शादियों का सीजन शुरू होने वाला है। मोहल्ले में भी शादी है इसलिए सभी घरों में थोड़ी सी चहल-पहल है शादी को लेकर। महिलाएं भी उत्साहित है। हल्दी के लिए पीले और मेहंदी के लिए हरे कपड़ों का चुनाव कर रही हैं। अब नया चलन हो गया है। शादी में भी अड़ोसी पड़ोसी सहपरिवार ही सम्मिलित होते हैं।’
पहले लोग बेटी के विवाह में जाते थे तो सिर्फ काम करवाने। खाना खाकर स्थानीय लोग नहीं आते थे। लेकिन अब घराती बराती में फर्क खत्म हो ही चुका है। कहीं-कही पर तो घराती बारात आने से पहले जीम लेते हैं।
सुबह को अचानक से मोहल्ले में कोहराम मच गया। एक घर में जवान मौत हो गई। बाइक से आ रहा था जवान लड़का। हेलमेट लगा नहीं रखा था। ठंड के मौसम में रात के समय पीछे से कोई वाहन टक्कर मार गया। ऑन द स्पॉट ही मृत्यु हो गई।
सुबह को पूरे मोहल्ले में खुसुर फुसुर हो रही थी। एक घर में शादी है दूसरे घर में जवान मौत हो गई है कैसे होगा सब। मोहल्ले की सभी महिलाएं दहाड़े मार मार कर विलाप कर रही थी। जवान जवान बहू को देखकर सभी को रोना आ रहा था। चलो त्यौहार सब निपट गए, बहू ने करवा चौथ भी कर ली।
दिवाली का त्यौहार भी हो ही गया, दाग नहीं लगा त्योहार पर।एक महिला रोते हुए बोली। अन्य महिलाएं उसकी हमें हाँ में हाँ मिलाने लगी। छोटे-छोटे बच्चे छोड़ गया था। हर आंख रो रही थी। मिट्टी को कंधा देने के लिए भी पूरा मोहल्ला उमड़ा।
पूरी गली में शांति पसरी हुई थी। विवाह वाले घर में बड़ा अजीब सा माहौल था। कैसे खुशी मनाएं। पूरे रंग में भंग पड़ गया था। इकलौते बेटे का विवाह था। वह तो आजकल शादियां मैरिज होम में होती है इसलिए घर पर रिश्तेदार ज्यादा जमा नहीं होते हैं। रीति रिवाज रस्में निबटाई जा रही थी। कुछ रिश्तेदार घर पर आ गए। हो हल्ला भी मचा रहे थे। शादी क्या रोज-रोज होती है। कहीं गम है तो क्या हम खुशी नहीं मनायेंगे। लड़की की मौसी सब को चिल्लाते हुए बोली। गम गम की जगह,खुशी खुशी की जगह।
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विवाह की रस्में सुचारू रूप से चलने लगी। ढोलक पर थाप भी दी जाने लगी। रिश्तेदारी की कुछ लड़कियां नाच गा भी रही थी। मोहल्ले की महिलाएं भी उपस्थित हो रही थी।
रात को दावत थी शादी की। चारों तरफ काना फुसी हो रही थी। दावत में पूरा मोहल्ला अच्छी तरह तैयार होकर खाने के लिए गया। मोहल्ले की रमा ताई से दूसरे मोहल्ले की विमलेश चाची ने दूसरे घर में हुई गमी की बात छेड़ दी। तुम्हारे यहां तो गमी हो गई है पड़ोस में, तुम लोग खाने पर कैसे आ गई सभी।
राम ताई जवाब देते हुए बोली,”काम तो सब निपटाने पड़ते ही हैं। मोहल्ले पड़ोस में निभाया भी जाता है। एक आंख में दुख के आंसू होते हैं तो दूसरी से हंसना भी पड़ता है। चारों तरफ की देखी जाती है। किसी की खुशी में शामिल न हो, यह भी तो अच्छी बात नहीं। ऐसा कहकर रमा ताई जल्दी से आलू टिक्की के भीड़ वाले काउंटर पर अपना दौना लेने के लिए भीड़ में घुस गई। विमलेश चाची भी गोलगप्पे खाने के लिए लाइन में लग गई।
सच्चाई यही है आजकल कोई किसी से #मन_का_रिश्ता नहीं बनाता। प्रोफेशनल होकर रिश्ते बनाए जाते हैं और प्रैक्टिकल होकर निभाए जाते हैं। कुछ पंक्तियां आज के दौर के हिसाब से लिखी गई हैं मेरी कलम से।
संवेदना सारी मर गई।
मर गया आंख का पानी।
लाज सारी उतर गई।
बह गया शर्म का काजल।
शरीर पर वस्त्र कम होते गए।
जिंदगी अब ऑनलाइन चलने लगी।
म्युचुअल फ्रेंड्स की भरमार बढ़ने लगी।
दिखावे की जिंदगी को लोग जीने लगे।
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सच्चाई से अब मुंह मोड़ने लगे।
परिवार अब टूटने लगे।
दर्प और अहंकार दंभ भरने लगे।
चिंतायें भी बढ़ती गई।
खर्च अधिक और आमदनी कम होती गई।
लोग तनाव और द्वंद में जीने लगे।
आधुनिकरण होकर क्या मिला।
लोग खुद से ही दूर होते चले गए।
मौलिक अप्रकाशित
प्राची अग्रवाल
खुर्जा बुलंदशहर उत्तर प्रदेश
#मन का रिश्ता पर आधारित बड़ी कहानी