पहचान (भाग 2) –  वीणा सिंह : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi  : मैं अपनी सहपाठी निधि जो मेरे साथ पीजीआई चंडीगढ़ में पढ़ती थी उससे प्यार करता हूं आठ साल से हमारे संबंध है. ये मेरे मम्मी पापा नही है बचपन में इन्होंने मुझे गोद लिया था… मेरे मां बाप गांव में इनके घर बगीचे और जमीन जायदाद की देखभाल करते थे. इनको कोई संतान नहीं थी लोगों ने कहा किसी गरीब बच्चे को पालो तो भगवान तुम्हे अपना बच्चा अवश्य देंगे.. इनलोगो ने पांच साल की उम्र में मुझे गांव से शहर अपने पास लाया..

अगले साल हीं इनके घर एक बच्चा पैदा हुआ.. फिर भी इन्होंने मुझे पढ़ाया और अच्छी परवरिश भी दी. इनका बेटा अमेरिका में सेटल हो गया है …शादी भी कर लिया है बहुत अच्छी कंपनी में इंजीनियर है पत्नी भी इंजीनियर है.. इन लोगों ने तुम्हारा चुनाव इसलिए किया की तुमने फैशन डिजाइनिंग के बाद बुटीक खोलने की बात अपने बायोडाटा में लिखा था. सुंदर थी हीं तुम.. तुम इनके पास रहकर बुटीक भी देखोगी और गठिया सुगर की मरीज मां दिल के मरीज पापा की देखभाल भी करोगी. कामवाली घंटे दो घंटे से ज्यादा टिकती नही.. तुम तो चौबीस घंटे साथ रहोगी..

मैं निधि के बिना नहीं रह सकता हूं इसलिए हमने फैसला किया है कि हम दोनो खुदकशी कर लेंगे. इनके अहसान की कीमत अपनी जान देकर चुकाएंगे.. मुझे काठ मार गया. गर्म सीसे सा एक एक शब्द मेरे कानों से होके दिल तक पहुंच रहा था.. ना मैं सुहागन थी ना हीं विधवा.. मैने अभि को उसी समय बंधन से मुक्त किया.. बस एक सवाल पूछा मैं बिना किसी गलती के इतनी बड़ी सजा की हकदार क्यों बनी? अभि हाथ जोड़कर सर झुका लिया..

अगले दिन पग फेरे के नाम पर मायके गई.. ऐसा दर्द जिसे मैं किसी से बता भी नही पा रही थी.. कुछ रिश्तेदार मुझसे मिलने के लिए रुके थे.. सबके जाने के बाद मैं मां को सब कुछ बताया.. मां तो जैसे पागल हो गई.. बहुत सोच समझ कर मैं मौसी के यहां वाराणसी चली आई.. पता नही मां और पापा समाज परिवार और रिश्तेदार को क्या जवाब दिया..

अक्सर अस्सी घाट पर बैठ कर गंगा जी को देखती.. कभी मणिकर्णिका घाट पर जल रहे चिता के धुएं में अपने अरमां को विलीन होते हुए देखती.. छः महीने बीतने के बाद मौसी ने एक रात मुझे बहुत ऊंच नीच दुनियादारी समझाई..

मौसी एक शादी का प्रस्ताव रखा …. मुझसे उम्र में पन्द्रह से सत्रह साल बड़े बैंक मैनेजर राजेश कुमार का जिनकी पत्नी मर चुकी है कैंसर से.. दो बच्चे हैं.. बेटी बड़ी है बेटा छोटा है.. बहुत हीं शरीफ इंसान है..

हमारे समाज में पुरुषों को जिनका तलाक हो चुका हो या विधुर हों कुंवारी लड़की शादी के लिए मिल जाती है पर औरतें इतनी नसीब वाली नही हो सकती है..

दर्शना को किसी भी चीज में रुचि नहीं रह गई थी..

अपने शहर जाना नहीं चाहती थी.. अपने को किस्मत और वक्त के हवाले छोड़ राजेश कुमार के साथ शादी के बंधन में बंध गई! पच्चीस साल की दर्शना चौदह और सोलह साल के बच्चों की मां बन गई.. राजेश ने पहली रात को बताया मैने बेटे के जन्म के बाद नसबंदी करा लिया था.. मुझे माफ कर देना..

सारे सपने अरमां और उम्मीदें दर्शना अपने ससुराल के चौखट पर दफन कर चुकी थी.. राजेश के कारण बैंक से लोन जल्दी मिल गया.. दर्शना के बुटीक के लिए. राजेश के तरफ से शादी का उपहार था दर्शना के लिए.. बेटी सिंधिया गर्ल्स स्कूल में थी ग्वालियर में और बेटा बॉयज सिंधिया ग्वालियर में पढ़ रहे थे..

दर्शना अपने बुटीक में व्यस्त रखने की और अतीत को भूलने की असफल कोशिश कर रही थी! अभि उसका पहली नजर का प्यार था जो उसके जेहन में खुशबू सा रच बस गया था..

बुटीक  व्यवसाय के लिए नही था सिर्फ समय बिताने के लिए दर्शना ने खोला था..# पहचान #तो दर्शना बुटीक की मालकिन  राजेश कुमार की पत्नी और दो बच्चों की मां के रूप में समाज में थी … पर अंदर से कितनी खोखली दुखी और सुख दुःख प्रेम सारी भावनाओं से परे अभिशप्त जिंदगी का बोझ उठाए जीवन पथ पर अग्रसर थी..

बस ऐसे हीं दर्शना ना जाने किसके गुनाह की सजा तिल तिल कर काट रही थी.. ना जाने कब तक काटेगी … मां पत्नी और बिजनेस वूमेन की #पहचान #मिलने के बाद भी.

#स्वलिखित सर्वाधिकार सुरक्षित #

Veena singh

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