जिम्मेदारी उठाएगा कौन? – रश्मि प्रकाश  : Moral Stories in Hindi

पूरे दिन मैं घर और ऑफिस के काम में लगी रहती हूँ… तुम्हारा क्या है.. रात को घर आओगे खाना खाओगे कुछ देर टीवी देख कर सो जाओगे, सुबह बिस्तर पर  चाय मिल ही जाता है नाश्ता किया निकल गए। मुझे अपने साथ साथ अंश के लिए भी सोचना पड़ता है और अब ये जिम्मेदारी उठाने की हिम्मत मुझे नही है। घर ऑफिस और अब दो बच्चे.. मुझसे नहीं होगा.. मैं जाकर डॉक्टर से मिलूंगी और एबॉर्शन की बात कर लूँगी …कहकर अपने बच्चे को दूर करने वाली जूही आज उसी बच्चे को अपना दूध पिलाते हुए बड़े प्यार से अपने दुधमुंहे आदि को देखकर सुकून महसूस कर रही थी।

आज भी वो उस दिन को याद कर के सिहर उठती है जब उसको सुबह सुबह यह पता चला कि… वो अपने अतीत में खो जाती हैं..

‘‘निखिल, जल्दी उठो !!’’घबराये हुए स्वर में जूही अपने पति को हड़बड़ाते हुए उठा रही थी

‘‘ क्या हुआ जूही? थोड़ी देर और सोने दो ना.. फिर तो पूरे दिन बस काम काम ही रहेगा।‘‘ कहते हुए निखिल दूसरी तरफ मुंह करके सोने लगा

झुंझलाते हुए जूही बोली,‘‘ हाँ तुमको क्या है सोते रहो आराम से, मुसीबत तो मेरे सिर पर आई है तुम्हारा क्या है.. बोल रही थी उस दिन ही मुझे दवा लाकर दे दो पता नही तुमने ध्यान नहीं दिया और मैं भी काम के चक्कर में दवाई लेना भूल गई अब मुझे ही भुगतना पड़ेगा…. कान खोल कर सुन लो मैं यह जिम्मेदारी नही उठाने वाली हूँ… मैं आज ही जाकर डॉक्टर से मिलूँगी और एबॉर्शन करवाऊँगी….. ये मेरा आख़िरी फ़ैसला है।”

हड़बड़ाते हुए निखिल उठा और आँखे मलते हुए बोला,‘‘ तुम सच कह रही हो??? इसमें इतना परेशान क्यों हो रही हो यार। मिल कर उठा लेंगे ना जिम्मेदारी चिन्ता क्यों करती हो।’’ निखिल जूही को शांत करते हुए बोला

‘‘ तुम समझ क्यों नहीं रहे? मैं इस जिम्मेदारी को कतई उठाने की स्थिति में नहीं हूँ….फिर मेरी जॉब का क्या होगा? बहुत मुश्किल होगा निखिल….आज ही हम डॉक्टर से मिलेंगे और मैं इस जिम्मेदारी से छुटकारा पा लूंगी।”‘खीझते हुए बोलकर जूही कमरे से चली गई

कुछ देर बाद सासू माँ रमा देवी जब उठी तो …जूही निखिल और सास को चाय देकर चुपचाप बैठ गई।

‘‘ क्या बात है सुबह सुबह तुम दोनों का चेहरा क्यों लटका हुआ है? फिर झगड़ा हुआ है क्या?‘‘ सास घबराते हुए पूछी

‘‘ माँ, जूही प्रेगनेंट हैं…‘‘ निखिल बात पूरी भी नहीं किया की रमा देवी बोल उठी,‘‘ ये तो बहुत खुशी की बात है फिर दोनों चेहरा क्यों लटका के बैठे हो?”

‘‘ मुझसे ये जिम्मेदारी नही उठाई जाएगी मम्मी जी!! मैं ऑफिस और बच्चे दोनों नही संभाल सकती।‘‘जूही ने कहा

‘‘ जैसे कि पहला बच्चा तुमने संभाल लिया था? उसकी जिम्मेदारी कितनी उठाई वो तो हमें पता ही है।”रमा देवी थोड़े तीखे स्वर में बोली

‘‘ इसलिए ही तो मम्मी जी नहीं करना चाहती दूसरा बच्चा।पहला अभी तीन साल का ही है। मेरी नौकरी की वजह से उसको भी आपके पास छोड़ कर जाना पड़ता था। कभी कभी तो मुझे कितने दिन बाहर रहना पड़ता था। अंश तो बमुश्किल दो महीने ही मेरा दूध पी पाया है….बोतल के दूध पर वो पला बढ़ा।घर की आर्थिक स्थिति सही बनी रहे इसलिए मैं नौकरी भी नहीं छोड़ पाई,उपर से आप की देखभाल की जगह अंश की जिम्मेदारी आप पर डाल दी।अब अगर ये बच्चा आ भी गया तो… कैसे सब कुछ संभव हो पाएगा?? निखिल तो थोड़ी देर भी नहीं संभालना चाहता…. आप पर दो बच्चों का बोझ नहीं डाल सकती हूँ….बस आज शाम को ऑफिस से आते वक्त मैं डॉक्टर से मिलकर आऊंगी।’’ जूही अपनी बात तटस्थ होकर बोल कर रसोई में नाश्ते और टिफिन की तैयारी करने चल दी

निखिल और रमा देवी चाहते थे कि दो बच्चे हो तो अच्छा रहेगा पर जूही तो टस से मस नहीं हो रही थी ऐसा लग रहा था अब उसके आख़िरी फ़ैसले को कोई रोक नहीं सकता और फिर एक माँ ही समझ सकती है कैसे उसे अपने बच्चे की परवरिश करनी होगी ।

उसकी बात भी अपनी जगह सही थी कि रमा देवी उसके ऑफिस जाने के बाद कैसे दो बच्चों को संभाल सकेंगी।

सबने जूही के इस फैसले पर  हथियार डाल दिया।

निखिल की एक बड़ी बहन है  राशि जिससे जूही की खूब बनती थी वो सोचा एक बार दीदी को भी बता देता हूँ क्या पता वो जूही को समझा सकें।

सोचते हुए उसने राशि को फोन कर दिया,‘‘ नमस्ते दीदी, देखो ना जूही प्रेगनेंट हैं पर वो उस बच्चे को रखने को तैयार नहीं है.. मैं और मम्मी तो चाहते हैं आने दो पर वो अपनी बात पर टिकी हुई है….आप एक बार बात कर के देखो शायद आपकी बात मान जाए?”

“ अरे ये तो बहुत अच्छी खबर है …घर में दो बच्चे रहते हैं तो उन्हें अकेलापन नहीं लगता वो खुद आपस में एक दोस्त होते हैं वैसे उसकी बात भी सही है पर मैं ये भी जानती हूँ तुम्हारी बहुत इच्छा है एक और बच्चा आ जाए पर भाई तुम्हें उसकी मदद करनी होगी अगर वो अपना फ़ैसला बदलने को तैयार हो गई तो… नहीं तो वो परेशान होकर रह जाएगी और बच्चे को प्यार भी नहीं कर पाएगी अगर वो सब के दबाव में बच्चा कर लेगी … फिर भी एक कोशिश करती हूँ ।”कहकर राशि ने फोन काट दिया और कुछ देर सोचने के बाद जूही को फोन कर दी

राशि ने जूही से बात की और समझाया,‘‘ जूही देखो ये पूरा फैसला तुम्हारा है पर ये बात याद रखना कही बाद में पछताना ना पड़े.. तुम्हारी एक सहेली के भी दो बच्चे हैं ना, वो भी जॉब करती वो कैसे मैनेज करती हैं पता करो और उससे बात भी करना। हड़बड़ी में गड़बड़ी मत कर लेना.. पता चला अभी नही तो जब चाहो तो हो भी नहीं.. इसलिए इत्मीनान से सोच कर कदम उठाना।’’ कहकर राशि ने फोन रख दिया था

जूही की समझ में नहीं आया क्या करें क्या ना करें….उसने अपनी सहेली से बात की उसने भी वही सब कहा जो राशि ने कहा था हाँ इतना जरूर कहा कि ,‘‘जॉब के साथ दिक्कत तो होगी पर तुम्हारा साथ सास पहले भी दे रही थी अभी भी देंगी ये तुम्हारा सबसे बड़ा सहारा है। बाक़ी तुम खुद समझदार हो, बच्चा तुम्हारे अंदर है तुमको ही सब सोचना होगा।’’

ऑफिस में जूही बस पूरे दिन इसी दुविधा में रही की क्या करूँ?…पर अंत में उसने बहुत सोच समझकर कर डॉक्टर से मिलने का फैसला लिया।

डॉक्टर से मिलकर वो जब घर आई तो रमा देवी जूही से नाराज़ नजर आ रही थी। जूही भी बिना कुछ बोले अपने कमरे में गई मुँह हाथ धोकर , शाम की दीया बती कर,चाय बनाई और सास को देने गई।

रमा देवी बिना कुछ बोले अंश के साथ व्यस्त रही।

रात को जब निखिल आया तो उसका भी मूड खराब ही था। सबको पता था जूही डॉक्टर से मिलकर आई ही होगी।

‘‘ तो कब जाना है तुमको अस्पताल? ’’ निखिल चिढ़े स्वर में बोला

‘‘ कल तुम्हें भी साथ चलना होगा डॉक्टर ने पति को भी लेकर आने कहा है।’’ जूही सहज रूप से बोलकर जाने लगी

‘‘ सुनो ये एबॉर्शन का फैसला तुम्हारा है ना तो तुम्हें जो करना वो तुम करो।’’ निखिल उदास होकर बोला

‘‘ वाह जब सब हुआ तो भी मेरे अकेले से ही हुआ क्या? क्यों नहीं चलोगे तुम?? जब हम दोनों ने ये किया तो जाना भी साथ ही पड़ेगा।‘‘ जूही तेज़ स्वर में बोली

‘‘ जूही एक बार और सोच लो.. लोग तरसते रहते हैं बच्चे के लिए….भगवान ने वक्त रहते दूसरी बार भी झोली भरी है तो आने दो इसको.. तीसरा चौथा होता तो मैं भी कुछ नहीं कहती।’’ रमा देवी जूही को समझाते हुए बोली

‘‘ मम्मी जी आप तो सब समझ रही है पर आपका बेटा?? वो भी थोड़ी जिम्मेदारी उठाने को तैयार हो जाता तो मैं  ऐसा निर्णय कभी नहीं लेती।‘‘ जूही निखिल को देखते हुए बोली

‘‘ अच्छा बस इतनी सी बात के लिए तुम मेरे बच्चे को आने नहीं देना चाहती हो?? अगर ऐसा है तो मैं प्रॉमिस करता हूं इसकी आधी जिम्मेदारी उठाने को तैयार हूँ.!! ’’निखिल उम्मीद की नजर से जूही को देखकर बोला

‘‘ सच कह रहे हो!! आश्चर्य से जूही निखिल को देखते हुए बोली

‘‘हाँ बाबा सच ‘‘ निखिल ने कहा

‘‘ इसलिए ही तो बोल रही हूं कल डॉक्टर ने हम दोनों को साथ बुलाया है.. मैं तो पहले से ही इसको जन्म देने का निर्णय ले चुकी थी बस देखना था इस बार भी जिम्मेदारी से भागते हो और उठाने को तैयार हो।’’ जूही की बात सुनते सबके चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई

 पूरे आठ महीने जूही ऑफिस जाती रही सबकुछ ठीक से चल रहा था। इसी बीच कोरोनावायरस के प्रकोप से सब बंद हो गया।

जूही भी वर्क फ्राम होम करने लगी। इसी बीच उसने दूसरे बेटे को जन्म दिया। जिस जॉब की वजह से वो बच्चे की जिम्मेदारी से डर रही थी , कोविड की वजह से उसको सबसे ज्यादा वक्त बच्चे के साथ बिताने को मिल गया। 

तभी आदि के रोने की आवाज से उसकी यादों का सिलसिला टूट गया। अपने बेटे को देख छाती से चिपका कर बोली,‘‘ तेरी जिम्मेदारी से भाग रही थी और देख कोविड में सबसे ज्यादा तेरी जिम्मेदारी उठा कर माँ बनने का सही सुख तुझसे ही मिल पाया।’’

सच में आजकल जॉब और घर की चक्की में पीस कर लड़के लड़कियां बच्चे या तो करना ही नहीं चाहते या फिर एक के बाद दूसरा नहीं। पर जिसको आना होता है वो आ ही जाता है.. जैसा जूही के साथ हुआ। पहले बच्चे को वो ना तो वक्त दे पाई ना अपना दूध पिला पाई। पहले बच्चे की बहुत सारी बातों से वो अनजान ही रह गयी थी क्योंकि उसे बच्चे को छोड़ कर दूसरी जगह भी जाना पड़ता था। बच्चा दादी और पापा के साथ बढ़ने लगा था पर अब दूसरे बच्चे के साथ वो पूरा वक्त गुजार पा रही थी और अपने निर्णय पर खुश भी थी।

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धन्यवाद 

रश्मि प्रकाश 

# आख़िरी फ़ैसला

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