उड़ान – श्वेता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

मुंबई की ऊॅंची चमकदार बिल्डिंग में रहने वाली नीलिमा की जिंदगी बाहर से एकदम परफेक्ट लगती थी। एक बड़े बिजनेस टाइकून की वाइफ, दो प्यारे-प्यारे बच्चे और लग्जरी लाइफ। लेकिन, अंदर ही अंदर वह अपने अधूरे पड़े सपनों की कसक लेकर जी रही थी।

नीलिमा एक बेहतरीन फैशन डिजाइनर थी। शादी से पहले उसने कई फेमस ब्रांड्स के लिए काम भी किया था। लेकिन, अभी वह अपने कैरियर को और ऊॅंचाइयों पर पहुॅंचा पाती, उससे पहले ही उसकी शादी नील से हो गई। ऊपर से आधुनिक दिखते उसके पति नील और उसकी सास की सोच बहुत पुरातनपंथी थी। उनके अनुसार बहू का काम सिर्फ घर संभालना ही होता है। 

एकबार जब उसने अपने सपनों के बारे में अपनी सास से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने उसे टका सा जवाब दे दिया “हमारे घर की औरतें बाहर काम नहीं करती चुपचाप अपनी घर-गृहस्थी संभालो।”

नील को भी उसके सपनों से कोई सरकार नहीं था “तुम्हें सब कुछ तो मिल रहा है। गाड़ी, नौकर-चाकर, और क्या चाहिए?” 

“मुझे और कुछ नहीं चाहिए।लेकिन,नील समझने की कोशिश करो।मैं दिनभर बोर हो जाती हूँ। बच्चे भी तो हॉस्टल चले गए हैं।”

“बोर हो जाती हो तो किटी ज्वाइन कर लो। हाई सोसाइटी की औरतों से मेलजोल बढ़ाओ। लेकिन, नहीं तुम्हें तो फैशन डिजाइनिंग जैसा छोटा-मोटा काम करना है। कान खोल कर सुन लो। यह सब यहाँ नहीं चलेगा।”

नीलिमा हरबार चुपचाप उनकी बात मान जाती। लेकिन, जब-जब अपनी पुरानी डिजाइंस और स्केचबुक देखती उसके अंदर कुछ टूट जाता। इसीतरह दिन बीतते रहे। एक दिन उसने न्यूज़पेपर में फेमस इंटरनेशनल फैशन ब्रांड ‘N.T.T’ कंपनी के फैशन शो का ऐड देखा और खुद को रोक न पाई। घर में बिना किसी को कुछ बताये वह शो देखने पहुंच गई। वहाॅं उसकी मुलाकात उसकी फ्रेंड श्रुति से हुई जो अब ‘N.T.T’  कंपनी की ब्रांच हेड थी। श्रुति ने नीलिमा को देखते ही कहा “नीलिमा,तू यहाॅं ! वाट ए प्लेज़ेंट सरप्राइज। कितने अरसे बाद तुझे किसी डिजाइनर इवेंट में देख रही हूँ। एकबात बता, तूने डिजाइनिंग क्यों छोड़ दी? तू तो हमारी इंस्पिरेशन थी।” 

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यह सुनकर नीलिमा ने उदास होकर कहा “शादी के बाद जिम्मेदारियाॅं बढ़ गई और सब पीछे छूट गया।” 

“देख नीलू, मैं जानती हूँ तेरे अंदर वह टैलेंट आज भी जिंदा है। यह जो आउटफिट तूने पहनी है वह तूने खुद ही डिजाइन की है ना?”

 “हाँ।”  

“इट्स अमेजिंग। वेरी ब्यूटीफुल। इसकी डिजाइन, कलर कांबिनेशन, सब लाजवाब है। अगर तू ‘N.T.T’ कंपनी के लिए काम करना चाहे तो मैं तेरी मदद कर सकती हूँ।” 

“व्हाट! लेकिन, इतनी बड़ी कंपनी मुझे क्यों जॉब देगी?” 

“तेरा टैलेंट देखकर देगी। अपने डिजाइंस लेकर कल 12:00 बजे ‘N.T.T’ के ऑफिस पहुंच जाना।समझी।”

दूसरे दिन घर से मेडिकल चेकअप का बहाना बना वह ‘N.T.T’ के ऑफिस पहुंच गई। उसके डिजाइंस, उसके आईडियाज् और उसके फैशन सेंस को देखकर वे उसे तुरन्त अप्वॉइंट करने के लिए तैयार हो गये। दोबारा करियर में वापसी वह भी ‘N.T.T’ जैसे फेमस ब्रांड के साथ। उसकी ऑंखें खुशी से चमक उठी।लेकिन, उसका असली इम्तिहान तो अभी बाकी था। जैसे ही उसकी सास और नील को यह बात पता चली वे भड़क उठे। 

“हमारे घर की बहुऍं ऐसी छोटी-मोटी नौकरियाॅं नहीं करती। चुपचाप घर पर बैठो।” उसकी सास ने तमतमाते हुए कहा।

 “नहीं माँजी। ये सिर्फ नौकरी नहीं, मेरे सपनों को जीने का मौका है। यह तो मैं नहीं छोडूंगी।” 

“एक जरा सी नौकरी क्या मिल गई। बड़ी-बड़ी बातें आ रही है। यदि तुमने ऐसा किया तो समझो, इस घर से तुम्हारा रिश्ता खत्म।” नील ने ताव से कहा।

यह सुनते ही नीलिमा स्तब्ध रह गई। उसके इतने सालों के समर्पण का यह सिला। उसका दिल रो पड़ा।वह कड़े शब्दों में बोली “नील, यदि तुम्हारी यही मर्जी है तो यही सही। लेकिन, अब मुझे मेरी पहचान बनाने और अपने सपने पूरे करने से कोई नहीं रोक सकता। तुम्हारी धमकियाॅं भी नहीं। तुमने अब मेरे सामने कोई ऑप्शन नहीं छोड़ा है। इसलिए मैं यह घर छोड़कर जा रही हूँ। यह मेरा आखिरी फैसला है।” ऐसा कहकर वह अपना सामान पैक करने लगी।

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उसके कड़े तेवर देख उसकी सास घबरा गई उसने अपने बेटे को समझाया “नील, देख बेटा यदि यह घर से चली गई तो सोसाइटी में बहुत बदनामी होंगी। इसे नौकरी करने दे।अपने ही कुछ दिनों में नौकरी का भूत उतर जाएगा।”

 “ठीक है माँ।”

फिर उन्होंने नीलिमा को रोकते हुए कहा “रुको बहू, तुम नौकरी करना चाहती हो यह हमें मंजूर है। लेकिन, घर कि अनदेखी नहीं होनी चाहिए। घर की जिम्मेदारियो के साथ तुम खाली समय में अपना काम कर सकती हो।” 

नीलिमा अब ज्यादा बवाल नही चाहती थी। इसलिये यह सुनते ही उसने श्रुति से बात की और उसकी हेल्प से उसे ‘वर्क फ्रॉम होम’ की फैसिलिटी मिल गई। बहुत जरूरी होने पर ही वह ऑफिस जाती। वरना घर से ही काम करती।अपने खाली समय में कड़ी मेहनत से उसने कई डिजाइन्स तैयार किये। धीरे-धीरे उसके डिजाइन ‘N.T.T’ कंपनी में धूम मचाने लगे। कुछ ही समय बाद उसका पहला कलेक्शन उड़ान आया जो बेहद सक्सेसफुल रहा। फैशन वर्ल्ड में उसका नाम छाने लगा। पर, उसकी सास और नील के रवैये में कोई खास फर्क नहीं आया। 

  एक दिन नील के नये फॉरेन इन्वेस्टर बिज़नेस डील के लिये इंडिया आये। उन्हें इंडियन खाना बहुत पसंद था। इसीलिए नील ने उन्हें फ़ैमिली डिनर के लिए अपने घर पर इनवाइट किया। उनकी वाइफ नीलिमा को देखते ही पहचान गई “यू आर नीलिमा! द डिज़ाइनर ऑफ ‘N.T.T’ एक्सक्लूसिव कलेक्शन ‘उड़ान’ राइट?”

 “येस आई एम द सेम।” 

यह सुनते ही वह खुशी से उछल पड़ी  “वी आर बिग फैन ऑफ़ योर डिजाइंस। इफ यू आर रेडी,आई हैव एन ऑफर फॉर यू। वी वुड लाइक टू फीचर योर एक्सक्लूसिव कलेक्शन इन ऑल ऑवर फैशन स्टोर्स एक्रॉस लंदन एंड अमेरिका।”

यह सुनते ही नीलिमा खुशी से रो पड़ी “येस,आई वुड बी वेरी हैप्पी टू डू सो।” 

नीलिमा के हाँ बोलते ही उसने नीलिमा को गले लगा लिया और नील की ओर मुखातिब होकर बोली “यू आर वेरी लकी। योर वाइफ इज वेरी टैलेंटेड।”

यह सब देख सुनकर उसकी सास और नील अवाक रह गए। उनके शब्द मानो गले में ही अटक गए। उनसे कुछ बोलते ही नहीं बन रहा था।आज वे दोनों नि:शब्द थे और नीलिमा का टैलेंट और कामयाबी शोर मचा रही थी।

धन्यवाद

साप्ताहिक विषय कहानी प्रतियोगिता #आखिरी फैसला।

शीर्षक-उड़ान

लेखिका- श्वेता अग्रवाल। धनबाद, झारखंड।

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