उस दिन वातावरण पर अंधेरा उतरने के बाद शनि के घर में प्रवेश करते ही उसकी धर्मपत्नी रीतिका ने अपनी आंँखें लाल-पीला करते हुए उसको खरी-खोटी सुनाते हुए कहा कि घर में सबेरे( अंधेरा होने से पहले) आकर वह क्या करेगा?.. दफ्तर में नई खूबसूरत स्टाफ आई है और उसकी सुन्दरता के जाल में उसका मन ऐसा उलझ गया है कि उसको अपने घर और घरवाली से क्या मतलब? उसको अच्छा थोड़े ही लगेगी अब वह आदि-आदि।
जिस दिन से ऑफ़िसियली सूचना देने के बहाने शनि के पीठ पीछे दफ्तर के चपरासी द्वारा बाबू से नहीं बताने की शर्त पर रीतिका को जानकारी मिली थी कि छुट्टी के बाद शनि बाबू विनी मैम के साथ बाइक पर सवार होकर इधर-उधर जाते हैं। उस दिन से रीतिका के गुस्से का पारा आसमान पर रहने लगा।
उसका व्यवहार अपने पति के प्रति दिनो-दिन कठोर होता गया। किसी न किसी बहाने की आड़ में तानों-उलाहनों की सौगात दफ्तर से लौटने के बाद देने लगी। कभी कहती कि उसकी छुट्टी के लिए स्पेशल नियम बना है, इसी वजह से सूर्यास्त के बाद घर आते हैं, कभी कहती कि ऑफ़िस में काम करने वाली महिलाओं में मन रम गया है इत्यादि-इत्यादि।
अपनी पत्नी द्वारा लगाए गए लांछनाओं पर सफाई देते हुए, उसे समझाने का भरपूर प्रयास करता वह कि सरकार पैसे देती है काम करने के लिए।बाॅस के द्वारा जो आर्डर और निर्देश मिलता है, उसके अनुसार कार्य पूरा करना पड़ता है, उसके बाद ही न वह घर आएगा।
उस दिन भी उसके आरोपों का उत्तर तल्ख आवाज में देते हुए उसने कहा, ” जो मन में आता है ऊलजलूल बके जा रही हो.. स्टाफ में जो महिला और पुरुष काम करते हैं, सभी की इज्जत है, गरिमा है, उनका अपना वजूद है.. सभी में समानता का भाव है.. आपस में कोई भेदभाव नहीं है।.. जरूर किसी बददिमागी ने तुम्हारा कान भर दिया है।.. किसी पर बिना सोचे-समझे कीचड़ उछालना अच्छी बात नहीं होती है।”
” मैं नहीं जानती थी कि इतना कहने मात्र से आपको इतनी पीड़ा पहुंँचेगी ।.. मालूम पड़ता है सचमुच उसके साथ आपकी बहुत अधिक घनिष्ठता कायम हो गई है।.. तब न हम आपको फूटी आंँखों नहीं भा रहे हैं!.. बिलकुल सही खबर मिली है ” व्यग्रता के साथ उसने कहा।
शनि ने कड़कती आवाज में कहा,” किसी ने मेरे बारे में जो कुछ कहा है वह सरासर झूठ है.. बकवास है.. किसी स्त्री-पुरुष के बीच सिर्फ प्रेमी-प्रेमिका का ही रिश्ता नहीं होता है, भाई-बहन का भी होता है, दोस्त का भी होता है, अंकल-आंटी का भी होता है।.. गलत सोचने वालों के दिमाग में गंदगी भरी होती है। “
कुछ पल ठहरकर उसने पुनः कहा,” मुझे समझ में आ गया कि तुम अप्रत्यक्ष रूप से विनी के बारे में कह रही हो.. तुमको शायद पता नहीं है कि वह एक बेसहारा विधवा है, जो बदली होकर यहाँ आई है। उसके लिए डेरा खोजना और अन्य जरूरी कार्यों में सहयोग प्रदान करना, हर सहकर्मी का फर्ज बनता है।”
सच्चाई से रू-ब-रू होते ही उसकी धर्मपत्नी के दिल के मैल धुल गए।
स्वरचित, मौलिक एवं अप्रकाशित
मुकुन्द लाल
हजारीबाग(झारखंड)
17-01-2025
बेटियाँ(लघुकथा) मुहावरा प्रतियोगिता
# फूटी आंँखों न भाना