दूरी ये सही न जाए – डॉ संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : ट्रेन पूरी स्पीड से अपने गंतव्य की तरफ बढ़ रही थी,उसके हिचकोलों से सभी यात्री ऊंघ रहे थे,कुछ सो गए थे और कुछ सोने वाले थे लेकिन राम की आंखों से नींद आज बिलकुल गायब ही हो चुकी थी…रह रह कर गौरी का सुंदर मुखड़ा ,उसकी आंखों के सामने तैर रहा था,कितना समय हो गया जब उसे देखा था उसने…पूरे दस वर्ष…दस वर्ष का समय बहुत लंबा होता है,भगवान राम ने भी चौदह वर्ष का वनवास काटा था और मैंने दस वर्ष का…उसके होंठों पर फीकी सी मुस्कराहट आई और चली गई।

कहां गौरी के बिना वो पल भर की जुदाई सहन नहीं कर पाता था,दोनो ने संग संग जीने मरने की कसमें खाई थीं,वो एक होने भी वाले थे लेकिन फिर अचानक एक दिन…

ट्रेन आगे बढ़ते हुए पीछे खेत खलिहान,स्टेशन छोड़ रही थी और आगे दौड़ रही थी और राम का मन अतीत में बड़ी तेजी से गोते लगा रहा था,वो आगे कहां बढ़ पा रहा था?

गौरी,राम की कंपनी में नई नियुक्त हुई थी सी ए के रूप में,खूबसूरत,आधुनिक,अपने काम में दक्ष,बहुत जल्दी सबका दिल जीत लिया था उसने।राम को भी वो पहली नजर में भा गई थी पर मालिक और अधीनस्थ की दूरी उनके बीच रोड़ा थी।

राम की मां ने उसके लिए लड़कियां ढूंढनी शुरू की शादी के वास्ते तो राम जिसे भी देखने जाता उसे मन ही मन गौरी से तुलना करने लगता और हमेशा कम ही पाता उससे।

थक के एक दिन मां ने पूछा,कोई और पसंद है तुझे तो बता दे,उससे करा देती हूं तेरी शादी,राम की पिता अब रहे नहीं थे,मां को जल्दी थी राम की दुल्हन लाने की,पता नहीं किस दिन आंखें मूंद लूं, कम से कम ,अपने पोते पोतियों संग कुछ दिन तो गुजार लूं।

राम ने झिझकते हुए,मां को अपनी पसंद बताई।थोड़ी बहुत नानुकुर के बाद,बेटे की इच्छा के सामने,मां ने समर्पण कर दिया और गौरी को बहू बनाने की मौन स्वीकृति दे दी।

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गौरी वाकई में बहुत प्यारी लड़की थी,जल्दी ही राम और गौरी एक दूसरे से मिलने लगे,दोनो ही टूट कर चाहने लगे थे एक दूसरे को।रोज मुलाकातें होती और हमेशा एक ही घर में संग रहने  की तड़प बढ़ती जाती।शादी से पहले,कोई भी आगे बढ़ने को तैयार न था बस यही आकर्षण उन्हें एक दूजा का जल्दी से होने के लिए बेकरार किए था।

फिर एक दिन आई,राम की मीरा मौसी बंगलौर से,बहुत बड़ी कंपनी की मालकिन और अल्ट्रा मॉडर्न सिंगल वूमेन।

राम की मां,देवयानी ने उन्हें राम और गौरी की तस्वीर दिखाई, “लो देखो जीजी!अपने राम की पसंद।साधारण घर की जरूर है पर है बहुत प्यारी और सबसे बड़ी बात,अपने राम को पसंद है।”

क्या??ये …ये मखमल में टाट का पैबंद क्यों?लड़कियों का अकाल पड़ गया दिल्ली में?महत्त्वाकांक्षी मीरा मौसी बोलीं।

“पर राम की तो जान बसती है इसमें जीजी..”

देवयानी ने कहा।

तू भी बहुत भोली है,श्रीधर अब रहे नहीं, तू अकेली कहां संभालेगी इसे…ये छोटे घर की लड़कियां बहुत तेज़ होती हैं,लड़के को वश के कर लेगी और तुझे बाहर का रास्ता दिखा देगी।

लेकिन राम नहीं सुनेगा जीजी..बहुत चाहता है उसे!देवयानी ने तर्क दिया।

तो हम सुनवाएंगे राम को…कुटिलता से हंसी वो।

“पर कैसे?” दिल में दबा डर होंठों पर ले आई देवयानी,उसे भी पूरी तरह गौरी पसंद न थी या राम की उसके लिए दीवानगी देखकर सहम गई थी वो।

थोड़े ही दिन में,गौरी पर इल्जाम लगाया गया कि वो कंपनी के ही एक एंप्लॉय दीपक के साथ इंगेज्ड है,जब उसे राम का ऑफर मिला तो उसने दीपक को डिच करना शुरू कर दिया था।

राम बौखला गया ये सुनकर…नहीं मां!गौरी ऐसी नहीं है…वो मुझे प्यार करती है।

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मीरा मौसी कूद पड़ी थीं उनके बीच मे,बेटा!तुम बहुत भोले हो..अगर तुम्हें प्रूफ दिखाऊं तो मान जाओगे न।

बेमन से राम ने कुछ फोटोज देखी जिसमें गौरी और दीपक की रिंग सेरेमनी हो रही थी।उसे विश्वास न हुआ…क्या वाकई मे,गौरी ऐसी ही है,उसने दीपक से पूछा और दीपक की बात सुनकर उसका दिल टूट गया।

दीपक ने बताया,गौरी,उसके पास भी किसी को छोड़ कर ही आई थी,उसके भोलेपन से मैं प्रभावित हो गया था और तैयार हो गया उससे शादी को पर उसने …

“ओह!”राम स्तब्ध रह गया, बिना गौरी से बात किए,उसे नौकरी से निकाल दिया गया और दीपक को प्रमोशन देकर,कंपनी की मुंबई ब्रांच में ट्रांसफर  कर दिया गया।

गौरी ने बहुत कोशिश करनी चाही कि वो राम को सच्चाई बता सके पर मीरा मौसी की चाक चौबंद व्यवस्था के सामने उसकी एक न चली।राम ने उससे मिलने से इंकार कर दिया।उसे शहर छोड़ना पड़ा।

देवयानी आश्चर्य में थी,ये सब कैसे किया जीजी?दीपक को कैसे मनाया तुमने?और वो फोटो कहां से लाई?

तुम आम खाओ,गुठलियां क्यों गिनती हो?वो कुटिलता से मुस्कराई,पैसा ऐसी ताकतवर चीज़ है जिससे हरेक को खरीदा जा सकता है और तकनीक बहुत एडवांस हो चुकी है बहना!तुम्हें इससे क्या,तुम अपनी स्टेटस की,अपनी मनपसंद दुल्हन ढूंढो बेटे के लिए।

देवयानी फिर शुरू हो गई थी बहू तलाशने में लेकिन राम ने तो जैसे कसम खा ली थी,गौरी नहीं तो कोई और भी नहीं।विश्वास उठ गया था उसका प्यार मोहब्बत के नाम से।

मीरा मौसी तो तभी चली गई थीं,अब देवयानी खुद को कोसती रहती और अपने बेटे को देवदास बने देखते रहने को विवश थी।उसका दिल रोता था जब वो अपने बेटे को अकेले तड़पते देखती,अपने ही बेटे की खुशियों की कातिल थी वो पर विवश थी,अब क्या कहती?

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एक दिन,मुंबई विजिट में,राम को दीपक अपनी पत्नी प्रिया संग मिला।उसने पूछा था उससे,गौरी के बारे में और वो बहुत जल्दी टूट गया…ये सब आपकी मौसी और मां का रचा खेल था,गौरी निर्दोष है, उस पर  झूठा इल्जाम लगाया था उन लोगों ने।

राम के पैरों से जमीन सरक गई,उसकी अपनी मां ने छल किया उसके साथ?बहुत मुश्किल्से गौरी जा पता लगा पाया था वो और गौरी आज भी,राम की तरह ही अकेली थी,उसे अपने राम का इंतजार था और राम उसीसे मिलने जा रहा था।

कल की सुबह होते ही,उसका दस वर्ष का वनवास खत्म होने जा रहा था जब वो और उसकी गौरी फिर से एक हो जायेंगे।एक इल्जाम ने उनकी हंसती खेलती जिंदगी को पूरे दस वर्ष पीछे धकेल दिया था।

 

डॉ संगीता अग्रवाल

वैशाली,गाजियाबाद

#इल्जाम

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