दिल्ली के आदर्श नगर के एक मोहल्ले में आज बहुत हलचल थी क्योंकि उसे मोहल्ले के एक घर में रहने वाली सितारा, जो की पांच भाई बहनों में सबसे छोटी थी,वह विवाह के तीन वर्ष बाद ही विधवा हो गई थी।
उसके पति केशव का हार्ट फेल हो गया था। सितारा की उम्र का अभी केवल 24 वर्ष की थी। 21 वर्ष में उसकी शादी हुई थी 1 साल का बेटा भी था राहुल। वैसे तो वह साधारण शक्ल सूरत की थी पर घर वालों के अनुसार सबसे सुंदर और गुणवान घर में वही थी। सितारा भी अब यह सब सुन सुन कर खुद को सच में स्टार समझने लगी थी। इसी कारण मुंह फट और कड़वी जुबान थी उसकी। उसकी मां के डर से कोई सामने से कुछ नहीं कहता था पर पीठ पीछे सब उसे बदतमीज़ कहते थे।
किसी का अपमान करना, हंसी उड़ाना उसकी आदत में शामिल था। सबको सुना कर कहती थी मैं तो साफ-साफ बोलती हूं किसी को भला लगे या बुरा।
अब उसे कौन यह समझे कि बोलना सबको आता है लेकिन बड़ों का लिहाज और संस्कार भी कोई चीज होती है।
खैर, घर वालों के हिसाब से वह गुणों की खान थी। पर ससुराल में उसके गुण धरे के धरे रह गए, सास ऐसी कि तू डाल डाल तो मैं पात पात। अब तो पति गुजर गया। सास ने बोला मेरा पोता दे मुझे और तू निकल यहां से।
किसी तरह पुलिस बुलाकर,लाखों जतन करके, बच्चे को लेकर मायके आ गई। मायके वालों ने इसका भरपूर साथ दिया और अपना घर उसे रहने के लिए दे दिया, यह घर वह लोग बेचना चाहते थे पर बेचा नहीं और अपनी सितारा को दे दिया। अब ऐसे मुश्किल समय में सब भाई बहनों ने इसका साथ दिया।
इसने भी सिलाई करनी शुरू कर दी। दोनों बहने और दोनों भाभियों जानबूझकर इसी से कपड़े सिलवाते और बहाने से कुछ ज्यादा ही पैसे इस दे जाते।
कभी कोई बहन दालें चावल और आटा दे जाती कभी भाई त्यौहार के बहाने रुपए दे जाता और माँ भी मदद करती रहती थी। कभी दोनों में से कोई भाभी अपना सूट लाती तो इसका भी खरीद कर ले आती।
एक बार बड़ी भाभी ने इसको एक सूट दिया तो सितारा उसे देखकर बोली, ” आपको जब खरीदना नहीं आता तो खरीदनी क्यों हो, कलर और कपड़ा दोनों बेकार है। ”
बड़ी भाभी को बहुत दुख हुआ।कहने को तो यही बात दूसरे शब्दों में भी कहीं जा सकती थी। तब उसकी सास यानी कि सितारा की मां ने बहू से कहा, ” बड़ी बहू बुरा मत मानो इसकी बात का, बेचारी विधवा है, अपना गुस्सा अपनों पर नहीं तो किस पर निकालेगी, सब कुछ तो छिन गया ।। ” सब लोगों को यही बात सुननी पड़ती थी कि बेचारी विधवा है
एक बार इसके लिए एक रिश्ता आया। सब ने कहा उम्र छोटी है दूसरा विवाह कर लो। सितारा बोली, ” शादी करके दूसरों के बच्चों की नौकरानी बनूं, इससे अच्छा तो है मैं अपने बच्चे को पालूं। ”
. एक बार बीच वाली बहन सब्जियां लेने बाजार गई तो इसके लिए भी दो थैली भरकर सब्जियां ले आई, थोड़ी देर बाद एक पड़ोसन आई और बोली अरे इतनी सारी सब्जियां, चलो अच्छा है वैसे भी आजकल सब्जी है बहुत महंगी।
सितारा बोली, ” दे गई तो कौन सा एहसान कर दिया, मैंने खाना भी तो खिलाया उसे, और वैसे भी मुझसे बड़ी है। ”
आख़िर ऐसे कब तक चलेगा….. – रश्मि प्रकाश : Moral Stories in Hindi
पड़ोसन ने सारी बात उसकी बहन तक पहुंचा दी, बहन को बहुत दुख हुआ। इसी तरह अपनी कड़वी बातों से वह सब का दिल दुखाती रहती थी।
अब राहुल बड़ा हो गया था तो छोटे भाई ने एक अच्छे नामी स्कूल में बिना किसी डोनेशन के उसका एडमिशन करवा दिया तब भी सितारा ने यही कहा कि “कौन सा एहसान कर दिया मुझ पर। ”
एक बार होली के त्योहार पर सभी औरतें मिलकर रसोई में खाना बना रही थी तभी सितारा आई और बड़ी भाभी के बालों को पकड़ कर बोली” यह कैसा जूड़ा बनाया है जूड़ा है या चिड़िया का घोंसला।”
सब लोग जोर-जोर से हंसने लगे लेकिन अपने सबके सामने हुए अपमान पर बड़ी भाभी की आंखें भर आई और उसे छोटी भाभी ने महसूस किया था।
किसी का भी अपमान करने के बाद वह इसी तरह बच जाती थी कि बेचारी विधवा है, बेचारी डिप्रेशन में आ गई है, तुम इसकी बातों को चुपचाप सहन कर लो पर इससे कुछ मत कहना।
धीरे-धीरे साल दर साल बीतने लगे और उसकी ज़ुबान कड़वी होती जा रही थी। सब रिश्तेदार और भाई बहने दूर होते जा रहे थे राहुल जवान हो चुका था और उसने कमाना शुरू कर दिया था।
आज राहुल की शादी थी। सभी मेहमान आए हुए थे, शादी सुखपूर्वक संपन्न हुई। शादी के कुछ दिन बाद उसकी दोनों बड़ी बहनों ने सोचा चलो अपनी बहन से भी मिल लेते हैं और नहीं बहू से भी मिलकर आते हैं।
दोनों सितारा के घर पहुंची सितारा ने उनसे ना तो हाल-चाल पूछ और ना ही चाय पानी।
सीधा बोली-” क्यों आई हो यहां? ”
बहनें-” मिलने आए हैं तुझ से और बहू से। ”
सितारा कोई जवाब दिए बिना उठकर अंदर गई और दो छोटे लाल रंग के पर्स अपनी बहनों के मुंह पर फेंक कर बोली, ” मैं तुम्हारे दो और तुम्हारे तीन बच्चों की शादी में इतना भर भर कर शगुन दिया और तुमने मेरे इकलौती बेटे की शादी में यह छोटे-छोटे उपहार दिए हैं, शर्म नहीं आई, उठाओ इन्हें और जो यहां से और उसने जोर-जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया दोनों बहनों ने उनसे समझाने की कोशिश की। तो चीख कर बोली, चली जाओ यहां से, मेरे दोनों भाई भी मेरे लिए मर चुके हैं। तुम भी मर जाओ मेरी बला से। ”
दोनों बहने यह सुनकर सकते में आ गई क्योंकि हर बहन अपने भाई की लंबी उम्र की कामना करती है।
दोनों बहने आंखों में आंसू लिए उसके घर से चली गई और बाहर एक दुकानदार से पानी की ठंडी बोतल खरीद कर, पार्क में बैठकर पानी पीने लगी।
दोनों उसके कड़वे बोलों से और लेनदेन की इतनी छोटी बात को लेकर लड़ने से आहत थी। उन्हें इस बात का बेहद दुख हो रहा था कि यह सब कुछ भूल चुकी है। इसके मुश्किल दिनों में हर तरह से इसकी मदद करना राहुल को जानबूझकर हर त्यौहार पर पैसे देना, कपड़े दिलवाना, अपने साथ घूमाना सब कुछ भाइयों और बहनों ने ही किया था।
उसकी कड़वी जुबान आज नफरत की दुकान बन गई थी और उनके बीच नफरत की दीवार खड़ी हो गई थी।
आज अचानक सितारा के गुजर जाने की खबर से सबको बहुत दुख था पर किसी की आंख में आंसू नहीं थे।
इसलिए दोस्तों, अपने व्यवहार को ऐसा रखना चाहिए कि किरदार महकने लगे और परदा गिरने के बाद भी तालियां बजती रहें।
अप्रकाशित स्वरचित गीता वाधवानी दिल्ली