संस्कारों का वास्तविक अर्थ – पिंकी सिंघल

“पापा अब तो आपको अपना प्रॉमिस पूरा करना ही होगा..आपने परीक्षाओं से पहले वायदा किया था कि कक्षा में अव्वल आए तो तुम्हें तुम्हारी मनपसंद जगह घुमाने लेकर चलेंगे..यह देखिए मेरी रिपोर्ट कार्ड !! मैने अपनी कक्षा में सबसे अधिक अंक पाकर प्रथम स्थान प्राप्त किया है ।अब आपका कोई बहाना नहीं चलेग।अब तो आपको मेरी मनपसंद जगह घूमने चलना ही होगा और मैं चाहता हूं कि हम सब कश्मीर घूमने जाएं क्योंकि कश्मीर को धरती का स्वर्ग कहा जाता है और मैं उसी स्वर्ग को देखना चाहता हूं। अंकित की ज़िद और उससे किए वायदे की वजह से रामेश्वर आखिर झुक ही गया और उसने पत्नी सीमा को अपना और बच्चों का सामान पैक करने को कहा।रामेश्वर ने कहा कि हम सब 2 दिन बाद ही कश्मीर के लिए निकलेंगे । मैं कल ही कश्मीर के लिए गाड़ी बुक करवा देता हूं ।इतने समय में तुम लोग सब तैयारी पूरी कर लो।

घर में सभी बहुत उत्साहित थे कि कश्मीर में जाकर यह करेंगे, वह करेंगे,अनगिनत फोटो खींचेंगे और आनंद का एक भी पल व्यर्थ नहीं जाने देंगे।अंकित के दादा दादी भी बहुत खुश थे कि, चलो परीक्षाओं के बाद अब बेटे बहू और पोता पोती घूम आएंगे। इसी बहाने बच्चों की भी बात रह जाएगी और उनकी दिनचर्या में भी कुछ परिवर्तन आ जाएगा।

सब अपने अपने कपड़े पैक करने में बिजी थे सीमा भी खाने पीने का सामान और अन्य आवश्यक चीजों को धीरे-धीरे अटैची में रख रही थी ।रामेश्वर ने हिदायत दी कि कुछ ऊनी कपड़े भी साथ रख लो क्योंकि कश्मीर का मौसम थोड़ा ठंडा रहता है ।सीमा ने उनकी बात मान कर सभी के लिए दो-दो ऊनी कपड़े भी रख लिए।

अगले दिन तक सारी तैयारियां पूरी हो चुकी थी ।अंकित और उसकी बहन अंकिता से वह रात गुजारनी मुश्किल हो रही थी ।उन्हें बस अगली सुबह का इंतजार था कि कब सुबह हो और कब वे सब कश्मीर के लिए घर से निकलें।उन सब ने कश्मीर जाकर क्या क्या खरीदना है ,उसकी भी लंबी चौड़ी लिस्ट बना ली थी ।कहने का मतलब यह है की बड़े तो बड़े, बच्चे भी इस यात्रा को लेकर बहुत ही ज्यादा उत्साहित थे।

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शाम के 5:00 बज रहे थे ।परिवार के सभी लोग एक साथ बैठकर चाय नाश्ता कर रहे थे और आने वाली सुबह का इंतजार कर रहे थे। परंतु अचानक अंकित के दादाजी को सीने में दर्द उठा और उन्हें बहुत घबराहट महसूस होने लगी  यह देखकर रामेश्वर ने पिताजी की छाती मली और उन्हें पानी पिलाया।परंतु इतना कुछ करने के बावजूद भी जब दादा जी को आराम नहीं मिला तो डॉक्टर को बुलाया गया। डॉक्टर ने बताया कि उन्हें हार्ट अटैक आया है और आगे उन्हें बहुत अधिक देखभाल और सावधानी बरतने की आवश्यकता है ।

यह जानकर घर के सभी सदस्य तनाव में आ गए। दादाजी की सेहत को लेकर सभी बहुत चिंतित थे ।इस चिंता में वे कश्मीर की यात्रा को भी भूल गए। डॉक्टर की दवाई से दादाजी को थोड़ा आराम लगा,इतने में अंकित की बुआ जी भी आ चुकी थी और उन्होंने रामेश्वर से कहा कि :”तुम लोग निश्चिंत होकर कश्मीर जाओ, मैं यहां मां बाबूजी का ध्यान रखूंगी।”

 रामेश्वर का जाने का बिल्कुल मन नहीं था किंतु बच्चों से किए वायदे को भी वह तोड़ना नहीं चाहता था इसलिए उसने हामी भर दी  परंतु उसके आश्चर्य का तब ठिकाना न रहा जब अंकित और उसकी बहन अंकिता दादाजी के कमरे में आए और उन्होंने कश्मीर जाने की यात्रा को कैंसिल करने की अपने पिताजी से प्रार्थना की ।

सब हैरान हो गए  दादा जी ने भी कहा कि “जाओ बच्चों,कश्मीर घूम आओ।मैं अब बिल्कुल ठीक हूं ।तुम आनंद लो अपनी यात्रा का ।तुम्हारी बुआ जी भी तो अब यहां आ गई हैं।

दादाजी की इस बात पर अंकित ने जो जवाब दिया उसे सुनकर सभी परिवार जन खुशी से फूले न समाए और उन्हें अपनी संस्कृति और अपने दिए संस्कारों पर गर्व महसूस होने लगा।

जानते हैं अंकित ने क्या कहा अंकित ने कहा:”दादा जी ,असली आनंद तो अपनों के साथ है ।जब अपने परिवार के लोग स्वस्थ और अच्छी सेहत का आनंद उठा रहे होते हैं तो देख कर बहुत आनंद मिलता है और इस आनंद से बढ़कर दूसरा कोई आनंद हो ही नहीं सकता ।कश्मीर की यात्रा तो आगे भी की जा सकती है ,परंतु इस वक्त आपको हमारी हम सब की देखभाल की बहुत जरूरत है ।हम सब मिलकर आपका ध्यान रखेंगे और देखना आप बहुत जल्द वापिस तंदुरुस्त हो जाएंगे।

पिंकी सिंघल

अध्यापिका

शालीमार बाग दिल्ली

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