मेरे साथ जो हुआ तुम्हारे साथ नहीं होगा – के कामेश्वरी : Moral stories in hindi

जगन्नाथ बैठक में बैठकर टी वी देख रहे थे । विनीता रसोई में अपना काम ख़त्म करके बैठक में आकर पति की बगल में बैठती है। एक सप्ताह पहले ही जगन्नाथ को अस्पताल से लेकर आए थे ।

एक सप्ताह पहले उन्हें ऑफिस से आते समय रास्ते में ही माइल्ड हार्ट अटैक आया था । उनके साथ ही उनका एक दोस्त रंगनाथ भी रोज आते थे इसलिए जल्दी से उन्होंने जगन्नाथ को अस्पताल लेकर गए थे। विनीता को जब खबर मिली तो वह भागकर अस्पताल पहुँच गई थी ।

जगन्नाथ और विजया के दो बेटे थे । बड़ा बेटा लक्ष्य और छोटा बेटा दक्ष दोनों ही अपने अपने परिवार के साथ पूना में रहते थे । दोनों बेटे और बहुएँ अच्छी कंपनियों में नौकरी करते थे ।

पिता को अस्पताल में भर्ती कराया गया है सुनकर दोनों भागते हुए आए थे । जब आपरेशन का समय आया तो दोनों ने पचास हज़ार देकर कहा कि इससे ज़्यादा हम नहीं दे सकते हैं ।

जगन्नाथ अगले महीने ही रिटायर होने वाले थे इसलिए उनके दोस्त ने किसी से पैसे लेकर उनका आपरेशन कराया था । पिता का ऑपरेशन होते ही दोनों वापस चले गए । जगन्नाथ को डिस्चार्ज करते तक भी नहीं रुके ।

जगन्नाथ महीने के आख़िर में रिटायर हो गए थे उन्होंने दोस्त को आपरेशन पर खर्च किए गए पैसे भी चुकता कर दिया था । उनका खुद का मकान था तो दोनों ही इतने बड़े घर में अकेले रहना क्यों सोचकर एक पोर्शन किराए पर दे दिया था ।

उस दिन जगन्नाथ ने विनीता से कहा कि तैयार रहना मैं तुम्हें आकर ले चलता हूँ । विजया तैयार बैठी थी कि जगन्नाथ उसे बैंक लेकर गए और कुछ जगहों पर हस्ताक्षर कराए । जब उसने पूछना चाहा तो घर जाकर बताऊँगा कहकर टाल दिया । दूसरे दिन उन्होंने विनीता को पास बिठाकर बताया था कि शहर से दूर जो जगह हमने ख़रीदा था उसे मैंने बेच दिया है । उसकी अच्छी रेट आई है । चालीस लाख आया तो तीस लाख मैंने हम दोनों के जाइंट अकाउंट में जमा कर दिया है ।

दस लाख मैंने अलग से हमारे एमरजेंसी फंड में जमा कर दिया है । मेरे साथ जो हुआ वह तुम्हारे साथ नहीं होगा विनीता मैं तुम्हें बच्चों के सामने हाथ फैलाने का मौक़ा नहीं दूँगा ।

विनीता को आश्चर्य हुआ कि आपके साथ क्या हुआ और मेरे साथ क्या नहीं होगा ।

देखो विनीता जब मैं अस्पताल में भर्ती था तब बच्चों ने थोड़े से पैसे देकर कहा कि हमारे पास इतना ही है । यह तो अच्छा हुआ था कि मेरे रिटायरमेंट बेनिफिट्स आने वाले थे तो हमने किसी से पैसे माँग लिया था क्योंकि हम लौटा देंगे । तुम्हारे लिए ज़रूरत पड़ी तो हम कहाँ जाएँगे इसलिए मैंने पैसे बचाकर रखा है कि तुम्हारे साथ ऐसा नहीं होगा ।

विनीता ने कहा कि बच्चे क्या सोचेंगे आपने उन्हें बताया तो है ना कि ज़मीन बेच दी है।

हाँ विनीता मैंने उन्हें बता दिया है । उसने पूछा क्या कहा है दोनों ने?

बड़े बेटे ने कहा कि और एक दो साल रुकते तो पचास लाख तो आ ही जाते थे । आपने जल्दबाज़ी कर दी है । मैंने तो सोचा था कि मेरी बेटी की शादी के समय वह ज़मीन काम आ जाएगी परंतु आपने तो उसे अभी ही बेच दिया है ।

छोटा बेटे ने कहा कि मेरा बेटा मेडिसिन पढ़ना चाह रहा है तो मैंने सोचा कि उसके एडमिशन के लिए काम आ जाएगा ।

सबकी अपनी अपनी राय है विनीता हमारे बारे में किसी को कोई फ़िक्र नहीं है । हमने भी तो बचपन में अपनी ख्वाहिशों को पूरा न करके उन्हें पढ़ाया लिखाया और काबिल बनाया है । आज हम दोनों को अपनी छोटी सी छोटी ख्वाहिश पूरा करने के लिए भी उनके सामने हाथ फैलाना पड़ रहा है ।

तुम्हें याद है पिछले महीने हमारे साथ वाकिंग पर आने वाले सब दोस्त द्वारका जा रहे थे उन्होंने हमें भी बुलाया था कि आपकी ज़िम्मेदारियाँ तो ख़त्म हो गई हैं आप दोनों आराम से घूम फिर सकते हैं हमारे साथ चलिए ।

तुम्हारी काफ़ी इच्छा थी जाने की पर क्या फ़ायदा तुम्हारे बच्चों ने यह कहकर मना कर दिया था कि पैसों की बर्बादी के सिवा और कुछ नहीं है । इस उम्र में घर में बैठकर भजन कीर्तन करना है और आप दोनों घूमने जाना चाहते हैं ।  हमारे पास आप दोनों को देने के लिए तीस हज़ार रुपये नहीं हैं ।

विनीता ने कहा कि आप उनके बारे में गलत मत सोचिए । उनके अपने बच्चे और ज़िम्मेदारियाँ भी तो हैं इसलिए उन्होंने ऐसा मना किया होगा। विनीता हमने तो बचपन में उनकी हर ख्वाहिशें पूरी की थी । तुम्हें याद है जब दक्ष को स्कूल की तरफ़ से मनाली ले जा रहे थे तो उसने कितनी जिद की थी और हमने पैसे ना होने के कारण तुम्हारी चैन बेच दिया था । विनीता ने कहा कि जाने दीजिए हमने अपना फ़र्ज़ निभाया है ।

इसलिए विनीता मैंने इन सारी बातों को ध्यान में रखा और उस ज़मीन को बेच कर यह काम किया है ताकि आगे हमें उनसे पैसे माँगने की ज़रूरत ना पड़े ।

विनीता हम अभी तो दोनों हैं आराम से हैं कल को हम में से कोई एक भी ना रहे तो कैसे होगा सोच । मैं तेरी ही बात मान लेता हूँ कि अचानक उनके पास पैसे कहाँ से आएँगे । उनको तकलीफ़ ना देते हुए उन्हें पैसों की तंगी ना हो और हमें बच्चों के आगे हाथ फैलाने की नौबत ना हो इसके लिए ही मेरी सारी कोशिशें हैं ।

अब तो तुम्हें मेरी बात समझ में आ गई होगी ना । चल अब सुकून की नींद सो जाते हैं। कहते हुए जगन्नाथ ने आँखें मूँद लीं ।

दोस्तों हमें आगे अपने भविष्य के बारे में भी सोचना चाहिए इस तरह का इंतज़ाम करें कि बच्चों पर बोझ नहीं बन सके ।

के कामेश्वरी

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