इतनी हल्की साड़ी , कम से कम शादी के थोड़े दिन तो भारी सड़ियां पहन लो भले दिखावे के लिए सही , जरूर यह साड़ी तुम्हारे मायके वालो ने ही दी होगी , जाओ और इसे तुरंत बदलकर हमारे घर की भारी साड़ी पहनो रमीला जी अपनी बहू सपना से बोली !
सपना सास की बात सुन सपना असहज हो गई और तुरंत अपने कमरे में जाकर यह साड़ी उतार कर दूसरी साड़ी पहनकर रसोई में आ गई !
सपना का बचपन गांव की उन गलियों में बीता था जहां उसके घर में हर रोज छप्पर से पानी टपकता था और हर त्योहार पर मां बच्चों को मिठाई खिलाकर खुद सुखी रोटी में ही संतोष कर लेती थी ! सपना के पिताजी एक दर्जी थे जो पुरानी सिलाई मशीन से कपड़े सिलकर घर की रोजी – रोटी चलाते थे !
सपना भी पढ़ाई पूरी कर अपने पापा के साथ इसी काम में लग गई थी ! घर में अब सपना की शादी की बात होने लगी थी ! सपना की चाची ने बताया कि सपना के लिए एक रिश्ता आया हैं ,लड़का शहर में मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करता हैं , शहर के पॉश इलाके में रहता हैं और संस्कारी लड़की चाहिए !
आखिर शादी पक्की हो गई और फिर धूमधाम से शादी भी हो गई पर सपना के मायके से आया मामूली सामान, मामूली गहने और हलकी साडियां ससुराल वालों की आंखों में खटक गई बस अब यही से सपना की जिंदगी तानो भरी और संघर्षो वाली होने वाली थी ! पति राजीव भी अपने ससुराल वालो की गरीबी पर शर्मिंदा था
इसलिए अपनी मां के तानो का कभी कोई जवाब नहीं देता था ! सपना की जिंदगी आगे बढ़ी और सपना ने दो जुड़वां बच्चों को जन्म दिया मानव और राही ! बच्चें धीरे धीरे बड़े हो रहे थे और घर में अपनी दादी और बुआ रश्मि के मुँह से अपने नाना- नानी के लिए ताने सुनते !
सपना की चुप्पी अब बच्चों से भी छुपी नहीं थी ! एक रोज मानव अपनी मां से पूछ बैठा मम्मी क्या नाना- नानी सच में बहुत गरीब हैं ? सपना समझ चुकी थी कि जो ताने उसे अब तक चुभते थे वह अब उसके बच्चों के मन में भी जहर भरने लगे हैं लेकिन क्या सपना इन तानों से हार जाएगी या उसकी चुप्पी एक दिन ऐसा जवाब बनेगी जिसे कोई अनसुना नहीं कर पाएगा
यहीं सवाल कहानी को आगे लेकर जाएगा ! सपना की जिंदगी एक नया मोड लेगी और कुछ ऐसा होगा जो ससुराल वालों की सोच को झकझोर कर रख देगा ! अपने मासूम बेटे के मुँह से यह सवाल सुन सपना अतीत के गलियारे में खो गई जब शादी के बाद उसकी पहली रसोई थी और वह सबके लिए खाना बनाकर लाई थी ननद रश्मि ने हंसते हुए कहा था
गांव वाली खाने की खुशबु आ रही हैं मम्मी , तुम तो कहती थी अच्छे खानदान की बहू हैं लेकिन इसका तो खाना भी घटिया हैं बिल्कुल इसके मायके वालों की तरह ! उसकी बात सुनकर रमीला जी भी हंस पड़ी थी और सपना की आंखें आंसुओं से भर गई थी !
जब सपना अपनी मां को फोन करके उनकी तबीयत पूछती तो उसकी सास ताना मारते हुए कहती तुम्हारे मायके में है ही क्या ? ना वहां का दवाखाना ठीक है , ना वहां का खाना पानी ठीक है , तुम्हारी मां बीमार ही रहती होगी ज्यादा , इस घर में उनसे बातें करके हमारे घर का माहौल मत खराब किया करो , हर बार सपना भीतर से टूटती जाती !
एक रोज सपना के छोटे भाई का फोन राजीव पर आया और वह बोला मुझे अपने बिजनेस के लिए कुछ पैसों की जरूरत है जीजाजी अगर आपकी मदद मिल जाती तो अच्छा होता ! राजीव भड़क कर बोला मैं यहां मेरे परिवार के लिए कमाता हुं कोई बैंक नहीं हूं जो बार-बार तुम्हारी मदद करूं , सपना सब सुन रही थी !
आज उसे रिश्तो की असली सच्चाई समझ आई थी जहां सम्मान पैसों से तोला जाता हैं प्यार भरे शब्दों से नही ! एक रोज जब सपना ने मशीन पर अपनी बेटी के लिए फ्रॉक सिली तो रमीला जी बोली बहू यह हैं तुम्हारा शौक , हमारे घर में पैसों की कमी नहीं हैं
मगर तुम्हारे खुन में गरीबों वाला ही काम हैं इसलिए तुम यही कर सकती हो ! उस दिन से सपना ने अपनी मायके से आई सिलाई मशीन को बक्से में बंद करके रख दिया था ! सास के तानो से सपना हर बार अंदर से टूटती मगर अब उसकी सास और नन्द के ताने उसके बच्चों का दिल छलनी कर रहे थे
अब सपना ने तय कर लिया था कि अब वह कुछ ऐसा करेगी जिससे उसकी गरीबी नहीं उसकी गरिमा ऊंची नजर आएगी ! सपना ने बहुत साल बाद अपनी मायके से लाई हुई सिलाई मशीन निकाली जिसका ससुराल वाले मजाक उडा चुके थे , सपना ने उसे साफ किया उसमें तेल डाला ! एक कोने में बैठकर उसने एक सलवार – सूट का सेट सिलना शुरू किया !
रश्मि हंसकर बोली मम्मी अब आपकी बहू अमीरो की बहू नहीं मोहल्ले की दर्जिन बनेगी ! उस दिन सपना ने रश्मि की आंखो में देखकर पहली बार कहा हां मैं दर्जिन बनूंगी और अपने बच्चों को सिर उठाकर जीना सिखाऊंगी ! अब सपना अपने पडोस वाली और अपनी सोसायटी की सारी लेडिज के कपड़े सिलने का काम लेने लगी ,
कोई लहंगा सिलने दे जाता तो कोई बच्चियों के फ्रॉक , कोई सलवार- सूट ! धीरे धीरे सपना के हुनर की तारीफ चारों तरफ फैलने लगी !
एक रोज राजीव के बॉस की बीवी राजीव से बोली – मैंने आपकी पत्नी से दो सूट सिलवाए थे , बहुत अच्छी कढ़ाई की हैं उन्होंने, सच जादू हैं उनके हाथों में ! राजीव को पहली बार सपना पर गर्व महसूस हुआ ! राजीव अब सपना का पहले से ज्यादा सम्मान करने लगा था मगर रमीला जी और रश्मि की आंखों में सपना ओर चुभने लगी थी !
रमीला जी लोगो से कहती सारा दिन बहू ने मशीन चला चलाकर सिर दुखा दिया हैं और रश्मि ने मारे जलन के सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डाली – कुछ लोग एक पुरानी मशीन से दो पैसे कमाकर खुद को रानी समझने लगते हैं ! सपना ने भी वह पोस्ट देखी मगर कुछ नहीं बोली !
सपना की इज्जत अब घर में , सोसायटी में पति और बच्चों की नजरों में बढ़ती जा रही थी जो रमीला जी और रश्मि से देखी नहीं जा रही थी ! जब मां- बेटी ने देखा कि सपना पर अब इनके व्यंग्य या तानों का कोई असर नहीं पड़ रहा तब मां बेटी की यह जलन अब साजिश में बदलने लगी ! दोनों ने मिलकर सोच लिया कि वे किसी ना किसी तरह से सपना को इस घर से निकाल कर ही दम लेंगी !
एक दिन राजीव के ऑफिस जाने के बाद सास ने बताया कि उसके गहने तिजोरी से चोरी हो गए हैं और सबसे पहला शक सपना पर जताया ! रश्मि चिल्लाकर बोली- अब समझ में आया यह सपना भाभी बच्चों के लिए नए जूते , नया सामान , बच्चों के खिलोने, अपनी मशीन की मरम्मत के लिए पैसे फटाफट कहां से ला रही हैं ? अब तक तो हम यही समझ रहे थे कि मेहनत कर रही हैं मगर असलियत यह थी !
रमीला जी बोली मैं पुलिस बुलाऊंगी , यह औरत तो घर की ही इज्जत लूट रही हैं ! सपना मां- बेटी की बाते सुन सन्न रह गई थी ! वह कांपती आवाज में बोली- मांजी यह क्या कह रही हैं आप ? मैं ऐसा क्यों करूंगी ? मगर दोनों मां- बेटी एकमत होकर उस पर चढ़ गई थी !
रश्मि बोली जैसे मायके से आई हो वैसा ही काम किया तुमने आज फिर सपना के दोनों बच्चों से बोली – देखो बच्चों कैसी निकली तुम्हारी मां ? मानव और बेटी राही स्तब्ध खड़े थे , शाम को जब राजीव ऑफिस से आया सारा नाटक तैयार था , रमीला जी झूठी आंखें छलका रही थी , रश्मि खाली तिजोरी दिखा कर रो रही थी, भैया यह तो चोर निकली !
राजीव कुछ नहीं बोला फिर एक क्षण में सपना से पूछ बैठा क्या यह सच हैं ? सपना को राजीव का यह सवाल झकझोर गया वह बोली अगर आपको लगता हैं यह सच हैं तो पुलिस बुलाइए और अगर नहीं तो इस झूठ से मेरी आत्मा को मत जलाईए ! इस बार मानो सपना कोई अग्निपरीक्षा से गुजर रही हो पति राजीव और अपने ही बच्चों की नजरों से वह गिर चुकी थी ! अगले दो दिन घर का वातावरण मानो किसी अपराधबोध से उलझा हुआ सा था !
सपना ने दो दिन से रसोई में कदम भी नहीं रखा था ! राजीव और बच्चें कोई सपना से बात नहीं कर रहा था ! थोड़ी देर बाद अचानक राही को कुछ याद आया वह अपने खिलौने वाले बॉक्स से वही गहनों का डिब्बा ले आई जो गायब बताया जा रहा था ! वह डिब्बा देख कर सभी की आंखें फटी की फटी रह गई ,
राही मासूमियत से बोली यह डिब्बा बुआ ने मुझे खिलौने के डिब्बे में छुपाने बोला था मगर मैं नहीं जानती थी कि इससे मेरी मम्मी को चोर समझा जाएगा !
राजीव की आंखों में खून उतर आया , वह डिब्बा अपनी मां के सामने फेंकते हुए बोला- आपने मुझे मेरी ही पत्नी पर शक करवाया , आपने मेरे बच्चों को झूठ बोलना सिखाया , आपने पुरे घर के विश्वास को खा लिया ! रश्मि की तो ऐसी हालत हो गई जैसे कोटो तो खून नहीं !
रमीला जी कुछ बोलने को गई कि राजीव बात काटते हुए बोला बस मां अब इस गुनाह की माफी नहीं , मुझे अब आपकी और रश्मि की कोई बात नहीं सुननी ,
अब आज से मेरे बच्चों की मां ही इस घर की असली मालकिन हैं और जो इसकी इज्जत नहीं करेगा वह इस घर में नहीं रह सकता ! दूर खड़ी सपना सब सुन रही थी , अब उसे किसी के विश्वास की जरूरत नहीं थी बस उसके पति और उसके बच्चों ने उसका साथ दे दिया , इतना काफी था उसके लिए !
भगवान के घर देर हैं अंधेर नहीं और उसका न्याय भले देर से होता हैं मगर होता जरूर हैं और अंततः जीत हमेशा सच की होती हैं ! रमीला जी और रश्मि कितनी सुधरी यह तो वक्त ही बताएगा मगर अब घर के सारे फैसले सपना के हाथों में थे और अपने पति और बच्चों का साथ भी !
दोस्तों , आपको कैसी लगी यह कहानी कमेंट में जरूर बताईए !
आपकी सहेली
स्वाती जैंन !