दर्द की दास्तान ( भाग-1 ) – रोनिता कुंडु  : Moral Stories in Hindi

एक लड़की जिस को कुछ बच्चे पागल कहकर चिढ़ा रहे थे और पत्थर भी मार रहे थे… तभी एक आदमी दौड़ कर आता है… उन बच्चों को डांट कर भगाता है… फिर वह पगली भी रोते-रोते वहां से चली जाती है… उसके बाद, वह आदमी वही एक चाय की टपरी पर बैठ जाता है…

आदमी चाय वाले से:   अरे भाई..! एक चाय देना..

चाय वाला:   साहब 5 की दूं या 10 की..?

आदमी:   10 की ही दे दो… अच्छा… एक लड़की को कुछ बच्चे कब से परेशान कर रहे थे… तो तुम लोगों ने उसकी मदद क्यों नहीं की…? 

चायवाला:  अरे साहब..! यह तो रोज़ का है… अब यहां अपनी दुकान संभालूं या यही सब करूं..? यह पगली भी कहां किसी की सुनती है…? इसकी दादी जो इसे घर से ना निकालने दे, तो यह रो गाके पूरे कस्बे को सर पर उठा लेती है और जब भी यह घर से निकलती है, तो उसका यही हाल होता है..

आदमी:   कोई भी आदमी 24 घंटे सिर्फ घर पर तो नहीं रह सकता ना… चाहे उसका दिमाग कैसा भी हो..? अगर तुम लोग अपने बच्चों को ऐसा करने से रोकोगे, तो इस बिचारी का ऐसा हाल तो नहीं होगा… मानता हूं यह सामान्य नहीं है पर, हम सभी तो सामान्य है… फिर हम मानसिकता का परिचय तो दे सकते हैं ना..?

चायवाला:   साहब…! आप बाहर के हो इसलिए आप इन सब झमेलो में मत पड़िए… कौन सा एक मेरी सोच बदलने से सबकी सोच बदल जाएगी..? सच तो यह है कि, एक पागल का समाज में कोई जगह नहीं होता… जब यह ठीक थी, पूरा कस्बा इसकी तारीफ करते नहीं थकता था… कितनी होनहार सबकी मदद करने के लिए आगे, बड़ी ही नेक दिल बच्ची थी… पर यह सब अब किसी को याद कहां..? ताज्जुब की बात तो यह है कि, जिन बच्चों को यह मुफ्त पढ़ाती थी कभी, आज वह भी इसे पत्थर मारते हैं..

आदमी:   क्या..? यह पहले ऐसी नहीं थी..?

चाय वाला:   नहीं साहब..! यह तो हमारे कस्बे की ही स्कूल की चपरासी की बेटी थी… इसकी कहानी हर किसी के मुंह से आप थोड़ी अलग अलग सुनेंगे, पर असली कहानी सिर्फ इस पगली को ही पता है… हालांकि इस कस्बे का हर एक आदमी इसकी कहानी जानता है… पर उस रात आखिर क्या घटा था..? यह तो यह बताने से पहले ही अपना मानसिक संतुलन खो बैठी… खोती भी कैसे नहीं..? जितनी उम्र नहीं, उतना बड़ा दुख टूट पड़ा इस पगली पर..,

आदमी:   आखिर मुझे भी तो बताओ, इसकी कहानी जो तुम लोग जानते हो…

चायवाला:   साहब..! आपको इन सब से क्या लेना…? इस कस्बे की बात यहीं रहने दो… परदेसी हो, बस चाय पियो और चले जाओ…

आदमी:   मैं परदेसी नहीं हूं… इस कस्बे का जो स्कूल है, उसी का मास्टर बन कर आया हूं…

चाय वाला:   क्या..? आप मास्टर जी हैं..? फिर तो आप भी कोई नेता के रिश्तेदार ही होंगे…?

अंगद:  अरे नहीं.. नहीं… मैं एक मामूली सा आदमी हूं… जिसने बड़ी मुश्किल से कितनी परीक्षाएं देकर, यह नौकरी हासिल की है… पर तुमने ऐसा क्यों पूछा..?

विभूति: ओ अच्छा… मास्टर जी..! माफ कर दीजिए हमको… यहां  के स्कूल में बहुत दिनों से कोई मास्टर नहीं था, इसलिए ऐसा पूछा….अब आपके आगमन से हमार बच्चन को थोड़ा सुबुद्धि मिलेगा… आपका नाम…?

आदमी:   अंगद…

चायवाला:   हम विभूति… हम अभी घर जाकर इ खुशखबरी पूरे कस्बे को सुना कर आते हैं… सब नए मास्टरजी पाकर खुशी से नाचने लगेंगे…. यहां स्कूल में मास्टर जी नहीं होने की वजह से, सारे बच्चे पढ़ना लिखना छोड़ चुके हैं..

अंगद:   चलो विभूति, मैं भी चलता हूं तुम्हारे साथ… इसी बहाने पूरे कस्बे से मेरी जान पहचान हो जाएगी…

फिर दोनों चले जाते हैं कस्बे में… विभूति सभी से अंगद को मिलाने लगता है… सारे बच्चे अंगद को घेर लेते हैं… अंगद भी सभी से हाथ मिलाने लगता है… वही दूर बैठी वह पागल लड़की यह नजारा देख रही होती है, कि तभी अंगद की नज़रें उस लड़की पर जाती है… अंगद भीड़ को चिड़ता हुआ उसके पास जाता है और उससे कहता है… तुम खुश नहीं हुई नए मास्टर जी के आने से…?

एक बच्चा पीछे से:   अरे मास्टर जी..! यह क्या खुश होगी..? यह तो पगली है, पगली..! पीछे सभी बच्चें भी हंसने लगते है…

अंगद:   चुप हो जाओ सभी कोई… किसने कहा यह पागल है…? आज के बाद किसी ने भी इसे पागल कहा तो, मैं इस कस्बे से चला जाऊंगा…

सारे बच्चे अब खामोश हो गए…

अंगद उस लड़की से:   तुम आओगी ना स्कूल पढ़ाई करने…?

लड़की:   हां.. हां.. मैं आऊंगी मास्टर जी… मुझे बहुत कुछ आता है… 

अ से अनार, आ से आम 

तो कहो भाई, इसके दोगे कितने दाम…?

यह कहकर वह लड़की ताली बजाकर जोर जोर से हंसने लगती है.. अंगद भी उसकी बातों से हंस पड़ता है और फिर वह अपने क्वाटर में चला जाता है… अंगद अपना हाथ मुंह धो कर खाना खाकर लेट जाता है, पर उसे बस उस लड़की का चेहरा याद आता है और वह सोचता है… कितनी मासूम सी है… पता नहीं ऐसी हालत कैसी हो गई उसकी..? अरे मैंने तो उसका नाम भी नहीं पूछा… कोई बात नहीं, कल विभूति से उसका नाम और उसकी कहानी दोनों ही जान लूंगा…

फिर अगले दिन वो स्कूल खुलने से पहले ही, बिभुति की दुकान पर पहुंच जाता है… तो क्या वह उस लड़की की पूरी कहानी जान पाएगा..?

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रोनिता कुंडु

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