क्या सच में मायका मां से होता है?-Mukesh kumar

सारिका आज 6  महीने बाद ससुराल से मायके आई हुई थी।  ससुराल में आते ही सारिका सारु बन गई। लग ही नहीं रहा था कि वह ससुराल में जैसे एक जिम्मेदार बहू का रोल अदा कर रही थी वही सारिका है।  यह तो चंचल शोख सारु है जो शादी से पहले हुई करती थी। अपने बड़े भाई के बच्चों के साथ खेलना शुरू कर दी। सारू के पापा बोले सच में इसकी शादी हो गई लेकिन यह  अभी भी बच्ची के बच्ची ही रही।

अगले दिन सुबह के 8 बज गए थे लेकिन सारु अभी भी बिस्तर से सो कर नहीं जगी थी। सारू की मम्मी ने बोला बेटी कितना धूप निकल गया है अब तो उठ जाओ पता नहीं इस लड़की को कितना नींद आता है।  सारू नींद में ही बोली मां सोने दो ना तुमको तो पता ही है कि ससुराल में तो नींद पूरी होती नहीं है। अब तुमने शादी भी किया ऐसे घर जहां पर सास ही नहीं है। शादी के कुछ दिन बाद ही सारे घर की जिम्मेदारियां मुझे ही  मिल गई वहां पर यहाँ जैसा नींद तो कभी पूरा ही नहीं होता था अब यहां तो कुछ देर सो लेने दो। सारू की मम्मी बोली चल उठ जा। मैं तुम्हारी पसंद की बिल्कुल टेस्टी वाली पोहा बनाई हूं।

सारू अब नींद से जाग चुकी थी और मां के जाने के बाद वह सोच रही थी कि सच में शादी के बाद मायके जैसा नींद और मायके वाला खाना कहां सबके किस्मत में होता है।



सारू यानी सारिका को अपने  ननद की चिंता सताने लगी वास्तव में हुआ यह था।  सारिका के शादी से पहले ही उसकी सास गुजर गई थी और शादी होने के बाद सास के नाम पर उसकी बड़ी ननद ममता का प्यार नसीब हुआ।  लेकिन वहभी कब तक मायके मे रहती क्योंकि ममता का भी अपना घर था। सब कुछ निपटा कर कुछ दिनों बाद ही चली गई लेकिन सारिका को हर चीज वह समझा कर गई जैसे एक सास अपनी बहू को समझाती है।

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सारिका सोचने लगी कि मायके का सुख ही अलग सुख होता है लेकिन मेरी ननद को यह सुख नसीब कहां हो रहा है वह तो आज भी अपने भाई के घर आकर काम पर लग जाती हैं उनसे तो कोई सोने और खाने की बारे में भी नहीं पूछता है।  

सारिका ने सोचा कि इस गर्मी की छुट्टियों में जब उसकी ननद ममता उसके घर आएंगी तो वह उनको बिल्कुल ही मायके वाला सुख देगी।  तभी सारिका की मम्मी ने आवाज दी सारिका अब तो उठ जाओ कब से बोली हूं पोहा बनाई हूं वह तो पूरी तरह से ठंडा भी हो जाएगा।

 सारिका जल्दी से फ्रेश होकर अपने पूरे परिवार के साथ नाश्ते के टेबल पर बैठ गई और अपने ससुराल की किस्से कहानियां सुनाती रही और सब हंस-हंस  के इंजॉय करते रहे।

कुछ दिन  मायका में बिताने के बाद फिर सारिका अपने ससुराल चली गई।  सारिका अपने ससुराल पहुचते हीं बिल्कुल ही एक गंभीर और समझदार बहू का रोल अदा कर लिया। ऐसा लग रहा था मायके वाली चंचल शोख सारू है ही नहीं।  क्योंकि यहां पर सारिका को कोई जगाने वाला नहीं था और ना ही कोई नाश्ता बनाकर खिलाने वाला था यहां जो भी करना था अपने खुद से करना था और अपने  अपने पति और ससुर की देखभाल भी खुद ही करना था धीरे-धीरे सारीका बहुत ही समझदार और गंभीर बहू बन गई थी।



गर्मी की छुट्टी होते ही सारिका की बड़ी ननद ममता अपने मायके में आ गई थी।  ममता के आने से सारिका भी बहुत उत्साहित थी क्योंकि वह अपनी बड़ी ननद को वह सब कुछ देना चाहती थी जिसका एक लड़की को अपने मायके से उम्मीद होती है वह चाहती थी कि उसकी सास नहीं है तो क्या लेकिन अपनी ननद को कभी भी इस चीज का एहसास नहीं होने देगी कि मां के जाने से ही इनका मायका खत्म हो गया।  अगर भाई और भाभी सही से प्यार दुलार दे तो एक लड़की का मायका कभी नहीं खत्म हो सकता लेकिन ऐसा बहुत कम होता है।

सारिका की ननद ममता जैसे ही अपने बच्चों और पति के साथ अपने मायके पहुंची सबसे पहले तो  सारिका ने ममता को सत्तू का शरबत पिलाया जो की ममता की सबसे फेवरेट था। सारिका अपने पति विनोद से ममता की पसंद और नापसंद का सारी जानकारी ले ली थी।

शरबत पीते ही ममता बोल पड़ी अरे वाह भाभी! यह तो बिल्कुल मां जैसी टेस्ट आ रही है.  कैसे बनाया आपने और आपको कैसे पता चला कि मुझे सत्तू का शरबत बहुत ही पसंद है। सारिका बोली आपके छोटे भाई ने मुझे बताया था और इस की रेसिपी पापा जी से मैंने पूछा था।  ममता बहुत खुश हुई आज उसे लग रहा था कि उसका मायका फिर से जीवित हो चुका है मां नहीं है तो क्या आज उसकी भाभी मां होने का एहसास दिला रही थी।

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रात के खाने में सारिका ने अपनी ननद के पसंद का ही बासमती के चावल का पुलाव और शाही पनीर बनाए थे।  चावल और शाही पनीर की खुशबू किचन से निकल कर पूरे घर में फैल रहा था। डिनर में सारे घर वालों ने मिलकर चावल और शाही पनीर का खूब स्वाद चखा।  सब ने सारिका की बहुत ही तारीफ की और सब लोगों ने यही कहा कि कहीं से भी नहीं लग रहा है कि यह मम्मी का बनाया हुआ नहीं है।



सारिका के ससुर ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि सारिका के अंदर शकुंतला की आत्मा प्रवेश कर गई हो आज फिर से वह घर जो सुना-सुना था हरा-भरा हो गया है और इस घर में जो रौनक शकुंतला के रहने से होती थी वही रौनक सारिका के आ जाने से हो गई है।  दोस्तों आपको बता दूं कि शकुंतला सारिका के सास का नाम था।

रात को जब सोने का समय हुआ तो अपनी ननद  ममता के पास सारिका एक छोटी सी कटोरी में तेल लेकर बैठ गई और उनके पैरों में  मालिश करने लगी। ममता बोली अरे भाभी यह क्या कर रही हो छोड़ दो मुझे कौन सी थकान हुआ पड़ा है।  

सारिका बोली नहीं दीदी यह तो मेरा हक है।  क्या मम्मी जी जिंदा रहती अगर वह आपको मालिश करती तो क्या आप उन्हें मना करती।  ममता बोली ठीक है कर लो ममता को सच में ऐसा लग रहा था कि जैसे वह किसी सपनों की दुनिया में जी रही हो क्योंकि ऐसा कम ही होता है कि एक मां के जाने के बाद मायका अपना सा लगे।

ममता की मां के गुजरने के बाद पहली बार ऐसा लग रहा था कि उसका मायका फिर से लौट आया है बहुत समय बाद उसे अपने मायके में कुछ फुर्सत के पल मिले हैं नहीं तो वह पहले आती थी तो अपने ससुराल से भी ज्यादा काम यही करती थी क्योंकि पूरा घर इसके भाई और पिता जी से अस्त व्यस्त हो गया होता था।



उसको सही तरीके से करती थी और फिर अपने ससुराल जाती थी लेकिन इस बार जब वह अपने मायके आई तो उसे कुछ भी करने की जरूरत नहीं पड़ी इसको उसकी छोटी भाभी सारिका ने पूरी अच्छी तरह से संभाल लिया था।

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देखते-देखते गर्मी की छुट्टियां समाप्त हो गई और ममता को जाने का समय भी हो गया सारिका को यह बात पता था कि ममता को बंगाल की सिल्क साड़ी बहुत ही पसंद है उसने दिल्ली हाट से जाकर बंगाली सिल्क साड़ी खरीद लाई और वही अपनी ननद को गिफ्ट किया और अपने नाना के बच्चों को भी मॉल से अच्छे वाले ड्रेस खरीद के गिफ्ट दिया।  

जाते-जाते ममता ने सारिका को गले लगाया और खूब रोई जैसे वह अपने मां के गले लग कर रोती थी और बस एक ही बात कही भाभी मुझे तो लग रहा था कि अब मेरा मायका ही  खत्म हो गया है क्योंकि मुझे मायके और ससुराल में कोई अंतर नजर नहीं आ रहा था लेकिन आपने मेरे मायका को फिर से एक नया जन्म दिया है और उम्मीद करती हूं कि ऐसे ही आप बनाए रखेंगी।

सच ही कहा गया है एक बेटी का मायका उसके मां के घर को कहा जाता है लेकिन कुछ दिनों के बाद उसके मां-बाप गुजर जाते हैं और वह मायका उसके भैया और भाभी का घर बन जाता है लेकिन अगर वह भी चाहे तो उस बेटी के मायके को जिंदा रख सकते हैं इसके लिए आपको बहुत कुछ नहीं देना होता है बस थोड़ा सा प्यार और छोटा सा गिफ्ट इसी में एक बेटी खुश हो जाती है।  एक बेटी के लिए अपना मायका ही एक ऐसा घर होता है जहां वह अपने सुख-दुख सब कुछ शेयर कर सकती है इसीलिए एक बेटी का मायका कभी न छीने।

क्या सच में मायका मां से होता है? अपना अनुभव कमेन्ट कर के जरूर बताएं।

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