सुहानी एक बहुत ही तेजतर्रार, अपना मतलब निकालने में होशियार रहने वाली लड़की थी । ईर्ष्या करना और दूसरों को नीचा दिखाना भी उसके व्यक्तित्व का एक हिस्सा था ।
कॉलेज में सुहानी साथी सहपाठियों ,सहेलियों से चालाकी से नोट्स हासिल कर लेती थी और रट-रटा कर ठीक-ठाक मार्क्स भी ले आती थी । अर्पिता सुहानी की ही क्लास मेट थी । अर्पिता विनम्र स्वभाव की मेहनती लड़की थी । वह चीज़ों को छल-कपट और चालाकी से नहीं सोचती थी । सहजता से सुहानी की पढ़ाई में मदद कर देती और उसे अपने बनाए नोट्स भी दे देती थी । सुहानी सोचती ‘अच्छी मूर्ख मिल गई है ।’ वह मन ही मन अर्पिता की अच्छाई को बेवक़ूफ़ी समझती और उससे अपना मतलब भी निकालती रहती ।
अर्पिता उसकी सोच को समझे बिना सुहानी को अपनी दोस्त मान उससे स्नेह रखती थी । उनका कई दोस्तों का ग्रुप था और वे लोग ग्रेजुएशन से पीजी तक साथ पढ़ रहे थे । इस वर्ष कॉलेज का अंतिम साल था । एग्ज़ाम के बाद सब लोग एक दूसरे से अलग-अलग भी होने वाले थे इसलिए सब मिलते तो खूब बातें करते और अपने भविष्य की योजनाएँ भी बताते थे और अक्सर भावुक भी हो जाते थे । “सुहानी तेरा क्या प्लान है….
आगे का ।”राघव ने पूछा तो सुहानी बोली “मैं तो दिल्ली जाकर यूपीएससी के लिए कोचिंग करूँगी । मेरे पापा मुझे आई ए एस बनाना चाहते हैं ।” सुहानी के पिता बड़े बिज़नेस मैन थे । इसलिए सुहानी लंबी लंबी हाँकती थी । “तू क्या करेगी अर्पिता ?” सुहानी ने पूछा । अर्पिता क्या कहती ! उसके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी । पिता बीमार रहते थे और माँ किसी तरह से नोकरी कर के घर चला रही थी ।
“मैं बी एड करके कहीं जॉब ढूँढ कर माँ की मदद करूँगी । छोटे भाई की पढ़ाई का खर्च उठाने की कोशिश करूँगी ।” अर्पिता ने कहा तो सुहानी ने मुँह बिचका दिया । “हाँ तू तो मास्टरनी बन के ही ठीक लगेगी ।वैसे भी तू बहनजी ही तो लगती है ।” सुहानी ने अर्पिता की हँसी उड़ाई तो सुहानी कुछ न कहकर चुप रह गई ।
सब जानते थे कि सुहानी अर्पिता से नोट्स लेकर ही तैयारी करती है और आई ए एस की तैयारी करेगी ! पर सुहानी नाराज़ हो जाती इसलिए किसी ने कुछ नहीं कहा । फ़ेयरवेल पार्टी भी हो गई और इम्तिहान भी हो गए । सभी लोग दूर-दूर होकर अपने-अपने भविष्य को बनाने में व्यस्त हो गए थे । सुहानी सिविल सर्विसेज की तैयारी के लिए दिल्ली चली गई
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और अर्पिता ने बी एड में दाख़िला ले लिया था । समय बीत गया था। सब अपनी अपनी ज़िन्दगी में सेटल हो गए थे ।राघव का सिलेक्शन पीसीएस में हो गया और अनिकेत का चयन एलआईसी में हो गया । अर्पिता भी बी एड कर सरकारी स्कूल में टीचर बन गई थी । उसे अच्छी तनख़्वाह मिल जाती थी जिससे उसके घर की स्थिति भी सुधर गई थी ।
उसका छोटा भाई भी मेहनत से पढ़ रहा था । वह भी बी टेक करके एक कँपनी में इंजीनियर बन गया था । उधर सुहानी ने कई बार यूपीएससी दिया पर वह एक भी बार प्रीलिम्स भी नहीं निकाल पाई । हार कर पिता ने उसकी शादी कर दी और वह घर गृहस्थी में लग गई । ईर्ष्या सुहानी के स्वभाव में थी पर जीवन में मिली असफ़लता ने उसको सुधार दिया था ।
कॉलेज के दोस्त अभी भी आपस में जुड़े हुए थे । सबने ह्वाट्सऐप ग्रुप बना लिया था जिससे पता चलता रहता था कि कौन क्या कर रहा था ! राघव और सुरेंद्र ने सबसे मिलकर एक री-यूनियन पार्टी ऑर्गेनाइज़ की जिसमें सुहानी और अर्पिता भी पहुँची ।कार्तिक,कल्पना,राघव,अनिकेत,सुहानी,अर्पिता आज बरसों बाद इकट्ठे हुए थे । अर्पिता की भी शादी उसके भाई-भाभी ने ज़िद करके करवा दी थी ।ज़्यादा उम्र में शादी होने के बावज़ूद अर्पिता ख़ुश और संतुष्ट थी । सर्विस में भी वह प्रमोशन पा कर और अच्छा ग्रेड पा रही थी ।
बरसों बाद जब सुहानी और अर्पिता मिले तो अर्पिता के प्रति सुहानी के मन में द्वेष भाव और ईर्ष्या नहीं बल्कि आदर और स्नेह था । सुहानी ने अपनी कुंठा पर विजय पा कर अर्पिता की मेहनत और लगन को स्वीकार कर लिया था ।उनके रिश्ते में अब सच्ची दोस्ती की मिठास पैदा हो गई थी । उम्र और अनुभव मनुष्य को सिखाते भी हैं और सुधरते भी हैं ।दोनों सहेलियाँ दिल से गले मिलीं और घंटों बातें कीं । फ़िर से मिलने का वादा कर सब दोस्त विदा हुए । उम्र के एक दूसरे पढ़ाव पर आकर वे सब एक बार फ़िर से अपनी दोस्ती के रिश्ते में जुड़ गए थे ।
गीता यादवेन्दु