कलंक बना तिलक – डॉ कंचन शुक्ला : Moral Stories in Hindi

New Project 34

“आप ऐसा कैसे कर सकते हैं ” मेरे घर की इज्जत का सवाल है भाई साहब मैं अपने घर-परिवार नाते -रिश्तेदारों से क्या कहूंगी आप लोगों ने शादी क्यों तोड़ दी भाई साहब मेरी बेटी बदनाम हो जाएगी हम समाज में क्या मुंह दिखाएंगे?” गायत्री जी ने घबराई हुई आवाज में कहा  ” मैं मजबूर … Read more

क्षमादान – डॉ कंचन शुक्ला : Moral Stories in Hindi

New Project 98

घर के सभी लोग वीरेंद्र जी के कमरे में उपस्थित थे वीरेंद्र जी की पत्नी सविता,उनका बड़ा बेटा मंयक,उसकी पत्नी पुष्पा, वीरेंद्र जी की बेटी रीता इन सबके चेहरों पर शर्मिंदगी साफ दिखाई दे रही थी उसी कमरे में वीरेंद्र जी का छोटा बेटा रवि और उसकी पत्नी गुंजन भी थे गुंजन के चेहरे पे … Read more

अपमानित सिंदूर – डॉ कंचन शुक्ला : Moral Stories in Hindi

New Project 59

निशा जल्दी जल्दी घर के कामों को निपटाने में लगी थी , आज उसकी किटी थी उसे वहां पहुंचना था। मां जी मैंने खाना बनाकर डाइनिंग टेबल पर लगा दिया है,आप और पापाजी खा लीजिएगा,मैं शाम की चाय से पहले आ जाऊंगी निशा ने अपनी सास से कहा। ठीक है बहू तुम निश्चिंत होकर जाओ … Read more

गलती या गुनाह – डॉ कंचन शुक्ला : Moral Stories in Hindi

New Project 96

“शायद मेरे ही संस्कारों में कोई कमी रह गई होगी जो तूने ये हरकत की है अगर मुझे पता होता कि,तू पढ़ाई-लिखाई के नाम पर प्रेम की पींगे बढ़ा रही है तो मैं तुम्हें आगे पढ़ने की इजाजत देती ही नहीं तू तो कुल का कलंक बन गई अगर ये बात तेरे पिताजी को पता … Read more

वाग्दान – डॉ कंचन शुक्ला : Moral Stories in Hindi

New Project 97

नीलिमा!! जल्दी करो कितनी देर लगेगी तैयार होने में वहां प्रकाश और भाभी जी हमारा इंतज़ार कर रहे होंगे” देव ने अपनी पत्नी से कहा। “आ रहीं हूं !!”तभी देव ने देखा नीलिमा अपनी साड़ी का पल्लू ठीक करती हुई आ रही थी। वहां पहुंचकर नीलिमा देव को घूरते हुए बोली ,” क्यों चिल्ला रहे … Read more

सासू मां आप मुझे बेटी बनाकर लाई थी पर आपने मुझे बहू का भी अधिकार नहीं दिया – डॉ कंचन शुक्ला Moral Stories in Hindi

New Project 66

अलार्म  की आवाज सुनकर मेनका की आंख खुल गई इस समय सुबह के 5 बजे थे उसका उठने का मन नहीं कर रहा था उसे कल रात सोने में बहुत देर हो गई थी ननद ने अपने बेटे का जन्मदिन यहीं अपने मायके में बनाया था केक से लेकर खाने का सभी सामान घर में … Read more

मुजरिम और सज़ा – डॉ कंचन शुक्ला Moral Stories in Hindi

New Project 49

” उसके आंसू उसके दिल के दर्द को बंया कर रहे थे राजीव , इसलिए मैंने उसे ज्यादा कुरेदना उचित नहीं समझा” मुक्ता ने अपने पति राजीव को गम्भीरता से जवाब दिया।    ” मुक्ता तुम दिल की  अच्छी और मासूम हो सभी को अपने जैसा समझती हो यही वजह है तुम लोगों की बातों पर … Read more

error: Content is Copyright protected !!