पश्चाताप के आंसु – करुणा मलिक
खिड़की के बाहर होती मूसलाधार बारिश ने ‘शांति निकेतन’ वृद्धाश्रम के उस छोटे से कमरे में सन्नाटे को और गहरा कर दिया था। 70 वर्षीय वंदना देवी अपनी व्हीलचेयर पर बैठी, कांच पर फिसलती पानी की बूंदों को एकटक निहार रही थीं। उनकी गोद में एक पुराना, मखमली फोटो एल्बम रखा था, जिसके पन्ने अब … Read more