कलछुल -पुष्पा कुमारी “पुष्प” : Moral Stories in Hindi
“सुधा! तुमने ध्यान दिया?” “क्या?” “अपना बंटी कितना बदल गया है!” पहली बार अपनी पत्नी सुधा संग बलिया से बेंगलुरु बेटा-बहू से मिलने आए चंदेश्वर ने अपने मन की हलचल साझा किया। “आपने सही कहा जी! मैं भी कल से यही महसूस कर रही हूंँ कि कितनी जल्द समझदार हो गया है अपना नटखट बंटी।” … Read more