रिश्तों का अधिग्रहण – संध्या त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : क्या बात है श्रीमती जी… ये डायरी में क्या लिखा जा रहा है….. और मंद मंद मुस्कुराया जा रहा है …?

चिट्ठी …चिट्ठी लिख रही हूं श्रीमान जी और प्लीज मुझे डिस्टर्ब ना करें.. आज के जमाने में कोई चिट्ठी लिखता है क्या ..?? और वैसे वो महत्वपूर्ण व्यक्ति है कौन , जिसके लिए हमारी धर्मपत्नी मुस्कुराते हुए अपनी भावनाएं बिखेर रही हैं…!

माँ…. मेरी माँ …..क्या कहा माँ ….?? पागल हो गई हो क्या ….चिट्ठी पढ़ने के लिए माँ होनी भी तो चाहिए ..प्यार से सिर पर हाथ फेरते हुए पतिदेव ने कहा ! आप है ना मजाकिया लहजे में मैंने भी कह दिया !

जानती हूं , मेरी भावनाओं को समझने के लिए अब मेरी माँ इस दुनिया में नहीं है.. पर अपनी भावनाओं को माँ का चेहरा याद कर उनकी प्रतिक्रिया की छवि मस्तिष्क में बनाकर ..मुझे कितना आनंद मिल रहा है , शायद आप नहीं समझेंगे ।

फिर मैंने हाथ में पेन लिए ..डायरी में आंखें गड़ा कर मस्तिष्क में माँ का चेहरा देख न जाने कितनी बातें की…

माँ तू बोलती थी ना , मेरे दामाद मेरी बेटी से भी सीधे-सादे व सरल है तब मैं कहती अच्छा एक-दो दिन में कैसे समझ गई जब साथ रहो तब पता चलेगा ..पर अब मैं समझ गई माँ तेरी पारखी नजरों ने पहली बार में ही परख लिया था अपने दामाद को ,और कुछ ही दिनों में तू हम सबको छोड़कर चली गई ।

यूँ तो खट्टे मीठे एहसासों के साथ समय बितता गया , मैंने अपने बारे में बहुत सोचा माँ.. दिन भर के अपने कामों की श्रेष्ठता, अपनी प्रशंसा , अपना योगदान …सिर्फ अपने बारे में और अपना-अपना ..और न जाने क्या-क्या..!

और तो और यदि कभी भूल वश

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भी किसी ने कह दिया …किया ही क्या है तुमने …फिर हजारों कामों की लिस्ट सामने तो रखी ही जाती थी न जाने कितनी रचनाएं भी इस पर गढ़ दी जाती है ।

पर माँ…आज न जाने क्यों अपने बारे में तुझे बताने का मन नहीं हो रहा है , आज मैं तुझे ऐसे शख्स के बारे में बताऊंगी जो मेरी जिंदगी में तेरी कमी महसूस नहीं होने देते और वो शख्स और कोई नहीं माँ तेरे दामाद है …जब भी अकेली हो तुझे याद करने की कोशिश करती हूं किसी न किसी रूप में वो तेरी तरह माँ बन ही जाते हैं…

जैसे तू मुझे समझाती थी ना माँ मेरी हर बात जान जाती थी वैसे ही ये मुझे बहुत अच्छी तरह समझते हैं माँ ऑफिस के मध्य भी फोन कर मेरा हाल खबर लेते रहते हैं ….

” मैं भी तो एक माँ हूं ना माँ ” फिर भी न जाने क्यों मुझे लगता है ये बच्चों से भी ज्यादा शायद सबसे ज्यादा हाँ माँ सबसे ज्यादा मुझे समझते हैं ।

हार्ट सर्जरी के बाद कभी-कभी बहुत भावुक हो जाती हूं तो इनका कहना ..” मैं हूं ना ” बहुत ताकत देता है माँ बिल्कुल तेरी तरह …जैसे तू हर मुश्किल में ढाल बनकर खड़ी रहती थी ना, बिल्कुल वैसा ही…

और अब बच्चों के हर मुश्किल में मैं ढाल बनकर खड़ी रहने की कोशिश करती हूं माँ , पर उसमें भी मुझे इनका साथ चाहिए होता है माँ ।

रिक्शा में बैठते ही धीरे से तू मेरा फ्रॉक पकड़ लेती थी ताकि मैं गिर ना जाऊं और मैं गुस्सा होती और कहती छोड़ ना माँ अब मैं बड़ी हो गई हूं , एक मिनट के लिए तू छोड़ भी देती थी फिर धीरे से हल्के हाथों से कब पकड़ लेती मुझे पता ही नहीं चलता …ठीक वैसे ही ये मोटरसाइकिल पर बैठे-बैठे हमेशा पूछते रहेंगे ठीक से बैठी तो हो ना मैडम ? सच में माँ तेरी याद आ ही जाती है…

जानती है माँ, कुछ गलती होने पर मैं रोती हुई तेरे पास आती और बोलती अब क्या होगा माँ… प्लीज बाबूजी को मत बताना और तू कब बाबूजी से इस विषय पर बात कर लेती थी कि बाबूजी से मुझे डांट भी नहीं पड़ती ..जबकि पहले तो मोबाइल भी नहीं था ।

ठीक वैसे ही एक दिन रिक्की (बेटे) की कपड़े धोने के दौरान जरूरी कागजात मैंने पानी में डूबा दिए थे , दिन भर चिंता में रही अब क्या होगा , रिक्की से क्या बोलूंगी ..पर जानती है माँ , इन्होंने बिल्कुल तेरी तरह कब रिक्की को समझा दिया और घर आते ही रिकी ने कहा …पागल है क्या माँ इतना डरती क्यों है आखिर तू मेरी ” माँ है माँ…”

एक दिन रिक्की ने कहा , क्या पापा आप दाने निकाल निकाल कर क्यों दे रहे हैं ? मम्मी खुद निकाल कर खा लेगी , खुद भी तो खाइए…हां बेटा मैं भी तो खा रहा हूं , बेटे के बोलने के बाद भी बार-बार मुझे भुट्टा के दाने निकाल निकाल कर खिलाते रहे और मुझे तेरी याद दिलाते रहे …ऐसे ही तो तू भी हरे चने के दाने निकाल निकाल कर मुझे खिलाती थी ।

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माँ तेरी पारखी नजर ने एकदम सही परखा… अच्छे पति तो है ही ..हर पल…

” माँ बन तेरी कमी पूरी करने की कोशिश , बाबूजी बन आर्थिक दृढ़ता , भाई के समान दोस्त बन और क्या-क्या बताऊं माँ !

पति पत्नी का रिश्ता सिर्फ जिस्मानी नहीं होता …जीवन के सभी रिश्तों का मिश्रण (साथ ) ही तो “जीवनसाथी ” कहलाता है ना माँ ।

…..लाख कोशिश करते हैं वो की कभी मुझे माँ की याद ना आए पर उनकी हर कोशिश ही मुझे तेरी याद दिलाती है माँ….

माँ इन्होंने तो सारे रिश्तों के… मर्यादाओं को , खूबियां को , अधिग्रहण ही कर लिया है और इनको अधिग्रहण के जुर्म में इसकी निरंतरता बनाए रखने की सजा भुगतनी पड़ेगी ।

माँ बच्चों ने मुझे मातृ दिवस की बधाई दी , मेरी तरफ से तुझे भी मातृ दिवस की बहुत-बहुत बधाइयां और एक बधाई हम सब की तरफ से इनके लिए भी माँ ।

तेरी बेटी

(स्वरचित मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित रचना)

श्रीमती संध्या त्रिपाठी

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