मेरी गुड़िया – नीलू सुराना : Moral Stories in Hindi

एक दुकान से मन्नू खरीददारी कर रही थी । तभी दुकान के मालिक को 6-7साल के लड़के से कहते सुना।

बेटा तुम्हारे पास गुड़िया खरीदने के पूरे पैसे नहीं हैं। तभी लड़के ने मन्नू की तरफ देखकर पूछा क्या आपको भी लगता है कि मेरे पास पूरे पैसे नहीं हैं।

मन्नू ने पैसे गिनकर कहा,हां बेटा गुड़िया को खरीदने के पूरे पैसे नहीं हैं।तो भी लड़का अपने नन्हे नन्हे हाथों में गुड़िया थामें खड़ा था।

मन्नू से रहा नहीं गया। उसके पास जाकर पूछा, गुड़िया किसे देना है  उसने कहा, गुड़िया मेरी छोटी बहन को बहुत प्यारी है उसके जन्मदिन पर उपहार देना है, पता आपको मैं पहले यह गुड़िया मां को दूंगा फिर वह मेरी बहन को देंगी। यह बोलते हुए उसकी आंखें नम हो गई।

मेरी बहन भगवान घर है। पापा कहते हैं मां भी बहुत जल्द भगवान के घर जाएंगी, इसलिए तो मुझे गुड़िया चाहिए। उसने सब बातें एक सांस में कह डाली। फिर बोला मैंने पापा से कहा है मां को रोककर रखना,मैं गुड़िया लेकर आ रहा हूं,वह बहुत कुछ सुना रहा था मां बहन के बारे में, फिर उदास निगाहों से गुड़िया को देखा।

मन्नू ने कहा चलो बटुए में पैसे गिनते हैं यदि पूरे पैसे होंगे।पर लड़के ने कहा मेरे पास पूरे पैसे नहीं हैं।

बेटा भगवान ने पैसे भेजें है अरे वाह नन्हे लड़के ने कहा भगवान का शुक्रिया, मुझे इतने पैसे देने का मैंने रात में सोने से पहले प्रार्थना की थी मुझे गुड़िया खरीदने के पैसे देना।ताकि मां को दे सकूं और वह बहन को जन्मदिन पर दें वह खुश हो जाएंगी।

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पता है आपको मेरी चार साल की बहन उसी दिन भगवान के पास चली गई थी और मां तब से अस्पताल में है अब वो भी जा रही है।

मन्नू ने पूछा क्या हुआ था।हम चारों घूमने गए थे।घर आते समय गाड़ी वाले ने टक्कर मारी बहन मां की गोदी में थी मां के हाथ से गिरकर गाड़ी के नीचे आ गई और भगवान के पास चली गई तभी से मां कोमा में हैं पता है ना आपको कोमा में वह किसी को नहीं पहचानती मैं उनका लाड़ला बेटा हूं मुझे भी नहीं।

मां चली गई तो मैं क्या करुंगा फिर सोचता हूं मेरे पास तो पापा हैं वो वहां अकेली हैं मां चले जाएंगी तो उसका ख्याल रखेंगी।

मन्नू उस मासूम की बात सुनकर भाव-विभोर हो गई कुछ नहीं कह पाई उस मासूम से

बस यही सोचती रही किसी की ज़रा सी ग़लती दूसरों का जीवन उजाड़ देती हैं।

लेखिका : नीलू सुराना (भोपाल)

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