दहेज तो देना ही पड़ेगा

मेरी एक छोटी बहन नीलिमा है जो अभी-अभी ग्रेजुएशन कंप्लीट की है नीलिमा  की शादी के लिए उसके ग्रेजुएशन पास करते ही पापा ने लड़का देखना शुरु कर दिया था.  

दोस्तों बेटी हो या बहन नादानी करते-करते कब बड़ी हो जाती है।  घर वाले को तो पता भी नहीं चलता है पता तो तब चलता है जब बाहर वाले बोलने लगते हैं आपकी बेटी बड़ी हो गई है कब करेंगे इसकी शादी । पापा भी नहीं चाहते थे कि उसकी शादी अभी हो अभी वह चाहते थे कि मोनी बी ऐड कर ले उसके बाद ही उसकी शादी की जाए। पापा मेरे थोड़े आधुनिक खयालों के थे वह चाहते थे कि नीलिमा  पढ़ लिखकर कुछ करें दूसरों की बेटियों से अलग अपना एक नया रास्ता और एक नया मुकाम हासिल करें।

शादी ब्याह के लिए भी बहुत ज्यादा दहेज की डिमांड  होने के कारण मम्मी परेशान होती थी। वह सोचती थी जितनी जल्दी नीलिमा  की शादी हो जाए उतना बेहतर है।

दोस्तो मैं बता दूं कि शहरों में तो लोग ऑनलाइन वेबसाइट से भी लड़का ढूंढ शादी कर देते हैं। लेकिन गांव में इसका प्रचालन अभी भी नहीं है अभी भी हम किसी दूसरे की मदद लेते हैं जिसे हमारी तरफ से अगुआ  कहा जाता है जो मीडिएटर का काम करता है और वही शादी कराता है।



एक दिन हमारे दूर के रिश्तेदार ने एक लड़का बताया। पापा से बोला “आप कहो तो उनसे बात शुरू करो” पापा ने बोला कि वह लड़के के बारे में तो बताइए लड़का क्या करता हैं और शादी ब्याह में कितना खर्च लगेगा कितना दहेज लगेगा।  काका ने बताया एक लड़का रेलवे में जॉब करता है आप पसंद करेंगे तो आपको लगभग 10 लाख रुपए खर्च करने पड़ेंगे।

दूसरा लड़का अभी पढ़ाई कर रहा है और काफी मेहनती है उसका भी जॉब लग जाएगा लेकिन उसकी मां की तबीयत ठीक नहीं रहती है इस वजह से उनके घरवाले उसकी शादी करना चाहते हैं।

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अभी लड़का नौकरी नहीं करता है इस वजह से आपको कम खर्च में ही शादी हो जाएगा और तीसरा लड़का है वह इंजीनियर है।

उसमें तो मुझे नहीं लगता कि आप कर पाएंगे क्योंकि उसका डिमांड बहुत ज्यादा है और घर  द्वार से भी काफी अच्छा खासा है तो वह तो कम से कम 25 लाख से कम नहीं मांगेगा यह सब सुनकर मैं काफी आश्चर्यचकित  हो गया था की आजकल शादी के नाम पर व्यापार चल रहा है।

पापा गुस्सा हो गए और बोले मैं सोच कर बताता हूं फिर बात यहीं खत्म हो गई और काका चले गए

अलग-अलग लड़कों के लिए अलग-अलग प्राइस क्या सच में ऐसा होता है एक लड़के  को लड़की वाले दे देते हैं इतना। पापा ने मेरी बात सुनते हुए एक लंबी सी सांस ली और बोले  बेटा आजकल बिना दहेज की कोई भी शादी हो ही नहीं सकती।



अगर हमारे देश में दहेज प्रथा नहीं होता तो आज लड़कियों को कोई भी हीन भावना से नहीं देखता सब लोग लड़कियों को भी वैसे ही पढ़ाते जैसे लड़कों को पढ़ाते हैं।

लोग यह नहीं देखते कि लड़का क्या है क्या करता है उनका स्वभाव कैसा है बस यही देखते हैं कि लड़का कमाता है कि नहीं अगर सरकारी जॉब में है तो फिर तो लोग कुछ भी जांच परख कि नहीं करते हैं कि वह सच में उसका स्वभाव कैसा है वह हमारी बेटी को खुश रख पाएगा या नहीं बस पैसा दो और लड़के को खरीद लो पता है बेटा पापा ने कहा आजकल लड़कों को लोग बैंक डिपाजिट समझते हैं।

उस पर किए गए खर्च शादी के बाद उसी से निकालो।  आजकल बेटा तुम्हें पता है कि लोग अपने घर का सामान भी नहीं खरीदते हैं सोचते हैं कि लिस्ट बनाकर रख लो जब बेटे की शादी होगी तो सारे लड़की वालों से ले लेंगे और लड़की वाले इसी लिए बने ही है ना लड़की वालों से फ्री गाड़ी TV वाशिंग मशीन और ना जाने क्या-क्या डिमांड रखा जाता है।

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आजकल जिसके सिर्फ बेटे  हैं वह सर उठा कर जीता है और जिनकी बेटियां हैं वह सर झुका के जीता है मैंने पापा की बातों को विरोध किया और कहा पापा जब सारे लोग ऐसे बिना समझे बुझे  एक लड़के को

पैसे देने लगेंगे तो लड़के वालों का तो मन बढ़ जाएगा। बेटा मन बढ़ेगा  नहीं मन बढ़ गया है आजकल देखा जाए तो बेटी वाला एक बैंक और बेटा लॉकर की चाबी है मेरे मन में भी कई सारे सवाल उठने लगे थे।

और उन सारे सवालों का जवाब मेरे पापा बखूबी दे रहे थे अब तक मेरे मन में यह चीजें तो आ ही गई थी कि हमारे चारों और दहेज का कैसा जाल बीच गया है पता नहीं पापा नीलिमा की शादी कैसे और किस लड़के से करेंगे क्योंकि ना पापा मेरे बैंक थे और ना मैं अपनी बहन के लिए पैसे से प्यार का रिश्ता खरीदना चाहता था।



हमारा देश बदल रहा है आगे बढ़ रहा है आजकल लड़कियां लड़कों से कम नहीं है वह कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है शिक्षा का स्तर बदल रहा है और दूसरी तरफ एक पिता दहेज के पैसे जोड़ने में लगा हुआ है वह खुद को गिरवी रख देता है फिर भी उनकी बेटी को खुशी शायद ही नसीब होती है.

क्योंकि आए दिन अखबारों में पढ़ते हैं कि दहेज के कारण उस लड़की की हत्या हो गई कुछ दिनों बाद उन दोनों के बीच तलाक हो गया कई बार तो यह देखा गया है कि लड़कियां अपने ससुराल वालों के अत्याचार की वजह से आत्महत्या तक कर लेती हैं।

कई बार तो कुछ परिवार वाले ही उसे जला देते हैं और इस तरह की बातें अक्सर हमारे जैसे मिडिल फैमिली वालों के लिए ही होती है आखिर हम किस से उम्मीद करें दहेज  खत्म हो जाएगा क्योंकि दहेज मांगने का जो काम है वह अनपढ़ लोग नहीं करते हैं बल्कि यही पढ़े लिखे लोग ही करते हैं।

जैसे टीचर इंजीनियर या सरकारी पदों पर काम करने वाले लोग वैसे तो बड़ी-बड़ी बातें करेंगे लेकिन दहेज के नाम पर सब के मुंह में एक टेप चिपक जाता है देखा जाए तो दहेज आजकल किसी छुआछूत बीमारी की तरफ फैलने लगी है।

इस महंगाई के जमाने में बिना कुछ किए जब इतना पैसा फ्री में ही मिल जाता है तो कमाने की क्या जरूरत है और साथ ही  मनपसंद सामान सब कुछ फ्री में आ जाता है जब किसी के सपने घर बैठे ही पूरे हो जाते हैं तो अपने सपने पूरे करने के लिए वह किसी शहर में क्यों जाएं कमाने जाए।

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मुझे तो यह समझ नहीं आ रहा कि दहेज देते किस बात को लेकर है ऐसा तो होता नहीं है दहेज ददेने से लड़की उस घर में जाकर महारानी की तरह रहती है वहां भी जाकर उसे घर में सारे काम करने होते हैं

जो एक नौकरानी को करने होते हैं घर की सफाई करना खाना बनाना कपड़े धोना आप ही सोचिए जो लड़का अपने दम पर अपने घर वाले के सपनों को पूरा नहीं कर सकता उनकी जरूरत की चीजें नहीं खरीद सकता वह आपकी बेटी की ज़रूरत क्या पूरा करेगा।

लड़के वाले समझते हैं कि हमारे ससुराल वाले तो बहुत अमीर हैं जब भी उन्हें कभी पैसे की जरूरत होती है किसी ना किसी बहाने से मांगने की कोशिश करते हैं क्योंकि आपने तो पहले ही मन बढ़ा दिया है इतने सारे दहेज देकर उसे लगता है कि आप बहुत अमीर हैं।

उसे यह कहां पता होती है कि यह जो दहेज के पैसे तुम्हें दिया गया है वह लड़की के बाप किस तरह से जुटा कर दिया है दोस्तो हम धीरे-धीरे अपने समाज को विकलांग बनाते जा रहे हैं इस दहेज की लालच में ऐसे ही ना जाने कितने सारे ख्याल और विचार मेरे मन में आते जा रहे हैं

और मैं पूरी तरह से सोच में डूब गया था शहर आने के बाद मैं अपना ध्यान पढ़ाई में लगाने की सोच रहा था लेकिन मेरा मन अक्सर इन्हीं बातों में खो जाता था कि कैसे यह दहेज प्रथा को खत्म किया जाए मैं सोचता था कि जब किसी को कोई परेशानी है ही नहीं तो फिर मैं क्यों इतना टेंशन ले रहा हूं कहीं से कुछ पैसे इंतजाम करके या कुछ जमीन बेच कर भी नीलिमा  की शादी कर दी जाए और फिर टेंशन खत्म क्या करना है इधर पापा भी नीलिमा की शादी के लिए लड़का देख ही रहे थे।



कई बार लड़के वाले आते अच्छे  रेस्टोरेंट में लड़की देखने के लिए बुलाते और रिजेक्ट करके चले जाते कभी बोलते लड़की छोटी है कभी बोलते लड़की सुंदर नहीं है तो कभी पैसे की लेनदेन पर बात अटक जाती थी इस तरह से लगभग 1 साल और गुजर गया पापा भी काफी परेशान हो गए थे टेंशन में रहने लगे थे कि क्या नीलिमा के  लिए कोई अच्छा लड़का मिलेगा भी।

सोच रहे थे कि जितना पैसा देना होगा मैं दे दूंगा बस एक बार एक लड़का सही से मिल जाए मैं अपना जमीन घर जो भी बेचना पड़े बेच  दूंगा। लेकिन नीलिमा की शादी एक बार अच्छी तरह से हो जाए फिर किसी ने बताया एक रेलवे के ड्राइवर के बारे में उससे बात हो गई मैं घर पहुंचा

उनके आते ही मोलभाव शुरू हो गया लड़के वाले पहले तो 10 लाख बोल रहे थे फिर मैं भी बीच में मजे लेते हुए बोला कि अंकल इतना दहेज तो बनता है आखिर आपने भी अपने लड़के को बचपन से पढ़ाया लिखाया इतना बड़ा किया अब सूद सहित 10लाख  तो आपका बनता ही है सब मेरी तरफ देखने लगे।

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मैंने बोला कि ठीक है आपको 10 लाख  दिया जाएगा लेकिन मेरी भी एक शर्त होगी आगे से आप का लड़का हमारे यहां ही रहेगा आपको अपने लड़के से कोई मतलब नहीं होगा और यह हम पर निर्भर करेगा कि हम लड़के को कैसे रखेंगे।  क्योंकि आपने अभी-अभी अपने बेटे के सारे खर्चे गिना दिए हैं उस हिसाब से हम आप के दुगने पैसे आपको देने पर तैयार हो गए हैं

अब कोई भी इंसान जब सामान खरीदेगा तो उसका इस्तेमाल तो करेगा ही ना उसी तरह अगर मैं आपके बेटे को पैसे देकर खरीद रहा हूं कम से कम मेरा 20 लाख  का तो फायदा होना ही चाहिए ना क्योंकि मैं इतना खराब व्यापारी तो हूं नहीं जो घाटे का सौदा करू।



अगर आपको मंजूर नहीं है तो एक दूसरा शर्त  है वह दूसरा शर्त यह है ठीक है मेरी नीलिमा आप के यहां जाकर रहेगी लेकिन आपके यहां मेरी नीलिमा  कोई भी काम नहीं करेगी जैसा कि खाना नहीं बनाएगी आपको खाना बनाना पड़ेगा, बर्तन धोना झाड़ू पोछा आपको दूसरों से करवाना पड़ेगा या खुद करना पड़ेगा मेरी  बहन को कहीं भी अपनी मर्जी से कहीं जाने की आज्ञा देनी होगी किसी भी तरह की रोकथाम नहीं होगी। क्योंकि मैं आपके लड़के को दहेज दे रहा हूं फिर मेरी बहन कोई काम क्यों करेगी वह तो ऐशो-आराम से रहेगी ना इतना पैसे दे रहा हूं।

मेरी बात सुनकर सब मेरी तरफ देखने लगे थे लड़के के पापा ने कहा कि मुझे मंजूर नहीं है मैंने अपने बेटे को इसलिए नहीं पढ़ाया कि वह किसी और के घर में जाकर रहने लगे वह मेरी सेवा करें मेरी देखभाल करें

इसीलिए मैंने उस पर इतना खर्च किया है और मैं यह भी नहीं चाहूंगा कि मेरा बेटा अपनी पत्नी का गुलाम बन जाए।

उस घर में तो मैंने शादी करने का फैसला ले लिया है इसलिए यह सब नाटक कर रहा था कि जो लोग इतने लालची हैं उसके घर में शादी कैसे कर सकते हैं कुछ देर बाद चले गए उसके बाद पापा मुझे आकर बोले बेटा

यह सब किताबी बातें हैं जो बोल रहा है अगर नीलिमा की शादी अच्छे घर में करना है तो हमें दहेज देना ही पड़ेगा।

आखिर मैं हार गया था अपनी परिस्थितियों से और नीलिमा  कि शादी 10 लाख रुपए देकर एक लड़के से करनी ही पड़ी।

मैं शादी के बाद दिल्ली वापस आ गया था और इसी सोच में रहता था कि सच में क्या हमारा समाज हमारा देश कभी बदल पायेगा।

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