बोनस – दीपा माथुर

पिताजी के गुजरने के बाद घर की स्थिति खराब ही चल रही थी।

तभी तो शिवि ने पढ़ाई छोड़ प्राइवेट नौकरी शुरू कर दी।

मकान की किश्त ,छोटे भाई की स्कूल ,और दाल रोटी को व्यवस्था इतना आसान नहीं था।

साइंस से 91 प्रतिशत लाने वाली पापा की परी शिवि का

सपना डॉक्टर बनने का था।

और आज एक प्राइवेट हॉस्पिटल में रिसेपनिष्ट

का काम कर रही थी।

शायद नियति को यही मंजूर था।

दिनभर होठों पर मुस्कुराहट वो भी दिखावटी और मन के प्रत्येक कोने में टूटते सपनो के घाव लिए शिवि रात 9 बजे घर आती थी।

आते ही मम्मी खाना खिलाती हुई  सर को अपने स्नेह और दुआओं भरे हाथो से सहला देती।

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मम्मी की आखों में भी बेचारगी का दर्द साफ नजर आता था।

एक रात शिवि घर पहुंची तो छोटा भाई आकाश बोला

” दीदी में भी कल से स्कूल नही जाऊंगा मैं भी आपकी तरह काम पर ही जाऊंगा “

शिवि बोली ” क्यों अभी तेरी बहन जिंदा है”

आकाश बोला ” दीदी आपको पता है? आज बायो वाली मेम हिंदी वाली तनिष्का मेम को बोल रही थी देखो आकाश की बहन को डॉक्टर बनना चाहती थी पर अब 

घर की जिम्मेदारियों ने पढ़ाई छुड़ा कर जिंदगी के संघर्षों में उलझा दिया।

अब ये भी…”

मतलब अब ….”

शिवि बोली ” क्या मतलब ?

तभी मम्मी बोल पड़ी तू भी कहा इस शैतान की बातो में आ गई।




रात को मम्मी ने शिवि से कहा ” क्यों ना आकाश को सरकारी स्कूल में भेज दे फीस भी कम लगेंगी “

और मैं भी कुछ काम शुरू कर देती हु ताकि तुम भी आगे पढ़ लो।”

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अचानक आकाश भी नींद से उठ बैठा और बोला ” हा,मै भी छोटा मोटा काम कर लूंगा।

चल हट बेवकूफ कहते हुए 

शिवि ने आकाश को बाहों में भर लिया और नम आखों से बोली ” जिस दिन मेरा आकाश बड़ा अफसर बन जायेगा ना?

उसी दिन से तुम्हारी ये दीदी भी अफसर बन जायेगी ।

उस दिन से मम्मी और शिवि दोनो को ही रातों नींद नहीं आती थी।

मम्मी तो शिवि के बारे में सोच सोच कर परेशान रहने लगी।

मोहल्ले वाले भी सहानभूति पूर्वक शिवि की तारीफ करते नही थकते थे।

वाह निर्मला बहन धन्य हो आप देवी जैसी बिटिया मिली है।

देखो कितनी जल्दी घर संभाल लिया।

उधर शिवि घर के खर्च , आकाश की स्कूल फीस की चिंता में परेशान रहने लगी थी।

एक दिन शिवि बहुत खुश होकर घर आई और बोली ” 

मम्मी अब आपकी सारी चिंताएं खत्म हो जाएंगी  ये रुपए लो आकाश की फीस और मकान की किश्त

और घर खर्च भी चल ही जाएगा।

निर्मला जी के मस्तक पर चिंता की लकीरें और गहरी हो

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चली थी हाथ में रुपए की गड्डी लेते हुए बोली “कल ही तो तनख्वाह लाई थी फिर आज ये….

तुम्हे मेरी सौगंध कोई गलत काम तो नही कर रही हो?

शिवि बोली ” नही मम्मी मैं आपका सर कभी नहीं झुकने दूंगी ये तो मेरे अच्छे काम का बोनस है ।”

एक दिन जैसे ही शिवि आई डॉक्टर साहब का फोन आ गया शिवि कपड़े बदलने बाथरूम में गई हुई थी मम्मी ने फोन उठा लिया ” उधर से आवाज आ रही थी शिवि बेटा तुम अपनी दवाई तो यही  रह गई और बेटा अब एक महीने तक ब्लड डोनेट करने की मत सोचना शरीर कमजोर हो जायेगा।

डॉक्टर साहब बोलते रह गए और निर्मला जी के हाथ से फोन छूट गया।

फफक फफक कर रो पड़ी ” पापा की परी इतनी बड़ी हो गई है “

दूसरे दिन सुबह सुबह जैसे ही शिवि उठी उसके पलंग के पास उसकी पुरानी किताबे पड़ी थी।

शिवि चौक कर बोली ” ये क्या है मम्मी?”

निर्मला जी बोली ” अब इन किताबो की धूल हटा दी है

तुम अपने सपने पूरे करोंगी”




मैने डॉक्टर साहब से बात कर ली है उन्होंने मुझे चपरासी की नोकरी दे दी है।

और मामा ने तुम्हारे लिए ऑन लाइन काम भेजने का प्रोमिस किया है।

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पर मम्मी……?

तभी हॉस्पिटल से फोन आ गया शिवि ने तुरंत फोन रिसीव किया ” जी मैं मै अभी आई “

उधर से आवाज आई ” नही बेटा आप अब डॉक्टर बनने की तैयारी करो यहां एक बहुत होनहार डॉक्टर की पोस्ट खाली है और जब तक आप डॉक्टर नही बन जाओगी वो पोस्ट खाली ही रहेगी।

पर क्या?

कल जिसको आपने ब्लड दिया था वो मेरी अपनी बेटी थी उसे आपने जीवन दान दिया है तो मैं भी अपनी दूसरी बेटी का पढ़ाई का खर्चा उठा सकता हु।

पर हा,मम्मी को काम पर भेज देना wish you all the best “

फोन कट गया।

शिवि भगवान के आगे हाथ जोड़ कर बोली ” भगवान 

आपकी इच्छा सर आखों पर।

निर्मला जी ने अपनी शिवि को गले लगा लिया।

#नियति

दीपा माथुर

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