अपनी बेटी का चेहरा नहीं पढ़ सकती । … Read more

वो दो साल – करुणा मलिक : Moral Stories in Hindi

भाभी, आप इतना सब कुछ कैसे सह लेती हो और फिर सहने की ज़रूरत भी क्या है? जब भी अपने मायके जाती हो , हमेशा परेशान होकर ही आती हो । जब वहाँ आपको मान- सम्मान मिलता ही नहीं तो रिश्ता ख़त्म करके अपने घर में सुख- चैन से रहो । सुबह भाई से बात … Read more

दिल का रिश्ता – करुणा मलिक : Moral Stories in Hindi

तुम क्यों भाई साहब के पास बैठी रहती हो ?  शायद माँ को अच्छा नहीं लगता, आज फिर से तुम्हें समझाने के लिए कह रही थी ।  मैंने ऐसी कौन सी गलती कर दी जिसमें समझाने की ज़रूरत पड़ गई ? अरे , दोपहर को खाना खाने के बाद भाई साहब लॉन में बैठते हैं … Read more

डिगरी से समझ नहीं आती – करुणा मलिक : Moral Stories in Hindi

सोनिया , बेटा कल शाम  कल्पना जी  और आशीष अपने कुछ रिश्तेदारों के साथ सगाई की रस्म करने आ रहे हैं तो कल सवेरे राघव को स्कूल और संदीप जी के ऑफिस जाने के बाद इधर  ही आ जाना । और  उन्हें बता  देना कि शाम को सीधे यहीं आ जाए ।तू सुन रही है … Read more

इतना तो बनता ही है – करुणा मलिक : Moral Stories in Hindi

माँ, आप कल बच्चों के साथ  क्यों सोई  थी ?  क्यों… क्या मैं बच्चों के साथ नहीं सो सकती?  सो सकती हैं पर वो बाबूजी रात में अकेले रहे । मैं तो केवल ये कह रही थी कि अंश को बाबूजी के पास भेज देती या  आप दोनों पोतों के साथ रहना चाहती थी तो … Read more

पहल – करुणा मलिक : Moral Stories in Hindi

मम्मी! सर्दियाँ शुरू हो गई है । चलो ये पुराने कपड़े किसी को दे आएँ ताकि नए कपड़ों के लिए जगह बन जाएँ । निक्की, क्या सारे ही गर्म कपड़े निकाल दोगे ? पहनकर देख लो ,अभी तो एकदम नए हैं ।  पर इस साल इनका फ़ैशन नहीं रहेगा मम्मी!   दूसरे कमरे से आती अपनी … Read more

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