नकाब – सुधा शर्मा

   आज मेरा पहला दिन था आफिस में । मुझे मेरी परिचित नीना ने पहले ही बता दिया था ‘माधुरी जी से सँभल कर रहना , बहुत सख्त स्वभाव की हैं ।दो मिनट में इज्जत उतार देतीं हैं ।उनके सामने जाने में सब घबराते है।’        मैने पहली बार देखा उनको तो देखती रह गई, कितनी खूबसूरत,सलीके … Read more

मृत्यु दंड – सुधा शर्मा

काश्मीर की खूबसूरत वादियों में खोई वह बर्फ के पर्वतों को देखती रह जाती, प्रकृति की सुन्दरता को कितनी देर तक निहारती रहती।         अक्सर वह उससे कहता,”कहाँ खोई रहती है तू सपनों की दुनिया में ?” “मुझे अच्छा लगता है इन में डूब जाने को मन करता है।”              ‘ मेरे मन में डूब जाओ , … Read more

रीमा – उर्मिला प्रसाद

अब रीमा एम .ए. की पढ़ाई कर रही है। वह बहुत खुश दिख रही थी। वह कल ही तो मुझसे मिली थी। प्रणाम किया था और मेरा हाल भी पूछा। मुझे भी बड़ी खुशी हुई उसे  इस तरह आगे बढ़ते हुए देख कर!  शायद वह सब कुछ भूल गई होगी जो उसके साथ बच्चपन में … Read more

दीप फिर जल उठे – विजया डालमिया

“मम्मी इसमें से पापा की खुशबू आ रही है” जैसे ही परी ने विवेक की आलमारी खोलते हुए यह बात कही, मेरी रुलाई फूट पड़ी और मैंने उससे लिपटकर जोर जोर से रोना शुरू कर दिया। जिसे देखकर वह घबरा गई। कहने लगी….” मम्मा आपको क्या हुआ? मत रोओ ना।  प्लीज, मम्मा प्लीज”। 6 साल … Read more

सुशिक्षित – युक्ति खत्री

प्रिया एक पढी लिखी सुलझे विचारों वाली एक समझदार महिला है। उसने फैशन डिजाईनिंग में डिग्री ली है। उसका प्यारा सा परिवार है जिसमें माँ, पिताजी उसके पति सुमित जो एक कंपनी में उच्च पद पे है और दो बच्चे चौदह वर्ष की शुभी और दस वर्ष का अनय है। एक नन्द है जो  मुंबई … Read more

प्रतिस्पर्धा – युक्ति खत्री

कई बार हम पर दूसरों की बातो का इतना प्रभाव हो जाता है कि हम अपनी सोंच समझ नैतिक मूल्यों सब को ताक पर रख देते हैं।उन दिनो कुछ समय से मैं कुछ विदेशी और कुछ नये देशी मोटिवेशनल,मैनेजमेंट वक्ताओं को सुन रही थी जो लोगो की सोंच समझ को अलग ही दिशा में मोड़ने … Read more

बोलेगी ना पापा –  बालेश्वर गुप्ता

  मैं कहां हूं, यहां मैं कैसे आ गया, बेटा बताओ तो मुझे क्या हुआ है?        नाक पर ऑक्सिजन का मास्क , शरीर हिलने डुलने जैसा भी नही, कमर पर ,हाथ पर बेल्ट, सबकुछ असामान्य सा, पर धीरे धीरे मस्तिष्क काम करने लगा। कुछ हुआ तो है, पर क्या और कैसे, कुछ याद नहीं. मास्क चढ़े … Read more

सोच” – ऋतु अग्रवाल

 अभी कुछ ही दिन बीते थे नियति की शादी को। पर न मालूम ऐसा क्या हुआ कि एक हँसता, खिलखिलाता चेहरा मायूस और उदास रहने लगा।  सास पूर्णिमा और जेठानी अनन्या चुपचाप नियति की दिनचर्या पर निगाह रखती। पहले तो उन्हें लगा कि मायके की याद आ रही होगी पर अगर ऐसा होता तो वह … Read more

“यह उन दिनों की बात है” – सुधा जैन

लिखने के पहले ही चेहरे पर मुस्कान आ गई ,और पुरानी कई  मधुर स्मृतियां यादों में तैर गई। यह 35 वर्ष पुरानी बात है। जब मैं 20 वर्ष की थी। M.A.. फाइनल में थी ।सरकारी स्कूल में शिक्षिका 18 वर्ष की उम्र में ही बन गई ।मैं और मेरी चचेरी बहन उषा, हम दोनों बहनों … Read more

 “दिल का रिश्ता ” – -गोमती सिंह

‐—‐बात उन दिनों की है जब कोविड-19 का दौर चल रहा था ।  रात के 9 बज चुके थे जब  जूही का आक्सीजन लेबल एकदम गिर गया।  सांस लेने में तकलीफ होने लगी । वह एक बंद  कमरे में सोई हुई थी,  हांफते हुए पुकारने लगी –नील ! , नील! मुझे हाॅस्पीटल ले चलो नील … Read more

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