आज विपुल जब से अपने दोस्त डॉ पराशर से मिलकर आया है कुछ अनमना बेचैन सा है और कारण है वही पुराना चेहरा और उस से जुड़ी सभी यादों का जिन्दा हो जाना।
आज 20 साल बाद भी मानो कल की ही बात लगती है जब विपुल आस्था के घर अचानक ही रात में पहुंचता है।आस्था और विपुल साथ में पढ़ते थे और एक दूसरे को पसंद भी करते थे जिस का थोड़ा बहुत अंदाज़ा उनके घर वालों को भी था मगर सभी सही समय आने का जैसे इंतज़ार कर रहे थे।
आस्था के घर पहुंच कर विपुल ने दरवाज़ा खटखटाया क्योंकि पूरे शहर में उस समय पावर कट था,”कौन है बाबा,आ रही हूं,”कहते हुए हाथ में कैंडल लेकर आस्था ने दरवाज़ा खोला तो विपुल को देखकर खुश हो गई।”अरे,तुम यहां कैसे, मां देखिए ,विपुल आया है।”कहते हुए उसे अंदर आने का रास्ता दिया,इधर विपुल उसे निहारता ही रह गया,कितनी सादा और कितनी मासूम लग रही थी उसकी आस्था मगर ये खुशी थोड़ी देर की ही रहने वाली थी।
मां ने उसे ड्राइंग रूम में बिठाया और आस्था को चाय नाश्ते के लिए कहा। आस्था उसकी पसंदीदा प्याज की पकौड़ी और अदरक वाली चाय बनाने के लिए चली गई,मगर उसके कान और दिल ड्राइंग रूम की तरफ ही लगा था।
चाय नाश्ता लेकर जब आस्था पहुंची तो उसे लगा माहौल कुछ गंभीर है तभी मां ने उसे अंदर कमरे में जाने को कहा।
आस्था को कुछ समझ नहीं आया मगर मां की बात मानकर वो वहां से उठकर चली गई।थोड़ी देर बाद विपुल के जाने की आवाज़ आई और मां कुछ परेशान सी अंदर आई और कहने लगीं,”बेटा तुम तो कह रही थी विपुल तुमको पसंद करता है और शादी करना चाहता है,मगर वो तो अपने बड़े भाई सुशील की तुमसे शादी की बात करने आया था।”
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“नहीं मां,ये नहीं हो सकता ,आप कुछ गलतफहमी हुई होगी।विपुल ऐसा कर ही नहीं सकता और उसके घर में भी सबको पता है।सुशील भईया को हो सकता है ना पता हो क्योंकि वो नौकरी की वजह से बाहर रहते हैं और मैं तो उन्हें दो तीन बार ही घर पर मिली हूं। मां आपको कुछ गलतफहमी हुई है”,आस्था ने लगभग चीखते हुए कहा और रोने लग गई।
मां ने उसे बहुत समझाया और कहा बेटा, मैं खुद हैरान परेशान हूं कि उसने ऐसा क्यों किया।
रात भर आस्था रोती रही और सुबह उठते ही सबसे पहले विपुल को फोन किया कि उसने ऐसा सोचा भी कैसे।मगर विपुल ने कहा कि वो भईया का दिल नहीं तोड़ सकता ,उन्हें ये नहीं बता सकता।आस्था मां से पूछकर विपुल के घर गई और सुशील भईया से सब सच कह दिया और साथ ही यह भी कि अब वो इस घर में कभी नहीं आयेगी क्योंकि जो इंसान मुझे इस तरह दुविधा में छोड़ सकता है तो जीवन में मेरा साथ क्या देगा ।इस तरह की ना जाने कितनी और मुश्किलें आएंगी तब भी विपुल ऐसा ही करेगा तो अब मैं इसका भरोसा नहीं कर सकती और ये कहकर विपुल को छोड़कर चली गई।
आज भी वो कसक विपुल के अंदर बाकी है.. उस अधूरी मुलाकात की कसक.काश वो कह पाता तो आज दिन ही कुछ और होता।मगर हर प्रेम कहानी पूरी नहीं होती..है मुलाकात पूरी नहीं होती।
रश्मि श्रीवास्तव