क्या किस्मत है? – गीता वाधवानी   : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : आशी की शादी को 10 वर्ष बीत चुके थे। अभी तक उसकी गोद खाली थी। पूजा पाठ, हर तरह से इलाज हो चुका था लेकिन किस्मत थी कि उस पर खुश ही नहीं हो रही थी। न जाने क्यों किस्मत उसके साथ ऐसा खेल खेल रही थी। अब तो उसकी सास और रिश्तेदार भी ताने मारने लगे थे। 

 आशी बेचारी क्या करती, अकेले कमरे में जाकर खूब रोती थी और ईश्वर से अपने आंगन में संतान की किलकारी मांगा करती थी। फिर एक दिन उसके पति विनोद और उसने सोचा कि टेस्ट ट्यूब बेबी द्वारा संतान पाने की कोशिश करते हैं, लेकिन वहां भी किस्मत ने उनके साथ नहीं दिया। दो बार असफलता हाथ लगी। 

आशी बहुत कमजोर हो चुकी थी। अब उन्होंने किसी अनाथ बच्चे को गोद लेने का निर्णय लिया। उन्होंने अनाथ आश्रम में और कई अस्पतालों में जाकर अपना नाम लिखवा दिया। 

थोड़े दिनों बाद एक अस्पताल से फोन आया। आशी और उसका पति विनोद भागे – भागे अस्पताल पहुंचे। वहां अस्पताल में डॉक्टर साहब ने उन्हें एक दंपति से मिलवाया जो कि बहुत ही गरीब थे। उन्होंने बताया कि हमारे पहले से ही तीन बच्चे हैं और अब यह बेटा हुआ है। हमारा गुजारा बहुत मुश्किल से होता है। अब इस चौथी संतान को पालना हमारे बस में नहीं। आप इसे गोद लेना चाहते हैं तो ले सकते हैं। 

आशी और विनोद उसे गोद लेने के लिए तैयार थे। अस्पताल में उन्होंने डिलीवरी पर आने वाला खर्च जमा करवा दिया और बच्चों के मां-बाप को भी कुछ रुपए देने की कोशिश की। लेकिन उन्होंने गरीब होते हुए भी रुपए लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा-“हम चाहते हैं कि हमारा बच्चा अच्छी जगह पल जाए, क्योंकि हम उसे कुछ नहीं दे पाएंगे। हम अपने बच्चे को बेच नहीं रहे, इसीलिए हम पैसे नहीं ले सकते।” 

आशी और विनोद ने उन्हें बाकी तीन बच्चों का वास्ता देकर बड़ी मुश्किल से कुछ रुपए पकड़ाए। वे लोग उसे बच्चे को  लेकर घर आ गए। आशी और विनोद बहुत खुश थे। उनके घर में रौनक आ गई थी। आ आशी की मां ने नानी बनने की खुशी में आशी का घर उपहारों से भर दिया था। आशी कहती रही-“मन इतना खर्चा क्यों करती हो?” 

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मां ने कहा-“इतने वर्षों बाद खुशी मिली है मुझे अपने मन की इच्छा पूरी करने दे।” 

समय तेजी से गुजरता रहा। बच्चों का पहला जन्मदिन आने वाला था। आशी ने माता की चौकी करवाने का निर्णय लिया। हंसी-खुशी बच्चे के जन्मदिन पर माता की चौकी संपन्न हुई। इन सब तैयारियों में आशी कमजोरी के कारण बहुत थक गई थी, इसीलिए वह कुछ दिन बच्चे को लेकर अपने मायके चली गई। सप्ताह  भर  बाद वह अपने पति के साथ वापस आई। उसने विनोद से कहा-“आप , बाजार जाकर बच्चे के लिए दूध खरीद कर  लाइए, तब तक मैं कपड़े बदलकर इसे थोड़ी देर सुलाती हूं। अभी तो इसका पेट भरा हुआ है सो जाएगा लेकिन हो सकता है आधी रात में दूध की जरूरत पड़े।” 

विनोद दूध लेने चला गया और आशी, विनोद के जाते ही चक्कर खाकर गिर पड़ी। विनोद जल्दी ही वापस आ गया और उसने आकर देखा कि आशी फर्श पर गिरी पड़ी है और बच्चा पास में बैठा रो रहा है। उसने आशी को बहुत आवाज़ लगाई, लेकिन आशी ने कोई उत्तर नहीं दिया। 

विनोद ने तुरंत टैक्सी मंगाई और आशी को अस्पताल ले गया और बच्चे को उसकी नानी के पास छोड़ आया। डॉक्टर ने पूछा-“क्या इन्हें कुछ हुआ था?” 

विनोद ने बताया-“आशी को सिर में बहुत तेज दर्द था।” 

डॉक्टर ने कहा -“यह कोमा में चली गई है। अब कहां नहीं जा सकता कि इन्हें होश कब तक आएगा?” 

कोमा में एक महीने तक रहने के बाद आशी ने इस अवस्था में दम तोड़ दिया। आशी की किस्मत देखिए, पहले बच्चे के लिए तरसती रही और जब बच्चा आया तो खुद चली गई और साथ ही बच्चे की किस्मत देखिए। पहले वाली मां उसे पाल न सकी और दूसरी मां को उसने खो दिया। 

बड़ी मुश्किल से विनोद ने 1 वर्ष व्यतीत किया। उसे बहुत ही मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था । उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि दुकान का काम संभालू या फिर बच्चे को संभालूं और फिर कभी अपनी तबीयत खराब तो कभी बच्चे की।इसलिए उसने दूसरा विवाह कर लिया और फिर उस मां ने, उसे बच्चे को पाल-पोस  कर बड़ा किया। आज वह बच्चा पढ़ लिख कर बढ़िया सी जॉब कर रहा है और अपने माता-पिता के साथ खुश है। 

स्वरचित अप्रकाशित गीता वाधवानी दिल्ली

#किस्मत

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