सुहाग सेज पर बैठी नेहा सुनहरे सपने देख रही थी और पति के आने का इंतजार भी कर रही थी l बाहर मेहमानों की चहल-पहल थी l थोड़ी देर बाद बाहर शांत माहौल होने पर उसका पति नीरज कमरे में आता है l नीरज नेहा का घूंघट उठा कर उसका चेहरा देखते ही रह जाता है क्योंकि इस समय वह बहुत सुंदर लग रही थी l
फिर दोनों एक दूसरे में खो जाते हैं l बाहर का कोलाहल सुनकर सुबह उनकी आंख खुलती है l अजय फ्रेश होकर बाहर चला जाता है तभी नेहा की नंद आती है जिनकी शादी हो चुकी थी कहती है भाभी तैयार होकर नीचे आ जाओ मुंह दिखाई की रस्म है l
नेहा तैयार होकर नीचे पहुंचती है सब लोग हाल में इकट्ठा थे l मुंह दिखाई की रस्म होती है और फिर धीरे-धीरे करके सभी रिश्तेदार अपने घर चले जाते हैं
आप घर पर नेहा उसका पति नीरज देवरा ननंद नंदोई और उसके साथ ससुर इतने ही लोग रह जाते हैं l
नेहा अपने कमरे में चली जाती है और सभी लोग बैठे बातें करते रहते हैं l तभी विमला देवी नेहा के कमरे में आकर रहती है कि तुम्हारी मम्मी ने जो गहने कपड़े दिए हैं वह तो दिखाओ l
कुछ हल्के-फुल्के गहने और कपड़े निकाल कर नेहा अपनी सास को दे देती है l विमला देवी देखकर कहती हैं यह भी क्या दिया है अपनी बेटी को l
हाल में जाकर सभी को वह सब दिखाती हैं और अपनी बेटी से कहती है कि तुझे जो पसंद हो वह भाई की शादी का गिफ्ट ले ले l
उसने मुंह बनाते हुए एक सुंदर सा नेकलेस उठा लिया l
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नेहा दूर से यह सब देख रही थी उसे बुरा तो बहुत लगा परंतु उसके संस्कारों ने उसे बोलने से रोक दिया l
दूसरे दिन उसके नंद-नंदोई भी अपने घर चले गए l
नीरज की छुट्टियां खत्म होने को थी इसलिए विमला देवी ने नेहा और नीरज को पग फेरे के लिए नेहा के मायके भेज दिया l नेहा के मायके वालों ने बेटी और दामाद का खूब आदर सत्कार किया l अपनी समर्थ के अनुसार बेटी दामाद को भेंट देकर दूसरे दिन विदाई कर दी l
ससुराल पहुंचते ही स विमला देवी ने अपना वही डायलॉग दोहराया कि तुम्हारे मम्मी पापा ने पग फेरे में क्या दिया है l नेहा बोली मम्मी जी दोनों को कपड़े ही दिए हैं l
विमला देवी बोली कुछ जेवर नहीं दिया l
नेहा ने सिर हिला दिया और कहा कि मम्मी की छोटी बहन भी शादी लायक है इसलिए पापा जी अब जेवर देने की स्थिति में नहीं है l
विमला देवी अपने पति से बोली कि मैं तो पहले ही कहा था कि यह लोग अपने बराबर के नहीं है l
नेहा मध्यम वर्गीय परिवार की लड़की थी लेकिन सुशील और संस्कारी थी l पढ़ी-लिखी और सुंदर भी थी विमला देवी के पति को ऐसी ही बहू चाहिए थी l वे दहेज लेने के पक्ष में शुरू से ही नहीं थे l
विमला देवी अपने भी इकलौते बेटे की खूब बढ़-चढ़कर शादी करना चाहती थीl जो वह नहीं कर पाई l
बहरहाल नेहा मायके से आकर ससुराल में अपने कमरे में चली गई l
दूसरे दिन उसकी पहली रसोई थी विमला देवी ने उस रात में ही कह दिया था की सुबह जल्दी उठकर जो मैं बताऊं वह तुम्हें बनाना है l
नेहा सुबह जल्दी उठ गई विमला देवी ने उसे खीर और एक दो पकवान और बनवाई l सभी ने खाना खाया और नेहा को गिफ्ट दिए l
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अगले दिन नेहा की ननंद भी अपनी ससुराल चली गई और नेहा ने रसोई संभाली l उसने देखा कि केवल झाड़ू पोछा के लिए बाई आती है बाकी सारा काम उसे ही करना है l उसने सबसे पहले पति और देवर का टिफिन तैयार किया और फिर पूरे घर का खाना बनाया l फिर बर्तन साफ करना कपड़े धोना कपड़ा पर प्रेस करना और भी सारे कामों से अकेले ही करने पड़े l इस पर भी बीच-बीच में विमला देवी हर काम में नुक्स निकालती रही और उसकी आलोचना करती रही l नेहा चुपचाप सुनती रही l इस तरह से दो माह बीत गए उसने देखा कि उसके पति भी अपनी मां की हां में हां करते हैं और नेहा को डांट भी देते हैं l
एक दिन नेहा ने अपनी छोटी बहन शिवानी को फोन कियाl नेहा ने पूछा मम्मी पापा कैसे हैं वह बोली ठीक है
शिवानी बोली तुम ठीक हो और तुम्हारे घर में सब ठीक है नेहा ने कहा की वैसे तो सब ठीक है लेकिन इस घर में केवल ससुर जी को छोड़कर बाकी सब लोग मुझे नौकरानी का ही दर्जा देते हैं केवल खाने पहनने को अच्छा देते हैं तेरे जीजा जी भी उन्हीं के साथ रहते हैं जिसके मन में जो आता है वही मुझसे बोल देते हैं यह नहीं सोचते कि मुझे भी कुछ बुरा लगता होगा बेज्जती कर देते हैं जबकि मैं घर का सारा काम बड़ी खुशी से करती हूं और सब की खुशी का मैं ध्यान रखती हूं l तू ही बता मैं अब क्या करूं l
शिवानी कुछ चंचल स्वभाव की समझदार लड़की थी वह बोली दीदी तुम किसी से छोटे-मोटे काम करवा लिया करो जिससे सबको थोड़ा काम करने की आदत पड़ेगी और तुम्हें भी आराम मिलेगा l
नेहा बोली की इतनी सख्त माहौल में मेरी किसी से बोलने की हिम्मत ही नहीं पड़ती और सुनने को मिलता है कि मैं दिन भर करती ही क्या हूं l मैं सम्मान से जीना चाहती हूं जो कि हर घर में एक बहू को मिलता है l
शिवानी बोली दीदी तुम्हें कोई कदम तो उठाना पड़ेगा तभी तुम सम्मान से जी पाओगी l
लिया घबराकर बोली क्या ll
शिवानी बोली ऐसा कोई काम आपसे नहीं करवाऊंगी जिससे मम्मी पापा का सर झुके l तुम नौकरी कर लो और घर के काम के लिए एक नौकरानी रख लो l
नेहा ने कहा सलाह तो तुम्हारी अच्छी है मैं कोशिश करूंगी तुम मेरी नौकरी के लिए वैकेंसी देखो l
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2 दिन बाद शिवानी का फोन आया की दीदी मेरी सहेली के पिता एक कंपनी में मैनेजर है वहां पर आपकी जॉब लग सकती है उसने कंपनी का नाम बताया l और कहां कि तुम इंटरव्यू देने पहुंच जाना l
दूसरे दिन सुबह उठकर नेहा ने सभी काम जल्दी-जल्दी किया और कुछ जरूरी काम बात कर घर से निकल गई निश्चित समय पर कंपनी पहुंची वहां पर शिवानी ने अपनी सहेली से फोन करवा दिया था अतः नेहा को हल्का-फुल्का इंटरव्यू लेकर सिलेक्ट कर लिया गया और दूसरे दिन आने के लिए कहा गया l
शाम को घर लौट कर नेहा ने यह खुशखबरी सब घरवालों को सुना दीl घर के सभी लोग आश्चर्यचकित रह गए l केवल नेहा के ससुर जी बहुत खुश थे l वे वे बोले कि नेहा को भी प्यार और सम्मान मिलना चाहिए जैसे कि घर के और सदस्यों को मिलता है सभी लोग उसे मशीन समझते हैं और उसे भला बुरा कहते हैं वह भी घर की बहू है उसे भी सम्मान मिलना चाहिए l
अगर वह नौकरी करना चाहती है तो उसे कोई नहीं रोकेगा और सभी लोग घर के कामों में उसका सहयोग करेंगे l
विमला देवी बोली की नेहा बेटा मुझे माफ कर दो मैंने तुम्हें बहुत दुख दिया है l नीरज भी खुश हो गया l
नेहा बोली मम्मी जी आप माफी ना मांगे और मैं एक मेड का इंतजाम कर लिया है घर के सारे काम करेगी l सभी खुश थे l
बिंदेश्वरी त्यागी बरहन आगरा
स्वरचित
आप प्रकाशित