राजवीर आज बहुत ही दुखी और अपमानित होकर काॅलोनि में बने छोटे से पार्क में आकर बैठ गया था ,बीता हुआ समय चलचित्र की भाँति आँखों से गुजरने लगा ; पत्नी लता के साथ माता-पिता की मर्जी से विवाह किया था, जो साधारण पर सुसंस्कृत परिवार से थी।
लता घर में आते ही सबमें घुलमिल गई थी, बड़े छोटों सभी का मन जीत लिया था। लेकिन वह राजवीर का दिल पूरी तरह से नही जीत पाई थी, कारण उसका सादा रूपरंग था। राजवीर जब भी अपने मित्रों की बीवियों को देखता,उसे लता का सादा रूपरंग चुभने लगता ! राजवीर स्वयं अच्छे व्यक्तित्व का मालिक था, उसे भी किसी रूपगर्विता की ही तलाश थी, लेकिन माता-पिता की पारखी नजरों ने लता के संस्कारी स्वभाव और सादगी को परख लिया था की उनके बड़े परिवार को और भरे पूरे सम्पन्न घर को लता बखूबी सम्हाल लेगी।
और लता ने अपनी सरलता व सहजता से सबके दिलों में जगह बना ली थी। राजवीर की कसक मन में ही छुपी हुई थी। वह कुछ ही महीनों के बाद लता से रूखा व्यवहार करने लगा, बात बात पर उसे झिड़क देता,सबके सामने उसको जताने से नही चुकता की उस जैसी साधारण लड़की से विवाह कर उसने बड़ा एहसान किया है, उपर से अच्छी नौकरी। लता घुट कर रह जाती। सालभर में ही उसने एक बच्चे को जन्म दे दिया था;
राजवीर कोई ध्यान नही देता था लता पर, सास ससुर दोनों छोटी नंदे उससे बहुत स्नेह और अपनेपन से रहती, लेकिन लता अंतर्मन का दर्द कैसे कहती की जिस हमसफर के दो मीठे बोल को तरस जाती है वो उससे सीधे मुँह बात करने के लायक भी नही समझता।
समय के साथ ही लता दो बच्चों की माँ बन गई लेकिन वह राजवीर का दिल नही जीत सकी। न ही उसका प्यार भरा स्वभाव और न ही समर्पण राजवीर को लुभा पाया।दिन रात अंदर ही घुटते रहने के कारण वह दिल की मरीज बन गई थी। बच्चों के साथ वह सब सहने की कोशिश कर रही थी लेकिन वह तन मन से बहुत कमजोर हो गई थी, और एक दिन राजवीर ने उसका दिल पूरी तरह से तोड़ दिया था। ऑफिस मे एक कुलीग रूमा के साथ अपने रिश्ते की बात बता कर लता के स्वाभिमान को चोट पहुंचाई।
इस कहानी को भी पढ़ें:
खोज खबर लेना – डाॅक्टर संजु झा : Moral Stories in Hindi
लता को ससुर और नंदो ने बहुत समझाया, की वो सब लता के साथ हैं, लेकिन इस अपमान के बाद उसे उस घर में रहना गवारा ना था। उसने बड़े दुखी मन से राजवीर की खुशी के खातिर तलाक़ के पेपर पर साइन कर दिये।ससुर ने बहू के लिए अलग घर की व्यवस्था कर देखभाल की जिम्मेदारी ले ली। बच्चे उन्ही के साथ रह रहे थे, वो दादा दादी से बहुत प्यार करते थे , और दादा दादी के तो मानो प्राण ही थे।
राजवीर मार्डन रूमा को कोर्ट मेरेज कर घर ले आया। इतनी दौलत देखकर रूमा की खुशी का ठिकाना नही था।
राजवीर और रूमा पूरी तरह से खुशियों मजा उठा रहे थे,, बेहिसाब खर्च करना रूमा की आदत बन गई थी, परिवार के प्रति कोई भी फ़र्ज उसको जरूरी नही लगता, राजवीर उसके नखरे उठाने में कोई कसर नही रखता। धीरे धीरे रूमा ने राजवीर को अपना हिस्सा लेकर अलग रहने पर राज़ी कर ही लिया। पिता ने बहुत समझाया की ये लड़की उसको कभी भी सुखी नही रखेगी ;लेकिन राजवीर पर रूमा का जादू छाया हुआ था। अलग घर में रहकर रूमा तो बिल्कुल ही स्वतंत्र हो गई थी ।राजवीर से जब तब पैसों की मांग
कर महंगे शौक पूरे करने में पैसा उड़ाने लगी। कुछ महीनों के बाद ही राजवीर की बातों का मजाक बनाती । समय असमय उसे एहसास कराती की उसने एक दो बच्चों के बाप से शादी कर एहसान किया है। राजवीर समझ नही पा रहा था की रूमा को हुआ क्या है, क्योंकि वह तो अभी तक ऐसा व्यवहार लता के साथ करता रहा था।धीरे धीरे रूमा जब तब राजवीर को जलील करती और ज्यादा से ज्यादा पैसा उससे हड़प लेती। राजवीर अब बुरी तरह से परेशान रहने लगा , रूपरंग का नशा उतरने लगा और रूमा की असलियत सामने आने लगी।
और आज तो हद ही हो गई ; राजवीर ने अपने जन्मदिन पर रूमा के साथ बाहर ही खाने का तय किया था, की किसी तरह रूमा को कुछ महँगा तोहफा देकर समझाने की कोशिश करूँगा की हमें अब अपनी गृहस्थी पर ध्यान देना चाहिए,उसने ऑफिस से रूमा को फोन किया की शाम को तैयार रहना हम बाहर खाना खाएंगे,और फिल्म भी चलेंगे,राजवीर की बात खत्म होते ही रूमा ने बड़ी रुखाई से जवाब दिया ,नही राजवीर मैं तो अपने फ्रेंड्स के साथ बाहर ही हूँ,खाना भी हम बाहर ही खाएंगे। मेरा इंतजार मत करना मैं रात को लेट हो जाऊँगी!
राजवीर का सिर घूमने लगा, रूमा की बेरुखी और उपेक्षा से अपमानित वह अंदर तक हिल गया था,,उसकी नजरों के सामने लता का निर्दोष चेहरा आ गया था, जो उसकी खुशी और प्यार के लिए उसका दुर्व्यवहार भी सह जाती थी,,,,
उसने अपनी निरीह मासूम पत्नी को “खून के आँसू” रुला कर अपनी जिंदगी से दूर कर रूमा जैसी नकचढ़ी और फेशनेबल लड़की को जीवन में जगह दी थी,और अपने जीवन में खुद ही आग लगा ली थी,,जिसकी अब किसी भी माफ़ी की कोई गुंजाईश नही थी ।
#माफ़ी
किरण केशरे