अंजलि प्राची को अपने भाई के साथ नकली विवाह करने के लिए मनाने गई थी।
जब से प्राची को विनीत के कैंसर के बारे में पता चला वह विनीत को अपने से दूर नही कर रही थी। वह विनीत को मौत के मुंह में जाता हुआ नहीं देख सकती थी। उसके अंदर इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह विनीत के साथ नकली विवाह कर उसे धोखा दे सके।
अंजलि ने प्राची को मनाया कि वह एक बार यदि हां कर देगी तो उसके भाई की बची हुई जिंदगी में खुशियां आ जाएगी। प्राची ने नाटक किया अंजलि की बात को सुनि अनसुनी करने का परंतु सच यह था कि वह भी विनित को अपने से दूर नहीं कर पा रही थी। उसका मन बार-बार उधर ही चला जाता था। प्राची वहां से चली गई और प्राची पुरानी यादों में खो गई उसे याद आया कि वह विनीत को एक मॉल में मिली थी जब वह दोनों आपस में टकराए थे। विनित उसे ने उसे देखा और देखता ही रह गया था।
दोनों में हाय हेलो हुई। फिर बातचीत और मिलने जुलने का सिलसिला चल निकला। कुछ दिनों बाद दोनों साथ जीने मरने की कसमें खाने लगे थे। प्राची विनीत के घर आती जाती थी। विनीत के माता-पिता और बहन अंजलि से उसकी अच्छी दोस्ती थी। इसी बीच विनीत ने अपने मन की बात सबसे कह दी। मैं प्राची के साथ शादी करना चाहता हूं।
दोनों के माता-पिता भी मान गए थे। एक दिन अचानक विनीत के पेट में बहुत जोर से दर्द हुआ। अंजलि ने डॉक्टर को दिखाया। शुरू में तो डॉक्टर ने दवाई दिया। उससे कोई फर्क नहीं पड़ा परंतु बाद में बहुत जांच पड़ताल के बाद डॉक्टर ने कहा आई एम सॉरी आपको अंतिम स्टेज पर आमाशय का कैंसर है।
आपके पास बहुत कम समय है। उसने अपने और प्राची के साथ मिलकर जो प्यार के सपने देखे थे वह टूटे नजर आ रहे थे। एक दिन विनीत ने प्राची से कहा अब हमें और नहीं मिलना चाहिए तुम मुझसे दूर हो जाओ क्योंकि मेरी जिंदगी का अब कोई भरोसा नहीं है। तुम मेरे चक्कर में अपनी जिंदगी बर्बाद मत करो। किसी अच्छे से लड़के के साथ शादी कर कर अपनी जिंदगी का नया सफर शुरू करो।
मगर विनीत की बहन अंजलि अपने भाई को इस तरह तड़प तड़प कर मरता नहीं देखना चाहती थी। वह चाहती थी कि उसका भाई मरने से पहले अपनी जिंदगी जी ले।
मगर अंजलि की मां ने अंजलि को समझाया की प्राची की भी अपनी जिंदगी है उस पर हमें इस तरह से दवाब नहीं बनना चाहिए। उसके लिए भी विनीत से रिश्ता खत्म करना आसान नहीं होगा क्योंकि वह विनीत से बहुत अधिक प्यार करती है।
उसके साथ जीने मरने की कसमें खाई है। उन कसमो को तोड़ना प्राची के लिए आसान नहीं होगा। वह विनीत के लिए सारी जिंदगी दुख उठाए यह कहां की इंसानियत है। हमें भी अच्छा नहीं लगेगा की प्राची की सारी जिंदगी बर्बाद हो जाए।
मां की बात सुनकर अंजलि बोली हम ऐसा कर सकते हैं प्राची के स्थान पर उससे मिलती-जुलती कोई दूसरी लड़की को तैयार कर सकते हैं। इस पर प्राची के माता-पिता को भी कोई एतराज नहीं था बल्कि प्राची की मां ने अंजलि से कहा की प्राची की एक सहेली रश्मि लगभग प्राची जैसी दिखती है।
वह स्टेज शो व नाटक आदि में काम भी करती है। वह शायद पैसों के लिए इस नकली विवाह के लिए तैयार हो जाए। परंतु नकली विवाह नकली की तरीके से ही होना चाहिए पूरी शादी यानी फेरे नहीं होने चाहिए। इसमें उसे ऐतराज हो सकता है। दोनों परिवार के सभी लोग सहमत हो गए। रश्मि से इस विषय में बातचीत की गई तो रश्मि तैयार हो गई।
उसने कहा कि मैं फेरे नहीं लूंगी बाकी सारी रश्में निभा दूंगी। सभी ने कहा ठीक है कुछ व्यवस्था करेंगे। विवाह का दिन भी आ पहुंचा। सभी की नजरे दुल्हन पर टिकी हुई थी। जैसे ही पंडित जी ने कहा अब दूल्हा दुल्हन फेरे लेंगे और फिर दूल्हा दुल्हन की मांग भरेगा। सारे हाल में सन्नाटा छा गया।
तभी प्राची के माता-पिता ने कहा की दुल्हन की तबीयत कुछ खराब है इसलिए इसको आराम की आवश्यकता है। फेरे कुछ देर बाद करेंगे। उन्होंने सोचा की दुल्हन की तबीयत खराब होने के कारण फेरे का काम रद्द हो जाएगा और बात यही पर समाप्त हो जाएगी।
जैसे ही दुल्हन को कमरे में ले जाने लगे घूंघट में छुपी हुई दुल्हन बोल उठी नहीं पंडित जी मेरी तबीयत इतनी भी खराब नहीं है कि यह रस्में न निभाई जा सके। दुल्हन के घूंघट को उठाते हुए कहा तो अंजलि के साथ-साथ प्राची के माता-पिता भी चौंक उठे क्योंकि दुल्हन कोई और नहीं प्राची ही थी। यह तो वह भी नहीं जानते थे कि यह सब कैसे हुआ। रश्मि की जगह प्राची कब दुल्हन बनकर मंडप में बैठ गई। तब प्राची ने कहा नाटक में ही सही परंतु में विनीत से सच्चा प्यार करती हूं। इसलिए मैं किसी और को उसकी दुल्हन बनते हुए नहीं देख सकती।
इसलिए मैंने यह कदम उठाया है। वहां मौजूद अंजलि के परिवार वाले व प्राची के परिवार वालों की आंखों में आंसू बह उठे। परंतु उनके चेहरे पर एक मुस्कान भी थी की सब कुछ सही हो रहा है। विनीत की बची हुई जिंदगी में थोड़ी सी मुस्कान प्राची के कारण आने वाली है। सब कुछ ठीक चल रहा था। इतने में ही विनीत बेहोश हो गया और उसे तुरंत डॉक्टर को दिखाया गया जहां डॉक्टर ने उसे तुरंत हॉस्पिटल्स होने के लिए कहा। हॉस्पिटल में उसे तुरंत आईसीयू में ले जाया गया लेकिन ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था
कुछ मिनट के बाद ही विनीत इस दुनिया को छोड़कर किसी और दुनिया में चला गया। परंतु अपने होठों पर मुस्कान लिए हुए प्राची अपने निर्णय पर विनीत व उसके परिवार जनों की नजर में महान बन गई। विनीत की बहन अंजलि ने कहा प्राची तुमने वह कार्य कर दिखाया है जिसके लिए हमारा परिवार तुम्हारे लिए तुम्हारा सदैव ऋणी रहेगा। तुमने इतना अपनापन दिखाया है कि तुम हमारे परिवार की बहु ना रहते हुए भी हमारे परिवार की एक सदस्य की तरह जीवन भर हमारे जीवन में रहोगी।
लक्ष्मी कानोडिया