सोनी , तुम सास के पास गांव जाकर क्या करोगी ? उन्होंने वैसे भी वहां अपनी बेटी को बुला रखा हैं तो तुम भी यहां मायके दिवाली मनाने आ जाओ , सास – ससुर को कितना भी अपना बना लो वह कभी माँ- बाप नहीं बन सकते ! सोनी की मां ममता जी सोनी से फोन पर बोली !
हां मम्मी , मैं भी अपनी पहली दिवाली मायके में ही मनाना चाहती हुं , राहुल ऑफिस से आ जाएंगे फिर उनसे बात करूंगी सोनी फोन पर बोली !
राहुल आज बहुत खुश था , ऑफिस से आते ही वह बोला – सोनी दो दिन बाद गांव जाना हैं , तुमने सारी तैयारी तो कर ली हैं ना …..
सोनी मुँह चढ़ाकर बोली – राहुल तुम्हारी मां ने भी तो तुम्हारी बहन को दिवाली के लिए गांव बुलाया हैं वैसे ही मेरा भी मन कर रहा हैं कि मैं भी दिवाली मेरे मायके में मनाऊं !
राहुल बोला – शादी के बाद यह हमारी पहली दिवाली हैं सोनी इसलिए मां- पापा हमें गांव बुला रहे हैं , रही बात मेरी बहन की तो उसे शादी किए आठ साल हो चुके हैं , उसके सास- ससुर स्वर्ग सिधार चुके हैं और जीजाजी तीन महिने से विदेश में हैं , मां- पापा ने दीदी को गांव बुला लिया ताकि दीदी दिवाली पर घर में अकेली ना रहे , मेरी दीदी से तुम अपनी तुलना क्यों कर रही हो ? हम घर के बेटे- बहू हैं तो हमारा फर्ज हैं कि हम दिवाली मां- पापा के साथ मनाए !
सोनी राहुल की कोई बात सुनने तैयार नहीं हुई और उल्टा नाराज होकर बैठ गई, नई- नवेली पत्नी नाराज थी इसलिए राहुल को भी अपनी पहली दिवाली पत्नी के मायके मनाने पड़ी ! राहुल और सोनी दिल्ली शहर में एक थ्री.बी.एच के मकान में रहते थे , राहुल पेशे से इंजीनियर था , उसके माता पिता गांव में रहते थे और सोनी का मायका दिल्ली के पास नोएडा में ही था ! तीन दिन बाद मायके से लौटी सोनी मां ममता जी की नसीहतों की पोटली भी साथ बांधकर ले आई थी , सास- ससुर तो सिर्फ बहू को नौकरानी समझते हैं , दुःख- दर्द में तो मायके वाले ही काम आते हैं , ससुराल वाले नहीं इन सब नसीहतों ने सास- ससुर के प्रति सोनी के दिल के दरवाजे हमेशा के लिए बंद कर दिए थे ! राहुल भी सोनी को हमेशा खुश देखना चाहता था इसलिए उसने भी कभी सोनी पर कोई बंदिशे नहीं लगाई और ससुराल जाने के लिए कभी नही कहा ! थोड़े दिनो बाद राहुल पर उसके पापा गिरधारी जी का फोन आया कि राहुल की मां बाथरूम में फिसल गई हैं और उन्हें पैर में फैक्चर हुआ हैं , तब राहुल आकर सोनी से बोला सोनी मां की देखभाल करने हमें गांव जाना पड़ेगा ! सोनी बोली राहुल एक महिने बाद मेरे इकलौते भाई की शादी हैं , मुझे मेरी मां के साथ खुब सारी शापिंग करनी हैं , मेरे इकलौते भाई की शादी के लिए मेरे दिल में खुब सारे अरमान हैं , अभी डांस भी सीखना हैं , शापिंग भी बाकी हैं तुम एक काम करो गांव में तुम्हारी मां की देखभाल के लिए तुम्हारी दीदी को बुला लो !
राहुल बोला- सोनी, तुम घर की बहू हो तो मां की देखभाल का पहला कर्तव्य तुम्हारा बनता हैं , तुम दस दिन मां की सेवा कर लो फिर मैं दीदी को बुला लूंगा ! अब सोनी के पास ना कहने का ओर कोई रास्ता नहीं बचा , बेमन से ही सही उसे ससुराल जाना पड़ा !
गिरधारी जी और सरोज जी बेटे- बहू को देखकर खुश हो गए ! राहुल ने ऑफिस से पंद्रह दिन की छुट्टी ली हुई थी ,वह भी अपनी पत्नी के साथ मिलकर अपनी मां की खुब देखभाल करता , जैसे ही दस दिन बाद सोनी की ननद गांव आई , सोनी जल्दी से नोएडा वापस आने निकल गई जैसे कोई पक्षी पिंजरे से आजाद हुआ हो , नोएडा आकर अपने भाई की शादी का पुरा जिम्मा सोनी ने अपने कंधो पर ले लिया ! सोनी के भाई निरंजन की शादी धूमधाम से हुई , उसके बाद सोनी अपने घर दिल्ली आ गई , दिल्ली आकर उसने एक बार भी सास की तबीयत के बारे में नहीं पूछा ! कई बार सोनी के भाई- भाभी नोएडा से दिल्ली आते , चारो मिलकर पब ,रेस्टारेंट और घूमने जाते और खुब मजे करते ! एक बार राहुल ऑफिस से खुशी खुशी घर आकर बोला – सोनी, चार दिन बाद मम्मी- पापा यहां आ रहे हैं ! सोनी को यह सुन धक्का लगा वह बोली- बुलाने से पहले एक बार मुझसे तो पूछ लेते ! राहुल बोला – इसमें पूछना कैसा ? उनके बेटे का घर हैं ! सोनी बोली – एक बार सलाह तो ले सकते थे ना !
राहुल बोला – मैं कहना तो नहीं चाहता सोनी मगर इसमें सलाह की क्या बात हैं ! क्या तुम्हारे भाई- भाभी आते हैं तो तुम मेरी सलाह लेती हो ? मैने देखा हैं सोनी , तुम मेरे परिवार को रखना ही नहीं चाहती , ऐसी बाते करते हुए दोनों की कहासुनी बढ़ गई और दोनों ने बात करना बंद कर दिया ! दूसरे दिन राहुल के ऑफिस चले जाने के बाद सोनी ने अपनी मां को फोन किया ममता जी ने फिर हिदायत थी बेटा , जरा संभल कर , एक बार तेरे सास- ससुर का मन अगर यहां लग गया तो वह लोग बार- बार यहां आएंगे ! रिजर्व रहना ताकि जल्दी यहां से चलते बने वर्ना तुम्हारी निजी जिंदगी में उनकी दरवलअंदाजी बढ़ जाएगी ! चार दिन बाद जब सोनी के सास- ससुर दिल्ली आए उसने बेमन से उनका स्वागत किया , मां की हिदायतो का पुरा ध्यान रखा ! सरोज जी ने दिल्ली आते ही रसोई संभाल ली जिस वजह से सोनी ओर भी आजाद हो गई , अब वह घंटो अपनी मां और सहेलियों के साथ फोन पर बतियाती , सहेलियो संग घूमने जाती , पार्टी करती ! जब राहुल उसे अपनी मां के साथ काम में मदद करने कहता तो वह अनसुना कर देती ! अब सोनी अधिकतर सहेलियों के साथ बाहर से खाना खाकर आती , घर पर फ्रिज में बहुत सी सब्जियां जमा कर देती , ज्यादा दिन होने पर उन्हें फेंक देती ! कुछ दिन तो सरोज जी चुप रही फिर एक दिन बोली – बेटा , बाहर का जंक फूड खाना आगे जाकर तुम्हारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता हैं यहां तक कि प्रेंग्नेंसी में भी दिक्कत हो सकती हैं और फ्रिज में बची सब्जियां सेंडविच या भरवां पराठे में भी इस्तेमाल हो सकती हैं , इससे बचत होगी , दुनिया में बहुत से लोगो को दो वक्त का खाना तक नसीब नहीं होता और हम चीजे वेस्ट कर रहे हैं ! सास के शब्द सोनी को नस्तर की तरह चुभते और वह इस बात पर राहुल से लड़ाई करती ! राहुल अपने माता- पिता को हमेशा अपने पास रखना चाहता था इसलिए वह सोनी को समझाने की भरसक कोशिश करता ताकि सोनी भी रिश्तो के अर्थ समझे मगर सोनी का खुरापाती दिमाग तो उसकी मां चला रही थी , उसे भला कैसे कुछ समझ जाता ! एक रोज राहुल और सोनी की लड़ाई सरोज जी ने सुन ली , सोनी जान- बुझकर सरोज जी को सुनाना ही चाहती थी इसलिए वह जोर- जोर से बोल रही थी राहुल तुम्हारे माता- पिता को हमारे घर में दखलंदाजी करने का कोई हक नहीं , उनका घर गांव में हैं फिर वह यहां क्यों इतने महिने से रह रहे हैं ? राहुल गुस्से में बोला – तुमसे रिश्ते में बंधने का मतलब यह नहीं कि मैं मेरे बेटे होने का फर्ज भूल जाऊं , अगर तुम्हें मेरे माता- पिता को नहीं रखना तो तुम यहां से जा सकती हो ! दो दिन बाद ही राहुल के माता- पिता वापस गांव लौट गए बिना यह जताए कि उन्होंने सब कुछ सुन लिया था ! राहुल सोनी से बहुत नाराज था मगर सोनी अपनी जीत पर प्रसन्न थी ! अब सोनी राहुल का ज्यादा ध्यान रखने लगी ताकि राहुल उससे खुश रहे , धीरे- धीरे परिस्थितियां
सामान्य होने लगी पर अनहोनी ने दस्तक दी , राहुल की कंपनी घाटे में चल रही थी करीबन दो महिने बाद ही राहुल की नौकरी चली गई और एकदम से सोनी अर्श से फर्श पर आ गई ! राहुल बहुत परेशान रहने लगा था, उसे दूसरी जॉब मिलने में जाने कितना वक्त लगेगा !
अब तो सोनी के ऐसे दिन आ गए कि घर खर्च , बिजली बिल सब कहां से लाए ? उसे सासू मां की बात याद आ गई कि घर में बचत करके चलना चाहिए मगर सोनी ने तो पैसे उड़ाने के अलावा कभी कुछ किया ही नहीं था अब वह क्या करेगी यही सोचकर उसने अपनी मम्मी को कॉल किया , उसे विश्वास था मम्मी बेटी-दामाद को मुसीबत में देखकर अपने यहां बुला लेंगी , मगर जब उसने अपनी मम्मी को सब बताया उसकी मम्मी बोली – तुम्हारे भाई की अभी नई- नई शादी हुई हैं , ऐसे में तुम्हारा मायके आकर रहना उचित नहीं होगा , एक काम करो तुम अपने ससुराल गांव चली जाओ , वहां पर तुम लोगो का बड़ा सा घर हैं , वह तुम लोगो का ही तो हैं , वहां जाकर रहो ! तुम्हारे ससुर की अच्छी- खासी पैंशन आती हैं , वह लोग आराम से तुम लोगो का खर्चा उठा सकते हैं ! सोनी अपनी मां की बाते सुन सन्न रह गई , यह वही मां थी जो उसे ससुराल वालो से दूरी बनाए रखने कहती थी और आज जब सोनी के दुःख की घड़ी आई तो उन्होंने अपना पल्ला आसानी से झाड़ दिया यह कहकर कि तुम्हारे ससुराल वालो का तुम्हारे प्रति फर्ज हैं ! सोनी के मन में कोलाहल मच गया था उतने में राहुल का फोन बजा , गांव से उसके पापा का फोन था वे बोले फोन स्पीकर पर रखो मुझे तुम दोनों से बात करनी हैं , फिर बोले राहुल तुमने हमें इतना पराया समझ लिया कि अपनी जॉब चली जाने की बात हमसे छुपाई , वो तो आज तुम्हारे साथ काम करने वाले हितेश के पापा से मेरी फोन पर बात हुई तो उन्होंने मुझे बताया ! राहुल रूंधे गले से बोला- पापा मैं आपको परेशान नहीं करना चाहता था !
गिरधारी जी बोले- बच्चे अपनी तकलीफ मां- बाप को नहीं बताएंगे तो किसे बताएंगे ? उतने में पीछे से सरोज जी बोली – सोनी बेटा , तुम लोग बिल्कुल भी चिंता मत करो , तुम्हारे पापाजी की पेंशन से हम चारो का खर्च आसानी से निकल जाएगा ! तुम दोनों यहां बेझिझक चले आओ , हमारे पास कुछ सेविंग्स भी हैं , राहुल को दूसरी जॉब नही लगी तो वह उस सेविंग्स के पैसो से मनचाहा कारोबार भी कर सकता हैं ! इस दुःख की घड़ी का हम सब मिलकर सामना करेंगे ! सास- ससुर के निस्वार्थ प्रेम पर सोनी की आंखें भर आई , भरे गले से वह बोली मांजी मैं आपसे …. और फुट- फुटकर रोने लगी ! सरोज जी बोली कुछ मत कहो मेरी बच्ची … तुम लोग बस यहां चले आओ कहके उन्होंने फोन रख दिया !
सोनी की आंखों में पश्च्चाताप के आंसू थे , उसने राहुल से अपने किए गए सास- ससुर के व्यवहार के प्रति माफी मांगी , राहुल उसे गले से लगाकर बोला – सोनी जो हुआ उसे भूल जाओ और नई शुरुवात करो ! आज सोनी को एहसास हो रहा था कि उसके ससुराल वाले उसके मायके वालो की अपेक्षा वाकई इज्ज़तदार और अच्छे लोग हैं !
दोस्तों , लड़कियों को शादी के बाद यह ध्यान देना जरूरी हैं कि अब ससुराल ही उनका असली घर हैं इसलिए अपनी मां की बातो में भी आने से पहले सोचे !
इस कहानी पर आपकी प्रतिक्रिया जरूर दे !
आपकी सहेली
स्वाती जैंन !