Moral stories in hindi :
प्रिया अस्पताल से घर आ कर शेखर को फोन करने के बारे में सोचती है।
प्रिया निभा दी की सासू मां को घर ले आई उन्हें और बच्चों को लंच कराने के बाद उसने खुद लंच किया और बच्चों को लेकर रुम में चली गई।
बच्चे उसके दोनों तरफ लेट गए मासी मम्मा कहां है। गुन्नू ने उससे लिपट कर हुए पूछा। पापा इस बार टूर पर गए मुझे बताया भी नहीं चीनू गुस्सा होते हुए बोली मुझे अपने लिए चॉकलेटस और बैग मंगवाना था। मैं उनसे कभी बात नहीं करूंगी।
चीनू जब पापा आएंगे तो हम सब मिलकर उन्हें बहुत डांटेंगे। गुन्नू बेटा मम्मा आने वाली हैं मार्केट गई हैं। चलो दोनों आंखें बंद करो। उसने दोनों को अपने आप से चिपका लिया। उनके सिर पर हाथ फेरते हुए वो खुद भी सो गई।
जब उसकी नींद खुली तो चार बज रहे थे। वो उठ कर बाहर आ गई।
उसने फोन उठा कर शेखर को कॉल की।
हैलो!
हां बोलो कहां हो तुम
घर पर हूं बच्चों के साथ।
आपकी कान्फ्रेंस हो गई ? हां
तुम हास्पिटल जाओगी??? तुम्हें लेने आना है??
आप आराम कीजिए। कल भी सारी रात हास्पिटल में थे।
मैं खुद चली जाऊंगी।
शेखर ने कुछ नहीं कहा।
वो शाम छह बजे अस्पताल चली गई वहां दी के चेहरे पर सुकून देख कर उसने चैन की सांस ली।
दी अब मैं रुकूंगी बच्चे परेशान हो रहे हैं आप घर जाइए।
पर तू भी तो इतनी भाग-दौड़ से थक गई होगी??
दी आप मेरे लिए परेशान मत हों मैं ठीक हूं।
दी को घर भेज कर वह बैठ गई।
दिमाग़ में बहुत कुछ चल रहा था। ऑफिस जाकर पैंडिंग
फाइल्स निपटानी होंगी। घर में मालती को बुलवा कर साफ सफाई करवानी है। जीजा जी दस दिन तक आब्जर्वेशन में रहेंगे। दीदी के बच्चों को भी देखना है। वाकई बहुत ज्यादा काम है और सब जरूरी है उसने एक लंबी सांस ली और खिड़की से बाहर देखने लगी।
क्या देख रही हो??
उसका ध्यान भंग हो गया।
पीछे मुड़कर देखा तो शेखर खड़ा था।
आप ???
हां सोचा तुम अकेली होगीं इसलिए आ गया।
कभी कभी जिंदगी बहुत उलझ जाती है और हम कुछ नहीं कर सकते।
उसकी आंखें भर आईं।
यहां आओ वहां पर बैठते हैं। उसने सामने लगी चेयर्स की तरफ इशारा किया।
वो वहां पर जाकर बैठ गई।
जी चाहता है कि तुम्हें गले लगा कर तुम्हारे आंसू पोंछ दूं।
पर ये हास्पिटल है। यहां ये सब अच्छा नहीं लगेगा।
अच्छा इन परेशानियों को भूलने का एक तरीका है। तुम मुझ पर वैसे ही गुस्सा करो जैसा कि तुम हमेशा करती हो।
थोड़ी देर चुप रहने के बाद उसने कहा
तुम्हें एक अच्छी बात बताता हूं तुम्हारी सास तुम्हारी तारीफ और मेरी बुराई कर रही थी।
कह रही थी तुम जितने नासमझ हो प्रिया उतनी ही समझदार है। कल वह अस्पताल में सब कुछ बहुत अच्छे से संभाल रही थी। तुम्हारी वजह से अभी से इतना सुनना पड़ रहा है और जब तुम घर में आ जाओगी तब तो सब मेरा जीना हराम कर देंगे।
प्रिया के चेहरे पर हल्की सी मुस्कराहट आ गई।
ऐसे ही खुश रहा करो।
आप यहां क्यों आए??? कल भी आपने पूरी रात ऐसे ही गुजारी थी आज पूरा दिन बिजी थे। ऐसे में तबीयत खराब हो जाएगी।
लगता है परवाह करने लगी हो मेरी??? शेखर ने उसकी आंखों में देखते हुए कहा।
प्रिया ने सिर झुका लिया।
बस जीजा जी ठीक हो कर घर वापस आ जाएं।
तो फिर मैं तुम्हें…… शेखर ने बात अधूरी छोड़ दी।
वैसे ही परेशान करूंगा बात प्रिया ने पूरी कर दी।
अभी परेशान किया ही कहां है???? वो मुस्कुरा कर बोला।
चलिए अंदर चलते हैं। दोनों अंदर आ कर बैठ गए
मैं परसों लंदन जा रहा हूं शायद हफ्ता लग जाएगा। वहां एक कंपनी के साथ टाइअप है।
इसलिए ही कह रही हूं रेस्ट जरूरी है। हर दिन इतना बिजी शेड्यूल रहता है।
इतनी रात में वापस जाएंगे ड्राइव करना सेफ नहीं होता वो भी तब जब थकान हो।
न मोहब्बत है न हमदर्दी है दोस्त तो हम कभी थे ही नहीं
फिर इतनी चिंता क्यों???
आप मेरे…… प्रिया कहते हुए रूक गई।
आप मेरे क्या???? उम्मीद है कि जल्द ही तुम सेंटेंस जरूर पूरा करोगी।
इश्क अपनी राह पकड़ चुका था। शायद इजहार ही बाकी था।
प्रिया ने उसे जबरन घर भेज दिया।
अकेलापन से उकता कर उसने अपने फोन देखना शुरू कर दिया।
व्हाट्सएप खोल कर मैसेज चैक किए।
ऑफिस के मैसेज पढ़ कर उनके रिप्लाई किए फिर सोने की कोशिश करने लगी।
अगले दिन उसने दी को हास्पिटल भेज कर बच्चों को स्कूल भेजा।
खुद ऑफिस चली गई।
छुट्टियां लेने से वर्कलोड दोगुना हो गया था। ऑफिस में उसने पैंडिंग वर्क करना शुरू किया निपटाते हुए लंच टाइम हो गया।
उसने एक कॉफी और सैंडविच आर्डर किया।
खाने के बाद उसने दी के घर पर कॉल किया।
दी की हाउस हैल्पर को बच्चों के बारे में पूछा।
सोचने लगी दी को तो आजकल अपना ही होश नहीं है।
इसलिए जब तक जीजा जी घर नहीं आ जाते तब तक उसे ही संभालना पड़ेगा।
शेखर भी चला जाएगा। हुंह वैसे तो जनाब अपने प्यार का झंडा चारों दिशाओं में फहराएंगे और एक फोन तक नहीं किया।
अगर नहीं करेगा तो शाम को मैं ही कर दूंगी।
शाम को वो अपने घर गई वहां मालती साफ सफाई कर गई थी। उसने पूरा घर चैक किया।
ऐहितिहात से डोर बंद करके निकल गई।
दी के घर पहुंच कर उसने देखा तो बच्चे खेल रहे थे।मासी को देख कर खुश हो गए।
उसने दोनों को प्यार किया और घर के अंदर ले गई।
इतने में दी का फोन आया कि आज वो अस्पताल में ही रूकेंगी।
उसने दी से जिद नहीं की।
डिनर के बाद चहलकदमी करते हुए उसे शेखर याद आ गया। कॉल करूं या नहीं ??? सोचने लगी। इतने में फोन बज उठा देखा तो उसका ही फोन था।
हैलो!
कहां हो ??? आज घर पर ही हूं।
दीदी अस्पताल में ही हैं। हां आज वहीं रूकेंगी।
मेरी डाक्टर मेहता से बात हुई थी। अब जीजा जी ठीक हैं।
एक बात कहनी थी तुमसे सुन रही हो???
जी सुन रही हूं। बहुत मिस करूंगा तुम्हें वैसे तो ये कमबख्त दिल हर वक्त मिस करता है तुम्हें??
तुम मुझे मिस करती हो या नहीं???
वैसे हो ही नहीं सकता कि ना करो??? क्योंकि मेरा किरदार कोई भूलने वाली चीज नहीं है।
अच्छा मुंह दिखाई में तुम्हें क्या चाहिए???
सोच रहा हूं कि ऐसा क्या दूं तुम्हें जिसमें मेरी झलक हो मेरे इश्क की तपिश हो।
प्रिया का चेहरा शर्म से लाल हो उठा उसे अपने कान गर्म महसूस होने लगे।
तुम तो फोन पर भी शरमा रही हो मैं महसूस कर सकता हूं। फोन पर नहीं बताओगी तो जब सामने से पूछूंगा तब क्या करोगी???
बात बदलने के लिए उसने बड़ी मुश्किल से बोला
अपना ख्याल रखियेगा।
वो बात तुम्हें मुक्कमल करनी होगी जो अधूरी रह गई थी।
डार्लिंग आईलवयू
जी गुडनाईट उसने फोन रख दिया। वो आकर बिस्तर पर लेट गई।
शेखर की बातें सोच कर उसे बहुत लज्जा आ रही थी।
मुंह दिखाई की बात कर रहा है। अजीब है सोते जागते हर समय इसका दिमाग में कुछ न कुछ चल ही रहा होता है।
अब जब भी मिलेगा तो हाय मैं बात कैसे करूंगी उससे
सच में अगर सामने आ कर पूछ लिया तो ?? और वो बिल्कुल ऐसा ही करेगा ।
वो शेखर है उससे ऐसी ही उम्मीद कर सकती हूं।
भले ही मैं मार्डन सोच रखती हूं। हाईली एजुकेटेड हूं पर मैं…… ऐसी बातें नहीं नहीं कभी नहीं वो तो खुद बेशर्म है कहीं उसकी संगत में मैं भी…..
शायद प्यार करने लगी हूं या फिर…… पर मिस तो करती हूं। ईश्वर ख्याल रखना उसका।
उसका मन बदलने लगा था। वो मोहब्बत में जीने लगी थी। पर शायद ये वो समझ नहीं पा रही थी।
शेखर के प्यार में बेसब्री थी चंचलता थी आग थी।
और उसका प्यार……… तो बिल्कुल शांत था जो बिल्कुल गहराई तक महसूस किया जाने वाला।
कहा जाता है ईश्वर कभी भी दो लोगों को एक जैसा नहीं बनाता। कहीं न कहीं फर्क होता ही है। तो दो लोगों की प्रवृत्ति एक जैसी कैसे हो सकती है???
शेखर लंदन चला गया। प्रिया की जिंदगी फिर वैसे ही चलने लगी जैसे चल रही थी।
जीजा जी घर आ चुके थे तबीयत में काफी सुधार था।
लंदन जाने के बाद शेखर की जब कोई कॉल नहीं आई उसने भी सोचा कि वो बिजी होगा??? इसलिए उसने भी कॉल नहीं किया।
पर फिर एक दिन शाम को उसने कॉल किया तो फोन किसी लड़की ने उठाया।
हैलो…….
क्रमशः
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