सेल्यूट – लतिका श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

सुबह से ही मां का रो रोकर बुरा हाल था।सुमेश को शाम तक बॉर्डर पर पहुंचने का हुक्म आ गया था।सुमेश एक महीने की छुट्टी लेकर घर आया था उसकी शादी जो थी। एक हफ्ते ही तो हुए है शादी के अभी तो नववधू सुलभा  हिल स्टेशन घूमने जाने की तैयारियां कर रही थी। अभी … Read more

 बांटने का सुख – लतिका श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

लानत है तुम और तुम्हारी रूकी हुई जिंदगी पर ये भी कोई जिंदगी है ।फिर भी तुम इतने प्रसन्न रहते हो।दिन रात एक ही जगह पर खड़े रहना। कहीं आना ना जाना।अपनी फूटी तकदीर पर तुम्हे अफसोस तो होता होगा शिकायत तो होती होगी  मुझे देखो कितनी मेहनत करता हूं कितनी चिंताएं झेलता हूं जिंदगी … Read more

 उसकी क्या गलती है..!! : लतिका श्रीवास्तव  : Moral Stories in Hindi

गली के मोड पर कैब से उसे उतरते देख मै अपलक देखता रह गया था फिर उल्टे पांव वापिस आ गया ..साथ ही वापिस आ गईं वो सारी विस्मृतियां जिन्हें भूलने की गलतफहमी पाले मैं जिंदगी गुजार रहा था। पैंट के पॉकेट में किसी अनछुई अंगूठी को टटोल उठीं थीं मेरी उंगलियां और मन की … Read more

तुक्का – लतिका श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

भैया ए भैया रुको ना मुझे भी बाइक पर बिठा लो पिंकी ने सागर को देखते ही कहा जो अपनी नई नई बाइक निकालकर कॉलेज जाने की तैयारी कर रहा था। जा जा बड़ी आई बाइक में बैठने वाली मुंह देखा है अपना।मेरी बाइक का मुंह देख कैसा चमचमा रहा है चल चल हाथ मत … Read more

घर ही तो जा रहे हैं – लतिका श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

मां तुम्हे हो क्या है आज कल…. कल भी तुमने मेरा सारा होमवर्क गलत करवा दिया था आज भी ।देखो ये मैथ्स के उत्तर गलत लगाए है तुमने रहने दो नहीं पढ़ाना है तो मत पढ़ाओ पर गलत तो मत बताओ कितनी डांट पड़ी थी कल मुझे क्लास में तुम्हे क्या पता…बेटा नमन दुखी स्वर … Read more

 आत्मबल – लतिका श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

पढ़ाई में अव्वल रहने वाला अनन्य घर मोहल्ले स्कूल रिश्तेदारी हर जगह सबकी आंखों का तारा था। माता पिता अपने बेटे में अपना सुनहरा भविष्य देख कर निहाल हो जाते थे।स्कूल के शिक्षक ऐसे मेधावी छात्र में भावी उच्च प्रशासनिक अधिकारी की छवि देख  गर्वित हो जाते थे।हर जगह अनन्य का डंका बजता था। किस्मत … Read more

सुखानुभूति – लतिका श्रीवास्तव

भव्य हवेलीनुमा आवास,दर्जनों नौकर चाकरों से लकदक हर कोना, रईसी शानो शौकत से आच्छादित पांच मंजिली इमारत के एक विशाल वातानुकूलित कक्ष में आदमकद आईने के सामने बैठी नम्रता खुद को निहार रही थी,परख रही थी ,आत्ममुग्ध थी। वर्षों की अटूट अनवरत लगन मेहनत और संघर्ष के बल बूते आज वह सफलता और वैभव के … Read more

सुनो तो… – लतिका श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

रीति… रितिका कहां हो तुम… सुनो तो…आवाज सुनते ही रितिका थाली लगाती रुक सी गई। आ गई  बिल्लो काकी घंटे भर की फुर्सत हुई सोचते उसने भी आवाज लगाई क्या हुआ काकी आ जाओ ।आ जाओ आपकी भी थाली लगा दूं क्या अरे थाली वाली छोड़ो। कल सुनीता के शादी समारोह से जल्दी  चली आईं … Read more

आइने के पीछे – लतिका श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

जरा रुक मोनी रुक…. श्री की तेज आवाज से मोनी ने पलट कर देखा तो श्री अपना मोबाइल निकाल रही थी। नो श्री प्लीज अभी नहीं अभी मोबाइल पर्स में ही रहने दे अभी बहुत सारी शॉपिंग करनी है मोनी ने दबाव देकर कहा लेकिन तब तक तो श्री अपना मोबाइल निकाल कर उसमें सेल्फी … Read more

फालतू काम – लतिका श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

आजा मेरा राजा बेटा तू ही ये काम कर सकता है मालिनी ने तीसरी बार बेहद दुलार से अपने निर्विकार बेटे राजन से कहा तो पिता राजेश्वर झल्ला गए। इतनी #लल्लो चप्पो करके क्यों बोल रही हो मालिनी। तुम्हारा बेटा है इसी घर में रहता है बाजार जाके सामान लाना उसका भी कार्य है …दिन … Read more

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