बर्षा तू अपने बेटे को समझा ले जब देखो तब मेरी बेटी को मारता रहता है किसी दिन मेरा हाथ उठ गया तो फिर तुझे बुरा लगेगा मीतू अपनी देवरानी से बोली ।
बर्षा बोली दीदी आपकी बेटी भी दिखने की सीधी है वो भी बराबर से लड़ लेती है आपके सामने भोली बन जाती है और आप हाथ उठाओगी तो मेरा भी उठ सकता है ।
अंदर बैठी सास (नीना जी ) ये सब सुन रही थी सोच रही थी अब इनका कुछ करना पड़ेगा नहीं तो ऐसा न हो तकरार के कारण रिश्ते मैं दरार पड़ जाए
मीतू और बर्षा देवरानी -जेठानी कम बहनों की तरह ज्यादा रहती नीना जी और घर मैं सब खुश थे की आपसी किट किट नहीं होती जिस से माहौल अच्छा रहता है ।
मीतू के एक बेटी थी काया और दो साल बाद बर्षा के भी बेटा हो गया ध्रुव जब दोनों छोटे थे तब तक तो कुछ फर्क नहीं पड़ा दोनों मिलकर खेलते जैसे जैसे बड़े होते गए उनके बीच छोटी छोटी चीजों के लिए लड़ाई होती काया पांच साल की और ध्रुव तीन साल का था ।
अब अक्सर उनमें हाथ पाई हो जाती काया बड़ी थी तो अपनी मम्मी से शिकायत करने पहुंच जाती जबकि बर्षा ने नोटिस किया काया भी बराबर से लड़ लेती है शुरू मैं उसे लगा कि बच्चों के बीच मै नही बोलना चाहिए ।लेकिन मीतू अब बेटी के पक्ष मैं बोलने लगी थी जिस कारण अब वर्षा को भी गुस्सा आ जाता और वो भी सुना देती अब उनकी आपसी तकरार बढ़ती जा रही थी ।
आज बात बच्चों पर हाथ उठने की आ गई नीनाजी जानती थी कोई दूसरा बच्चों को मारे तो कोई भी मां सहन नहीं कर सकती और बात ज्यादा बिगड़ सकती है ।
वो बाहर आई और उन्होंने बर्षा और मीतू से कहा की आज से तुम अपने बच्चों को एक दूसरे से दूर रखना न साथ रहेंगे न लड़ेंगे ।मुझे ये रोज की तकरार पसंद नहीं है
बर्षा बोली लेकिन मांजी एक ही घर मैं रहकर बच्चे दूर कैसे रहेंगे ।
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नीनाजी बोली मुझे नही पता अपने कमरे मै रखो दोनों चुप हो गई ।काया और ध्रुव तो बच्चे है उन्हें कहां समझ आता वो तो लड़ कर एक हो जाते अब वो रोने लगे की साथ खेलना है ।
मीतू मांजी के पास गई बोली मांजी ये संभव नहीं है एक ही घर मैं रहकर बच्चों को दूर रखना ।
नीना जी बोली मैं यही समझाना चाहती हूं की तुम बच्चों के लिए आपस मै तकरार कर रही हो कहीं ये रिश्तों मैं दरार का रूप नही ले ले इसलिए मैने ये कदम उठाया ।बच्चे तो लड़ कर भूल जाते है और वो एक हो जाते है इसलिए तुम आपस मै लड़ने की बजाय उन्हें समझाओ और लड़ भी लिए तो अपने दिल पर मत लो।
वर्षा और मीतू को बात समझ आई वो बोली आप सही कह रहीं है हम इस बात का ध्यान रखेंगे और उन्होंने बच्चों को खेलने दिया दोनों मिलकर खुश थे थोड़ी देर मैं फिर लड़ने लगे ।
नीना जी बोली हर रिश्ता ऐसा ही होना चाहिए जिसमें तकरार तो हो पर दरार नहीं आए रिश्तों के बीच मै बचपन वाला भोलापन ही रहे तो बेहतर है ।
#तकरार
स्वरचित
अंजना ठाकुर