एक माफी मांग लेने से यदि रिश्ते बच रहे हैं तो बचा लीजिए – मंजू ओमर : Moral Stories in Hindi

ये क्या बहू आज फिर से तुमने राजमा बना दिया अभी परसों ही तो बनाया था , मुझसे हजम नहीं होता पेट भारी भारी हो जाता है बहुत गरिष्ठ होता है मेरा पेट साफ नहीं होता है ‌। नहीं आज फिर से राजमा नहीं बनाया है परसों का ही है बच गया था तो क्या फेंकूंगी क्या वही दिया है खाने को अभी खाना बनने में देर है

तो दे दिया।बेटा मेरे लिए थोड़ी सी लौकी बना देती तो अच्छा था , अच्छा अब सबके लिए मैं अलग-अलग खाना बनाऊंगी क्या और कोई काम नहीं है मेरे पास।जो मिल रहा है  वो चुपचाप खाले इसी में

भलाई है नहीं तो औरों के घर जाकर देखें सास ससुर का क्या हाल कर रखा है बहुओं ने एक रोटी भी नसीब नहीं हो रही है खाने को। फिर विमला जी एक रोटी राजमा थोड़ा थोड़ा लगाकर खाकर लेट गई । कुछ याद करके उनकी आंखों के कोरे नमः हो गए।

           क्या दिन थे जब सत्यनारायण जी विमला जी के पति जिंदा थे ।खाने पीने के बहुत शौकीन थे बासी खाना तो बिल्कुल भी न खाते थे और‌ न विमला को खाने देते थे । विमला से बोलते थे थोड़ा बनाओ खाना जिससे बचे न हम नहीं खाते बासी तो तुमको भी खाने की जरूरत नहीं है ।दोपहर के खाने में दाल चावल रोटी सब्जी बननी है

छोटी सी सलाह – स्मृति गुप्ता : Moral Stories in Hindi

और चटनी जरूर बनती थी हर सीजन में अलग-अलग । जाड़े है तो टमाटर धनिया की और गर्मी है तो कच्चे आम की और फिर कोई न कोई चीज मिल ही जाती थी चटनी बनाने का जब इन सबका सीजन नहीं होता था तो । अचार वो बिल्कुल भी नहीं खाते थे और मुझे भी अचार नहीं पसंद था । मेरे गले में जलन होने लगती थी।

और जबसे पति का देहांत हुआ है सबकुछ बहू के कब्जे में आ गया है उसे मालूम है कि अचार मुझे पसंद नहीं था  तब भी रात का पराठा अचार के ही साथ दे देती है ।कितनी बार कहा कि बहू थोड़ी चटनी बना लिया करो उसी से पराठा खा लूंगी तो तपाक से नयना बहू जवाब दे देती है अब आपको लिए चटनी बनाती

फिरूं इतना समय नहीं है मेरे पास तो लाओ मैं बना देती हूं आखिर अभी तक तो सब करती ही रही हूं न विमला जी बोली। नहीं नहीं अब आप रहने दीजिए रसोई में जाने को ।बाहर का कोई काम तो होता नहीं है चटनी बनाने चली जाएंगी।

             आज सुबह विमला जी के सिर में बहुत दर्द था वो आज उठी ही नहीं लेटी रही ‌‌

नाश्ते की टेबल पर विकास नयना से बोला आज मम्मी नहीं उठी अभी तक , पता नहीं कहकर नयना ने बात टाल दी   । नाश्ता करके विकास कमरे में गया और मां मां आवाज लगाई विमला जी उठ बैठी क्या बात है मां आज आप अभी तक लेटी है , कुछ नहीं बेटा थोड़ा सिर में दर्द था ।अच्छा मैं नयना से बोलता हूं चाय बना दे ,

अरे नहीं क्यों परेशान कर रहे हो उसे काम में लगी होगी जब फुर्सत होगी तो बना देगी ।अरे नहीं चाय बनाने में कितनी देर लगती है । विकास ने आवाज दी नयना मां के लिए एक कप चाय ले आना।नयना एक कप चाय रख गई कमरे में। मां नाश्ता कर लो अभी मन नहीं है बेटा । अच्छा नाश्ता करने का मन नहीं है तो

तकरार तो समाधान नहीं – विभा गुप्ता  : Moral stories in hindi

फल ,केला ,सेव , अंगूर सब रखें है वहीं खा लो थोड़ी देर में विमला जी ने हाथ मुंह धोकर एक सेव उठा लिया तभी नयना चिल्ला पड़ी अब सेव लेकर कहां जा रही है ‌‌‌पता है सेव के क्या भाव है । रोटी परांठे तो खाएं नहीं जाते सेव खा लेंगी । रोटी ठंडी हो जाए तो कहती हैं दांत से नहीं चबता और ये सेव चब जाएगा।

नाक में दम कर रखा है आपने तो।वो विकास कह गया था कि नाश्ता नहीं कर रही हो तो फल खा लेना इसलिए,,,,,,,,। हां हां विकास से तो करेगी ही न मेरी शिकायत कि मैं खाना नहीं देती , नाश्ता नहीं देती । दिनभर देते रहो लेकिन आपका तो पेट ही नहीं भरता।सेव रख दें और ये पराठा अचार रखा है वो खाए ।

नयना ने रात का बचा हुआ पराठा और अचार लाकर रख दिया । विमला जी कुछ देर तक तो उस परांठे को देखती रही फिर उसे वहीं टेबल पर छोड़ कर ऐसे ही कमरे में लेट गई।बहू के इस व्यवहार से आज उनकी आंखों से आंसू बह निकले।

             सत्यनारायण जी के जाने के बाद विमला जी की जिंदगी नरक बन गई थी ।वो विकास से कुछ न कहती कि घर में झगड़ा होगा बस मन मारकर रह लेती। यही सब सोचं सोंचकर दिन पर दिन उनकी तबीयत बिगड़ती जा रही थी। कई दिनों से ठीक से खाना न खाने पर आज बाथरूम जाते समय विमला जी

चक्कर खाकर गिर पड़ी ।सुबह का समय था तो विकास घर पर ही था तो तुरंत डॉक्टर को बुलाया चेकअप किया और बताया कि अत्यधिक कमजोरी के कारण इनका ये हाल है गया है। इनको हेल्दी खाना दीजिए ,दूध और फल दीजिए बहुत कमजोर हो गई है आपकी मां । ठीक है डाक्टर साहब ।

रिश्ता करने से पहले – रश्मि प्रकाश  : Moral stories in hindi

             वैसे मम्मी के इस व्यवहार से विकास की पांच साल की बेटी दुखी होती थी वो अपने हिस्से का सेव ले जाकर कभी कभी दादी को देती थी कि दादी ले आप मेरे हिस्से का खा लो लेकिन विमला जी मना कर देती थी। विकास ने नयना से कहा नयना अब रोज मां को एक गिलास दूध देना है सुबह-सुबह र रोज एक सेव।

मैंने सेव लाकर रख दिया है । मां आप खाती नही है क्या। नहीं बेटा क्यों मैंने कहा था न कि आप रोज एक सेव खाओगी। फिर विकास ने एक सेव काटकर मां को लाकर दे दिया।सेव खाते खाते मां रोने लगी , क्या हुआ मां रो क्यों रही हो ‌‌‌‌‌‌कुछं नहीं बेटा बस ऐसे ही ।अच्छा मैं आफिस के लिए निकल रहा हूं आप आराम करो।और नयना मां का ध्यान रखना।ये कहकर विकास आफिस निकल गया।

            विकास के जाते ही मैं नयना चिल्लाने लगी इतनी सेवा खाने की ललक लगी थी कि बीमार हो गई। कितना पैसा खर्च होता है आजकल बीमारी में पता है आपको ।एक इंसान कमाने वाला कहां से आएगा इतना पैसा मेरा , बेटी स्नेहा का आपका ,घर का कहां कहां का ध्यान रखें वो अकेला इंसान।हद कर दी आपने जीना हराम कर दिया है। सबकुछ सुनती रही विमला जी पर कुछ न बोली।

         तभी नयना की मम्मी का फोन आया हलो बेटी नयना हां मां , बेटी जरा मेरी तबियत ठीक नहीं है तू आजा डाक्टर को दिखा दे क्यों क्या हो गया ।अरे अपने लिए खाना बना रही थी तो चक्कर खाकर गिर पड़ी । अपने लिए  खाना, खाना तुम क्यों बना रही थी वो भाभी नहीं बनाती क्या ।

नहीं बेटा वो नहीं बना रही मेरा खाना और बासी और बचा हुआ खाना रोज दे देती है मुझसे भी नहीं खाया जाता। कुछ कहो तो लड़ाई करती है मुझसे ।फल फूल को मैं तरस गई हूं । पापा की पेंशन भी ले लेती है और खाना भी नहीं देती ।अब मैंने पेंशन देनी बंद कर दी और अपना खाना अलग कर लिया है।अब खुद ही बनाती हूं। अच्छा मां मैं कभी आती हूं स्नेहा स्कूल से आ जाए तो आती हूं ।

तकरार – पूजा शर्मा : Moral stories in hindi

          आज नयना मां से मिली तो मां बहुत रो रही थी।देख बेटा तेरे भाई भाभी ने मेरी क्या हालत कर दी । मां भाई कुछ नहीं कहता क्या भाभी को । क्या कहेगा बेटा वो कुछ सुनती नहीं है । इतना मां को तरसा रहीं हैं न उसको भी उसके बच्चे ऐसे ही तरसाऐगें।अच्छा मां मैं भाई से बात करती हूं

अरे नहीं मत करो बेकार में तुझको भी कुछ कह देगा । लेकिन मां ऐसे तो बद्दुआ लगती है मां बाप की हां बेटा ।बेटा तू तो अपनी सास के साथ ऐसा ंनहींकरती न अगर ऐसा कुछ करती है तो संभल जा बुजुर्गों के मन से निकलीं आह कहीं का नहीं छोड़ती ।उनकी बद्दुआ से हर बच्चे को डरना चाहिए।

नयना कुछ न बोल रही थी लगता है बेटा तुम भी अपनी सास के साथ वही कर रही हो जो तेरी भाभी कर रही है ‌म मुझे देखकर तो तुम्हें इतनी तकलीफ़ हो रही है लेकिन शायद तू भी वही कर रही है अपनी सास के साथ। सास भी मां ही होती है बेटा। उनकी आत्मा को तकलीफ़ देकर तू कभी सुखी न रह सकती है‌।नयना चुपचाप  नजरें झुकाए बैठी थी ।

    घर आकर नयना ने एक गिलास दूध गरम किए और विमला जी के कमरे में गई और विमला जी के पास बैठ गई मांजी दूध पी लीजिए । विमला बहू का मुंह देख रही थी ।गिलास हाथ में नहीं पकड़ रही थी  ।ले लीजिए मां जी , मां जी मुझसे बहुत बड़ी ग़लती हो गई है मुझे माफ़ कर दे ।

आप इस घर की बड़ी है बहुत तकलीफ़ दी मैंने आपको और बहुत बुरा भला कहा ,पैर पकड़ लिए विमला जी के मुझे माफ़ कर दे मां। मैंने आपके साथ बहुत ग़लत किया।आज जब मेरी मां पर यह सब बीती तो मुझे अहसास हुआ कि मैं कितना गलत कर रही थी आपके साथ।नयना ने विमला जी के पैर पकड़ लिए।

नहीं बेटा ऐसे न करों। मैंने माफ़ कर दिया ,मां बाप बच्चों से ज्यादा दिन नाराज़ नहीं रह सकते ,वो तो अपने बच्चों को ही देखकर जीते हैं ।उनका परिवार खुशहाल रहे बस यही चाहते हैं।और हम बुढ़े लोगों को और क्या चाहिए बेटा बस दो रोटी और थोड़ा सा आदर सम्मान बस ।

बदरंग रिश्ते – संजय मृदुल : Moral stories in hindi

इतने में विकास आया और बोला नयना ये सब मैंने ही किया है तुम्हारी मम्मी के साथ मिलकर क्यों कि मैंने एक दिन छुपकर देख लिया था कि तुम मम्मी के साथ कैसा व्यवहार करती हो और फिर स्नेहा ने मुझे सब बता दिया था।बस इसी लिए तुम्हारी मां के साथ मिलकर उनकी तबीयत खराब होने का बहाना किया

और ये सबक सिखाया तुम्हें। नयना ये हमारे मां बाप है जिन्होंने हमें पाल पोसकर बड़ा किया है इस दिन के लिए कि बुढ़ापे में उनको बच्चों का सहारा मिले न कि इस तरह का व्यवहार।अब जब उनको हमारी जरूरत है तब हम उनके साथ ऐसा व्यवहार कर रहे हैं । सोचों जरा जब हम बूढ़ी हो जाएंगे और हमारे बच्चे

हमारे साथ ऐसा करेंगे तो कैसा लगेगा ‌‌‌सबकी कीमत समय आने पर चुकानी पड़ती है। लेकिन तुमने समय रहते चेत लिया और मां से माफी मांग कर हमारे अपने रिश्ते को बचा लिया। हां विकास गलती हो गई आप और मांजी मुझे माफ़ कर दे ।अब आगे से ऐसा नहीं होगा।एक माफी से रिश्ते सुंदर गए उम भर के लिए ।

मंजू ओमर

झांसी उत्तर प्रदेश

2 अप्रैल

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