जिंदगी की सबसे बड़ी सीख — नेकराम : Moral Stories in Hindi

ट्रेन अपनी रफ्तार में दौड़ रही थी मैं जिस डिब्बे में बैठा हुआ था उसी डिब्बे में दो अधेड़ उम्र के आदमी आपस में बातें कर रहे थे लेकिन बार-बार वह दोनों मेरी तरफ ही देख रहे थे शायद अपनी आप बीती एक दूसरे को बताना चाहते थे लेकिन मेरी वजह से वह एक दूसरे से कुछ कह नहीं पा रहे थे ।

मेरे पास एक अटैची थी उसमें कुछ रुपए रखे हुए थे जो अम्मा ने दिए थे

मुझे डर था कहीं यह दोनों चोर तो नहीं कहीं मेरी अटैची चुरा कर भाग न जाए मैंने अपनी दोनों आंखें बंद कर ली और कुर्सी पर ही टांगे फैला कर सोने का नाटक करने लगा उन्हें जब यकीन हुआ कि मैं सो चुका हूं तो उन्होंने आपस में एक दूसरे से कहना शुरू किया ।

छोटे मुझे माफ कर दो मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई मैने तुम्हारे साथ बहुत बड़ा अन्याय किया और मुझे इसकी सजा भी मिल चुकी है

तब छोटे ने कहा भैया आप कैसी बातें कर रहे हैं बड़ा भाई तो पिता समान होता है आपने जो कुछ भी मेरे साथ किया मुझे किसी भी बात का दुख नहीं है हम क्या लेकर आए थे कुछ नहीं खाली हाथ आए थे और खाली हाथ ही जाएंगे।

उनकी बातों से लग रहा था जैसे दोनों भाई है मगर उनकी बातों के बीच में मुझे आंखें खोलना ठीक नहीं लगा मैं आंखें बंद किए उनकी बातें सुनता रहा ।

छोटे तुझे याद है जब पिता ने शहर में एक कारखाना खोला था कमाई भी अच्छी होने लगी थी घर में मैं सबसे बड़ा बेटा था इसलिए मेरी शादी पहले हुई मेरी शादी होने के बाद पिता ने कारखाने की बागडोर मुझे संभालने के लिए दे दी थी कारखाने से जो कुछ भी कमाई होती थी मैं तेरी भाभी पर खर्च कर देता था और कुछ तेरी भाभी के मायके वालों के ऊपर भी ।

शादी होने के बाद मुझे ऐसा लग रहा था काम कर करके जिंदगी बर्बाद करने से अच्छा है जिंदगी में इंजॉय किया जाए कुछ दिनों में कारखाने की कमाई से मैंने एक कार ले ली थी तू उस समय कॉलेज में पढ़ने जाया करता था तुझे तो बस घर में खाना मिलता था और जेब खर्च

,   ,,,, तू तो उसी में ही खुश रहता था ,,

शादी के एक साल के बाद जब तेरी भाभी ने एक पुत्र को जन्म दिया

तो उसकी खुशी में मैंने लाखों रुपए खर्च कर दिए दूर-दूर के रिश्तेदारों को दावत में बुला लिया कारखाने मैं खूब मुनाफा हो रहा था लेकिन मैंने घर पर आकर पिताजी और तुमसे झूठ कहा। दिन पर दिन कारखाने में घाटा हो रहा है और मेरे इस झूठ को तुमने और पिताजी ने सच मान लिया

मैं मां और पिताजी और तुमसे दूर रहकर एक खुशहाल भरी जिंदगी जीना चाहता था और खुशहाल जिंदगी के लिए मुझे ढेरों रूपयों की जरूरत थी

मैं रोज घर पर आकर बताने लगा कि कारखाना दिन पर दिन घाटे में जा रहा है तब पिताजी ने कहा लगता है हमारे कारखाने को किसी की नजर लग गई है जब तक मैं कारखाना चलाता रहा तो कारखाने में दुगनी आमदनी होती रही

मैंने ही तेरी भाभी से कहलवाया था कि तुम जाकर पिताजी से कहो अब दिन पर दिन आपको बूढ़ा ही होना है बच्चों को अभी से जिम्मेदारी कारखाने की दे दो मुझे पता था घर में मैं सबसे बड़ा बेटा हूं इसलिए जिम्मेदारी पहले मुझे ही मिलेगी

और हुआ भी ऐसा ही ,,

कुछ दिनों तक तो मैं कारखाने में टिका रहा लेकिन एक दिन

कारखाने की एक मोटी रकम लेकर मैंने कारखाना बेच दिया

और तुम लोगों को बिना बताए दूसरे शहर में एक नया मकान  खरीद लिया और घर पर आकर बताया कि कारखाना कर्ज में डूब चुका था इसलिए मजबूरी में बेचना पड़ा

पिताजी और तुमने मुझ पर विश्वास भी कर लिया था ।

कुछ सप्ताह बाद ,,

पिताजी से मैंने नया बिजनेस शुरू करने के लिए कुछ रुपए मांगे और कहा कारखाना तो बंद हो चुका है मुझे कुछ नया बिजनेस शुरू करने के लिए रुपए चाहिए छोटे की पढ़ाई पूरी होने के बाद उसे भी तो रोजगार चाहिए

इस काम के लिए मैंने तेरी भाभी को आगे रखा वह बाबूजी की अच्छे से देखभाल करती और तुझे भी खर्चे के लिए रूपये देती रहती थी

मैं अपने ही परिवार वालों से बेईमानी कर रहा था लेकिन तुम लोगों को शक ना हो इसीलिए पिताजी और अम्मा से मीठी-मीठी बातें करना उनकी छोटी-छोटी जरूरतों का ध्यान रखना और बढ़िया-बढ़िया खाने का बंदोबस्त करता रहा जब मैंने अम्मा और बाबूजी का दिल जीत लिया तो मैंने एक दिन कहा

सदर बाजार में मैंने एक दुकान देखी है सस्ते दामों में बिक रही है

मैं चाहता हूं वह दुकान हाथ से नहीं निकलनी चाहिए

तब पिताजी ने कहा बेटा दुकान तो बहुत महंगी होगी इतने रुपए मैं कहां से लाऊं

तब मैंने कहा पिताजी बिजनेस रहेगा तो खूब पैसा कमा लेंगे

और छोटे को भी दुकान का मालिक बना दूंगा

इस मकान को गिरवी रख दो और मुझे दुकान खरीदने के लिए रुपए दे दो

बाबूजी को पूरा विश्वास था मुझ पर और उन्होंने दो महीने के भीतर ही मकान गिरवी रखकर मुझे सदर बाजार में दुकान खरीदने के लिए एक मोटी पेमेंट दे दी थी ।

मैं उस पेमेंट को लेकर अपने नए खरीदे हुए मकान की अलमारी में रखकर आ गया रास्ते में मैंने अपने कपड़े फाड़ लिए रोनी सूरत बना ली

और रोता हुआ घर आया पिताजी से कहा मैं सदर बाजार दुकान खरीदने के लिए जा रहा था रास्ते में चार नकाबपोश आए और उन्होंने मेरे सारे रुपए लूट लिए यह देखो मेरे शरीर में कितने जख्म है

तब पिताजी ने कहा बेटा पैसा तो जाना और आना होता है तू सही सलामत है और हमें क्या चाहिए छोटे की पढ़ाई पूरी हो चुकी है

उसने किराए पर एक ई रिक्शा ले लिया है अभी फिलहाल वह रिक्शा ही चला रहा है

मुझे पता था पिताजी इस मकान का कर्ज चुका नहीं पाएंगे और छोटे के पास अर्थात तुम्हारे पास भी कोई खास नौकरी नहीं है इसलिए इस मकान का डूबना तो निश्चित ही है

मुझे इस घर से जल्द से जल्द निकलना था

मेरी शादी होने के बाद मुझे बस अपनी बीवी और अपने बच्चे ही दिखाई दे रहे थे मैं अपने बच्चों को महंगे से महंगे स्कूल में पढ़ाना चाहता था और तुम्हारी भाभी को महंगे कपड़े और गहनों से लाद देना चाहता था

मेरी लालच की भूख खत्म नहीं हो रही थी

मैंने एक प्रॉपर्टी डीलर से बात करके पिताजी के मकान को बेचने की स्कीम लगाई

पिताजी से कहा यह मकान तो डूबने वाला है सदर बाजार में दुकान खरीदने के लिए जो कर्ज आपने लिया था वह कर्ज अभी तक नहीं चुका

कहीं ऐसा ना हो कर्ज वाला हमारा मकान हड़प ले इससे पहले इस मकान को बेच दो

पिताजी विवश हो चुके थे उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था अब आगे क्या किया जाए इसलिए सारी जिम्मेदारी मुझे ही सौंप दी

मैने पिताजी वाला मकान बिकवा दिया और सबके सामने कर्ज चुकाकर

यह साबित कर दिया की मुझे घर की बहुत चिंता है ।

अम्मा और पिताजी के लिए एक किराए का कमरा ले लिया और तुम भी उस किराए के कमरे में रहने लगे

किराए के कमरे में कुछ दिन तो मैं तुम्हारी भाभी के साथ रहा

फिर मैंने एक दिन पिताजी से कहा

मुझे एक नई नौकरी मिली है नौकरी थोड़ी दूर है मुझे वही रहना होगा

इसलिए मैं एक किराए का कमरा अलग से ले रहा हूं और इस घर में आता जाता रहूंगा आप लोगों से मिलना जुलना बना रहेगा ।

और मैं तेरी भाभी को लेकर वहां से रातों-रात ही गायब हो गया

और जो मैंने नया घर खरीदा था उसमें जाकर रहने लगा

पिताजी अम्मा और तुम्हें यही मालूम था कि मैं किराए के मकान में अपनी जिंदगी काट रहा हूं

इसलिए मैं कभी-कभी फोन में बातें करते हुए कह भी देता था इस समय बहुत परेशानी हो रही है और मेरे पास एक रूपया भी नहीं है तुम्हें देने के लिए

जो रुपए मैने अलमारी में छिपा कर रखे थे बच्चों को प्राइवेट स्कूल में दाखिला दिलवा दिया बड़े-बड़े घरानों से दोस्ती करके उनकी पार्टियों में जाना शुरू कर दिया वक्त धीरे-धीरे गुजरता चला गया

मेरे बच्चे बड़े होते चले गए

कभी-कभी अम्मा का फोन भी आ जाता था कि तेरे छोटे भाई की शादी भी करनी है कुछ रूपयों का जुगाड़ कर दे मगर मेरा एक ही जवाब रहता था ,,अभी जेब खाली है ,,

और मैं अपने बच्चों को महंगे महंगे स्विमिंग पूल में ले जाता

हर सप्ताह महंगे रेस्टोरेंट में खाना खाने जाता

और एक दिन तुम्हारा फोन आया की अम्मा बहुत बीमार है

तुरंत घर चले आओ भैया …

लेकिन मैं ना आया मैं ऊंचाइयां छूना चाहता था बच्चों को दादा-दादी और चाचा से दूर रखना चाहता था

फिर एक दिन अम्मा की बीमारी के चलते देहांत हो गया

मुझे पता था अब अम्मा के ऊपर रुपए लगाने होंगे छोटे के पास तो शायद ना होंगे लेकिन मुझे क्या , मैं क्यों इस झमेले में पढूं

इसलिए मैंने कॉल करके तुम लोगों से झूठ कहा कि मैं इस समय इंडिया में नहीं हूं मुझे इंडिया आने में एक सप्ताह लग जाएगा

1 सप्ताह बाद जब मैने कॉल किया तो तुमने मुझे बताया कि अम्मा का दाह संस्कार हो चुका है पिताजी भी बीमार है

लेकिन पिताजी ने मेरे लिए एक गरीब परिवार से लड़की देखी है लड़की संस्कारी है और पढ़ी-लिखी भी है पिताजी की तमन्ना है बड़े बेटे की शादी तो हो चुकी है मेरे जीते जी छोटे बेटे की भी शादी हो जाए

इसलिए चार लोगों को बुलाकर मंदिर में फेरे डलवा दूंगा ।

मगर मैं तुम्हारी शादी में भी ना पहुंचा कुछ और महीने बीते और मुझे पता चला कि पिताजी भी अब इस दुनिया में नहीं रहे

मगर मैं पिताजी के देहांत पर भी न पहुंचा

और उसके बाद मैंने अपने मोबाइल का नंबर बदल लिया और फिर तुमसे कभी बात ना हो सकी अब तक मेरे तीन पुत्र हो चुके थे

दिन महीने साल बीतते चले गए ,,

तीनों पुत्र तेजी से जवान होने लगे उनकी पढ़ाई पूरी होने के बाद अब मैं उनकी शादी कर देना चाहता था

एक-एक करके तीनों के लिए लड़कियां देखी और खूब धूमधाम से शादी की ,, शादी के बाद ही घर में तीन नई बहुए आ चुकी थी

शादी के पहले दिन से ही तीनों बेटों ने अपना-अपना हिस्सा मांगना शुरू कर दिया

मैंने उन्हें बहुत समझाया बच्चों बटवारा होते ही तुम तीनों बर्बाद हो जाओगे

मगर उन्होंने मेरी एक न सुनी रोज घर में क्लेश रहने लगा

रसोई घर में तेरी भाभी ही खाना बनाती तो मुझे खाना मिलता

तीनों बेटे आपस में झगड़ा करते और कभी-कभी एक दूसरे पर हाथ भी उठा देते

गलती मेरी ही थी मैंने बच्चों को ना कोई संस्कार दिए ,, ना दादा-दादी का उन्हें प्यार मिला ना कोई सामाजिक शिक्षा

समाज की अंधी दौड़ में वह मुझसे भी चार कदम आगे निकले

शराब सिगरेट और पराई स्त्री में रुपया लूटाने में सबसे आगे थे

मैंने सोचा था महंगे स्कूल में पढ़ा लिखा कर उन्हें एक काबिल अफसर बनाऊंगा

लेकिन मुझे मालूम नहीं था मेरा ही खून एक दिन मुझे ही आंखें दिखाएगा बड़े बेटे ने जब मुझे एक जोरदार थप्पड़ मारा तब मेरी आंखों से आंसू निकल आए ,, मैं सोचने लगा

जिन बच्चों के लिए मैं रुपया इकट्ठा करता रहा अपने छोटे भाई से बेईमानी करता रहा और अपने जन्मदाता माता-पिता के साथ छल करता रहा आज उसी का दंड भुगत रहा हूं ,,

मैंने ऊपर ईश्वर की तरफ देखा और ईश्वर से कहा कि मुझे मेरे किए हुए की सजा आज मेरे ही बच्चे मुझे दे रहे हैं

अगर मैने जीवन में पुण्य के काम किए होते गरीबों की मदद की होती

माता-पिता और अपने छोटे भाई को प्रेम किया होता तो आज यह थप्पड़ मेरे गाल पर नहीं पड़ता

तीन बेटों के सामने तेरी भाभी की एक न चली और मकान बेचना पड़ा

तीनों बेटे अपनी अपनी पत्नियों को लेकर और अपना हिस्सा लेकर अपने-अपने रास्ते निकल गए

मैं तेरी भाभी को लेकर एक छोटे से किराए के मकान में रहने लगा

फिर मुझे याद आया किसी ने एक वृद्धाश्रम का पता दिया था इसलिए मैं तेरी भाभी को लेकर वहीं जा रहा हूं

तब छोटे ने कहा मगर यहां भाभी जी तो दिखाई नहीं दे रही है

तब बड़े भाई ने कहा तेरी भाभी अगले डिब्बे में है मैं पानी भरने के लिए ट्रेन से नीचे उतरा तो ट्रेन चल पड़ी इसलिए मुझे इस डिब्बे में चढ़ना पड़ा

और तुमसे मुलाकात हो गई

तब छोटे ने कहा जब तक तुम्हारा छोटा भाई जिंदा है तुम्हें वृद्धाश्रम रहने की जरूरत नहीं है

बहुत साल पहले जब मैंने ई रिक्शा किराए पर लिया था 2 साल कड़ी मेहनत करने के बाद एक नया रिक्शा खुद का खरीद लिया था

पिताजी ने जिस लड़की से शादी की थी उससे मेरे एक बेटा और एक बेटी हुई

और बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाना शुरू कर दिया था

बेटे ने पढ़ाई पूरी करने के बाद अध्यापक की नौकरी ज्वाइन कर ली

और आज मेरी बेटी आईएएस ऑफिसर है एक महीने पहले ही उसने एक नया घर खरीदा है इसलिए मैं अपनी पत्नी को लेकर अपनी बेटी के नए मकान में जा रहा हूं

इत्तेफाक से मैं भी पानी के लिए नीचे ट्रेन से उतरा था

मेरी पत्नी भी अगले डिब्बे में है

बातें करते-करते कितने स्टेशन पार हो गए अब अगले स्टेशन पर हमें उतरना है आप भी मेरे साथ उतर जाना भैया

थोड़ी देर में अगला स्टेशन भी आ चुका था और ट्रेन रुक गई मैं वहीं खिड़की से झांक कर देखने लगा वह दोनों भाई ट्रेन से नीचे उतर गए

अगले डिब्बे से दो महिलाएं उतरती हुई नजर आई

एक महिला ने कहा सुनो जी मैं जिस डिब्बे में बैठी थी उस डिब्बे में

मेरी एक महिला से मुलाकात हुई है जो वृद्धाश्रम जा रही है अपने पति के साथ लेकिन मैं चाहती हूं इन्हें अपने घर ले चलू इनके तीन बेटो ने इनके साथ बहुत गलत किया है ।

तब छोटे ने कहा तुम जिसके साथ ट्रेन में सफर कर रही थी वह तुम्हारी जेठानी है जल्दी से पैर छूकर आशीर्वाद ले लो

उस महिला को जब पता चला कि मैं देवरानी हूं और जो सामने महिला खड़ी है वह मेरी जेठानी है जो वृद्धाश्रम जा रही थी

देवरानी ने अपनी जेठानी के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और कहा

जब तक हम जिंदा हैं आप लोगों को वृद्धाश्रम रहने की जरूरत नहीं है

अब तक ट्रेन आगे चल पड़ी थी और मैं यही सोच रहा था

परिवार के सदस्यों के साथ छल कपट और धोखाधड़ी करने का मतलब है खुद को धोखा देना वक्त एक दिन हमें उन्हीं की चौखट पर ले आता है जहां से हम चले थे

दोस्तों यह कहानी हमें सिखाती है बड़े भाई को अपने छोटे भाई का हिस्सा नहीं हड़पना चाहिए

क्या पता बुढ़ापे में .. छोटा भाई ही ..बड़े भाई के काम आए

लेखक नेकराम सिक्योरिटी गार्ड

मुखर्जी नगर दिल्ली से

स्वरचित रचना

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