” सुनिए मुझे आपसे कुछ कहना है ?” प्रतिभा अंधविद्यालय से बच्चो को पढ़ा कर निकली तो गेट पर एक लड़का उसे रोकता हुआ बोला। ” जी कहिये ?” प्रतिभा आश्चर्य से उस लड़के को देख बोली क्योकि प्रतिभा उस लड़के को नही जानती थी ना कभी मिली थी फिर यूँ अचानक उसका इस तरह रोकना अजीब था। ” मेरा नाम सार्थक है वो सामने रेस्टोरेंट देख रही है वो मेरा है क्या आप मेरे साथ एक कप कॉफी पिएंगी !” वो लड़का अपना परिचय दे झिझकते हुए बोला। ” दिमाग़ खराब है आपका यूँही राह चलते ना जान ना पहचान आप किसी को कॉफी की कैसे कह सकते है वो भी मुझ जैसी लड़की को !” प्रतिभा गुस्से मे बोली उसके गुस्से मे दर्द भी था जो सार्थक ने साफ महसूस किया। ” माफ़ कीजियेगा मैं आपको यूँ परेशान करने नही आया था आप नही चलना चाहती कोई बात नही पर आप मुझे बहुत अच्छी लगती है मैं रोज आपको अपनी कुर्सी पर बैठा देखता हूँ आज बड़ी मुश्किल से हिम्मत करके आया था …खैर जाने दीजिये !” ये बोल सार्थक चला गया पर उसके अ
” सुनिए मुझे आपसे कुछ कहना है ?” प्रतिभा अंधविद्यालय से बच्चो को पढ़ा कर निकली तो गेट पर एक लड़का उसे रोकता हुआ बोला।
” जी कहिये ?” प्रतिभा आश्चर्य से उस लड़के को देख बोली क्योकि प्रतिभा उस लड़के को नही जानती थी ना कभी मिली थी फिर यूँ अचानक उसका इस तरह रोकना अजीब था।
” मेरा नाम सार्थक है वो सामने रेस्टोरेंट देख रही है वो मेरा है क्या आप मेरे साथ एक कप कॉफी पिएंगी !” वो लड़का अपना परिचय दे झिझकते हुए बोला।
” दिमाग़ खराब है आपका यूँही राह चलते ना जान ना पहचान आप किसी को कॉफी की कैसे कह सकते है वो भी मुझ जैसी लड़की को !” प्रतिभा गुस्से मे बोली उसके गुस्से मे दर्द भी था जो सार्थक ने साफ महसूस किया।
” माफ़ कीजियेगा मैं आपको यूँ परेशान करने नही आया था आप नही चलना चाहती कोई बात नही पर आप मुझे बहुत अच्छी लगती है मैं रोज आपको अपनी कुर्सी पर बैठा देखता हूँ आज बड़ी मुश्किल से हिम्मत करके आया था …खैर जाने दीजिये !” ये बोल सार्थक चला गया पर उसके चेहरे की उदासी और शब्दों मे दर्द प्रतिभा ने साफ महसूस किया।
आप सोच रहे होंगे यहां प्रतिभा ने मुझ जैसी लड़की क्यो कहा तो चलिए आपको प्रतिभा के बारे मे कुछ बताते है उससे आपको पता लग जायेगा उसने ऐसा क्यो कहा। असल मे प्रतिभा अपने नाम की तरह प्रतिभाशाली थी । अपने मा बाप और बड़े भाई की लाडली प्रतिभा , जिंदगी को भरपूर् जीने वाली प्रतिभा ! बारहवीं मे सफलता का परचम लहराने के बाद बड़े अरमानो से उसने कॉलेज मे दाखिला लिया बीबीए फिर एम बी ए कर अपने पैरो पर खड़ा होना चाहती थी पर किसी मनचले को ये रास ना आया उसने प्रतिभा की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया जिसे विनम्रता से प्रतिभा ने मना कर दिया पर उस मन चले ने इसका बदला प्रतिभा पर तेजाब फेंक कर लिया। कितने दिन अस्पताल मे जिंदगी मौत से झूझती रही चेहरे और गर्दन का एक हिस्सा जल गया था जिंदगी बची तो खुद के चेहरे से नफरत हो गई …उस मनचले को तो कोर्ट ने कुछ साल की सजा मिली पर प्रतिभा की तो जिंदगी नासुर बन गई अस्पताल से आकर कितने महीनों खुद को कमरे मे बंद रखा पर अपने परिवार वालों के लिए प्रतिभा ने खुद को संभाला और ट्रेनिंग ले अंधविद्यालय मे अध्यापिका बन गई क्योकि यहां उसे कोई देख नही सकता था वरना तो जो उसे देखता तिरस्कार भरी नज़रों से देखता । प्रतिभा ने इसी तरह जीना सीख लिया था पर आज सार्थक के शब्दों ने उसके मन मे उथल पुथल मचा दी क्योकि आखिर थी तो वो एक लड़की ही उसके भी कुछ अरमान थे ।
” क्या हुआ बेटा इतनी गुमसुम क्यो है आज स्कूल मे कुछ हुआ क्या ?” घर आने पर उसे गुमसुम देख उसकी माँ संध्या जी ने पूछा।
” नही माँ बस ऐसे ही !” प्रतिभा ने टाल दिया ।
अगले दिन ना चाहते हुए भी प्रतिभा की निगाहें रेस्टोरेंट की तरफ उठ गई और सामने सार्थक को देख झुक गई अब तो रोज का यही काम हो गया सार्थक का ओपन रेस्टोरेंट था इसलिए काउंटर से विद्यालय का गेट साफ दिखाई देता था तो आते जाते सार्थक प्रतिभा को देखता रहता प्रतिभा के लिए ये सब अब असहनीय होने लगा था क्योकि सार्थक को यूँ अपनी तरफ देखते देख उसके मन मे अरमान जगने लगे थे पर अपनी स्थिति का भान था उसे ।
” आप यहाँ वो भी इस वक़्त ….आइये आइये !” एक दिन विद्यालय से जल्दी निकल प्रतिभा सार्थक के रेस्टोरेंट पहुँच गई उस वक्त सार्थक काम मे व्यस्त था प्रतिभा को यूँ अचानक देख हैरान रह गया वो।
” क्या हम थोड़ी देर बात कर सकते है ?” प्रतिभा ने पूछा।
” जी बिल्कुल !” ये बोल सार्थक उसे कोने की मेज पर ले गया और कॉफी का ऑर्डर दे दिया।
” देखो सार्थक तुम एक अच्छे लड़के हो तुम मेरी हालत भी देख रहे हो पर तुम मेरे बारे मे जानते कुछ नही फिर भी यूँ दोनो वक्त तुम्हारा मुझे देखना मुझे असहज कर रहा है !” प्रतिभा सीधे सीधे मुद्दे की बात करने लगी।
” मैं आपके बारे मे सब जानता हूँ आपके साथ हुए हादसे के बारे मे भी साथ ही ये भी कि आप अपने नाम के अनुरूप प्रतिभावान हो !” सार्थक बोला।
” फिर तुम मुझसे क्या चाहते हो !” प्रतिभा हैरानी से बोली।
” मैं आपसे शादी करना चाहता हूँ !” सार्थक दृढ शब्दों मे बोला।
” क्या ….?” हैरान रह गई प्रतिभा क्योकि उसे बिल्कुल अंदाजा नही था सार्थक के मन मे ये चल रहा वो तो उसे समझाने आई थी।
” हां प्रतिभा मुझे फर्क नही पड़ता तुम बाहर से कैसी हो मुझे तुम्हारे दिल से प्यार है तुम्हारी अंदरूनी खूबसूरती कब मुझे भा गई पता ही नही चला …इन मासूम बच्चो से तुम्हारा लगाव हर जरूरतमंद की जो तुम मदद करती हो तुम्हारा खिलखिलाना इतने बड़े हादसे बाद भी उठ खड़े होना ये सब मेरे दिल मे कब घर कर गया पता नही लगा और तुम्हारे लिए दिल मे जो इज़्ज़त थी वो कब प्यार मे बदल गई मैं खुद नही जानता मुझे तो बस दोनो समय तुम्हे देखना अच्छा लगता है तुम्हारी हंसी अच्छी लगती है !” सार्थक आप से तुम पर आ गया और अपने दिल की बात बोल दी।।
” सार्थक किसी ऐसे इंसान को पसंद करना और उसके साथ जिंदगी गुजारना अलग बात है किसी को कुछ पल निहारना अलग बात है पर सारी उम्र उसे देखना अलग …प्लीज तुम इस बात को समझो और मुझे भूल जाओ !” सार्थक की बातों ने प्रतिभा के मन के वो तार छेड़ दिये थे जो किसी कोने मे छिपे थे पर सार्थक को समझा उसकी दिशा मोड़ना प्रतिभा का फर्ज था।
” टीचर हो शब्दों से खेलना जानती हो पर मैं तुम्हारी बातो से इत्तेफाक् नही रखता अगर दो लोगो मे प्यार है तो वो सारी जिंदगी साथ काट सकते है भले कुछ भी हो …!” सार्थक बोला।
काफी देर तक प्रतिभा सार्थक को समझाती रही पर वो अपनी बात से टस से मस नही हुआ । हार कर उसने सार्थक से उसके मम्मी पापा को अपने घर भेजने को बोल दिया क्योकि उसे लगता था सार्थक के मम्मी पापा इस रिश्ते को राजी नही होंगे या मम्मी पापा की बात आने पर सार्थक खुद पीछे हट जायेगा। पर ये क्या अगले दिन सार्थक अपने मम्मी पापा के साथ प्रतिभा के दरवाजे पर था।
प्रतिभा के मम्मी पापा से सार्थक के मम्मी पापा ने अपने बेटे की पसंद की बात की शुरु मे वो अचकचाये पर वो कहते है ना अंधा क्या चाहे दो आँख …उन्होंने तो इस रिश्ते को रजामंदी दे दी पर प्रतिभा पर फैसला छोड़ दिया …सार्थक का प्यार देख प्रतिभा भी इस रिश्ते को तैयार हो गई …पर इस शर्त के साथ कि वो बच्चों को पढ़ाना नही छोड़ेगी।
धूम धाम से शादी हुई दोनो की और प्रतिभा सार्थक की पत्नी बन गई ।
” इस घर और मेरे जीवन मे तुम्हारा स्वागत है प्रतिभा अब कभी मत कहना मुझ जैसी लड़की ….क्योकि तुम जैसी लड़की लाखों मे एक को मिलती है !” प्रथम मिलन पर सार्थक प्रतिभा का हाथ चूमते बोला।
” तुम्हारी वजह से मैं खुद से प्यार करने लगी हूँ सार्थक तुमने मुझे असली जिंदगी से मिलवाया है वरना तो मेरी जिंदगी बस वो स्कूल और मेरा अंधेरा कमरा बन गये थे !” प्रतिभा भावुक होते हुए बोली।
” बस प्रतिभा अब इन आँखों मे कभी आंसू ना आये पहले ही बहुत रो ली तुम !” ये बोल सार्थक ने प्रतिभा को गले लगा लिया।
इसके बाद प्रतिभा कभी अंधेरे कमरे मे नही बैठी क्योकि उसकी जिंदगी मे सार्थक नाम का उजाला आ गया था । जिसने अपने नाम के अनुरूप प्रतिभा की जिंदगी को सार्थक मोड़ दिया था जिसने प्रतिभा की असली प्रतिभा को पहचाना था।
आपकी दोस्त
संगीता अग्रवाल