भाग्यहीन – वीणा सिंह : Moral Stories in Hindi

    मां बनकर #भाग्यहीन #होना कितने दुःख और आश्चर्य की बात है..

           आंखों से गिरते आंसुओं के सैलाब को रोकने की असफल कोशिश करती मीनू फ्लैशबैक में चली गई… कितने व्रत उपवास और मन्नतों के बाद निहाल का जनम हुआ.. पांच साल तक मन्नत उतारते रहें… पत्थर पर दूब जमा हो जैसे.. सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था.. हम पति पत्नी निहाल को जैसे पलकों पर बिठा के रखते.

. दुर्भाग्यवश निहाल के पापा रोहित की कंपनी में छंटनी हो रही थी.. उनका नाम भी उसमें आ गया…. दुर्भाग्य हमारा पीछा कर रहा था, छह महीने बाद उनको लकवा मार दिया.. निहाल की पढ़ाई और रोहित के इलाज में जमा पूंजी खतम होती जा रही थी…फिजियोथेरेपी में अच्छे पैसे लग रहे थे.. एक महीने बाद उसे बंद करना पड़ा….

मुझसे जितना हो सकता था मैं उन्हें करवाती थी… मैने समय की नब्ज को पहचाना और दो तीन घरों में खाना बनाने लगी…. पर रोहित को बाथरूम ले जाना और बहुत सारे काम मुझे हीं करवाने पड़ते थे, उन्हें दिक्कत होने लगी… फिर मैने टिफिन बनाने का काम शुरू किया.…जी तोड़ मेहनत करती…

रोहित की देखभाल निहाल की पढ़ाई और टिफिन का काम… मैं मशीन बन गई थी.. न खाने की चिंता न पहनने की फिक्र… रोहित अपराधबोध से भर जाते.. मैं उन्हें समझाती ये समय भी गुजर जाएगा…

               मेरा संघर्ष जारी था…निहाल दसवीं में पहुंच गया था.. ट्यूशन कोचिंग का खर्च बढ़ गया था… रोहित की दवाईयां इलाज सबकुछ… चिंता और तनाव ने मुझे भी हाई बीपी का रोगी बना दिया था.. पर निहाल का चेहरा देखती तो सारा थकान काफुर हो जाता… दसवीं की परीक्षा के बाद निहाल के दोस्त वाराणसी जा रहे थे.. निहाल भी जाना चाहता था.. मैने उसकी खुशी के लिए अपने कान के बूंदे बेंच दिए.. ये कान का बूंदा और मंगलसूत्र गहने के नाम पर यही बचे थे… खैर..

इस कहानी को भी पढ़ें: 

माया की बुद्धिमत्ता – कमलेश वाजपेयी : Moral Stories in Hindi

               निहाल प्लस टू करने दूसरे शहर चला गया.. खर्चा बढ़ गया था.. मैने और मेहनत करना शुरू कर दिया.. टिफिन बनाने के बाद बचे समय में समोसे चाट चाउमीन बनाने लगी.. पड़ोस की एक बूढ़ी अम्मा को भी रख लिया था.. सब्जी काट देती थी…. मैं खुद को हिम्मत देती निहाल जब नौकरी करने लगेगा तब मेरी सारी मुसीबत खत्म हो जाएगी…

                            प्लस टू के एग्जाम के बाद दोस्तों के साथ गोवा का प्रोग्राम बना निहाल का… उसे जरा भी अहसास नहीं था अपने पिता की स्थिति और मेरी मजबूरी का… मैने मंगलसूत्र भी बेच दिया.. दिल पर क्या गुजरी मै हीं जानती हूं…मां जाने पर शायद पत्नी कमजोर हो जाती है… आज लगता है मुझे उसी समय निहाल को गोवा जाने से मना कर देना चाहिए था..

                         निहाल एन आई टी भोपाल में पढ़ने चला गया… सेकेंड ईयर में बुलेट खरीदने की ज़िद कर दिया… मैने अपनी मजबूरियों का वास्ता दिया पर अपने दोस्तों के बीच उसे बहुत बेइज्जती महसूस होती है. ये उसका कहना था.. किसी के पास बड़ी गाड़ी तो किसी के पास सबसे एडवांस बाइक थी… मैने कहा अगले साल खरीदने की कोशिश करूंगी पर… अभी पिछले महीने आई फोन दिलाया है.…निहाल की धमकी कुछ कर लूंगा.. मुझे मजबूर कर दिया घर पर लोन लेकर बुलेट खरीदने पर..

          वक्त गुजरता गया… निहाल मुझसे नाखुश रहता.. मैं जितनी कोशिश करती उसे खुश रखूं पर…

          निहाल का कैंपस सिलेक्शन हो गया.. अब कुछ दिनों की हीं बात है…. चैन अपनी नींद पूरी करूंगी… चार बजे सुबह उठना और बारह बजे के बाद सोना मेरी दिनचर्या बन गई थी… रोहित मुझे हिम्मत देते और मैं रोहित को….

                   रोहित की नौकरी लग गई..

           तीन महीने के लिए कंपनी ने इसी शहर में भेजा है निहाल को…

              निहाल न जाने किस जनम का खुन्नस निकाल रहा है… हर चीज में मीन मेख निकलना.. जैसे खाना अच्छा नहीं बना है.. कपड़े अभी तक प्रेस नहीं हुए.. पापा के तो मजे है.. कोई जिम्मेदारी नहीं निभाए पर चैन से जी रहे हैं.. मैं तड़प के रह गई… रोहित के आंखों से आंसू निकल गए.. मैने उन्हें संभाला.. मेरे हाथ का बना खाना कितने बच्चे और बैंक के स्टाफ कॉलेज के प्रोफेसर प्रेम से खाते हैं और मेरा हीं बेटा…

          यही बेटा बचपन में मेरे आंसू अपने नन्हे हाथों से पोंछ कर मुझसे कहता मां मुझे बड़ा होने दो तुम्हे कुछ नहीं करने दूंगा.. तीन महीने बीते और निहाल चला गया.. हमने चैन की सांस ली..

            मां का दिल नहीं मानता तो फोन करती.. कभी उठाता तो बुरी तरह से डांट देता.. क्यों बार बार कॉल करती हो..

इस कहानी को भी पढ़ें: 

अच्छी किस्मत अच्छे कर्मों से बनती है – बीना शर्मा : Moral Stories in Hindi

         साल भर बाद उसने शादी कर ली… घर आना छोड़ दिया था.. मैने फोन किया तो बेशर्मी से बोला मैने शादी कर ली है कोर्ट में.. क्योंकि तुम लोगों की हैसियत नहीं थी धूमधाम से शादी करने की.. और नेहा को मै नहीं दिखाना चाहता था कि तुम टिफिन बनाती हो और पापा… नेहा के पापा ने हमारी कोर्ट मैरिज के बाद  बड़ी सी गाड़ी दी गिफ्ट में..वैसे मां जो पैसा तुम मुझे हर महीने भेजती थी एक साल से ऊपर हो गए मुझे नौकरी करते.. सारे बच रहे होंगे..जोड़कर वो पैसे भेज दो हम कहीं बाहर घूमने चले जाएंगे.. मैं निः शब्द हो गई..

फोन रखकर बहुत रोई… भगवान ने मुझे इतना #किस्मत हीन #बना कर भेजा है.. मां बाप बचपन में हीं मर गए.. चाचा चाची ने पापा के हिस्से की जमीन लेकर मेरी शादी की और रिश्ता तोड़ दिया.. मैं भविष्य में हिस्सा न मांग बैठूं.. नौकरी भी छूट गई और पति अपाहिज हो गए.. बेटा का सहारा था वो भी ऐसा स्वार्थी और नालायक निकला.. मुझे अब चुप नहीं रहना है… मुझे कठोर बनना होगा… मैने अगले दिन फोन किया.. फोन उठाते हीं निहाल बेशर्मी से बोला पैसे भेजा नहीं अभी तक.. मैने कहा आज से नहीं

अभी से हमारा रिश्ता हमेशा के लिए खत्म… तुम्हारा नंबर ब्लॉक कर रही हूं.. हम दोनो में से जो भी पहले मरेगा दूसरा उसे आग देगा और फिर वो वृद्धाश्रम चला जाएगा… मैं अपनी कमाई का एक हिस्सा वहां अगले महीने से देना शुरू कर रही हूं… भगवान से यही प्रार्थना है और तुमको आशीर्वाद दे रही हूं

भगवान तुमको तुम्हारे जैसा एक बेटा जरूर दें… और फोन काट दिया… तिल तिल कर मरना अब छोड़ दिया है.. मेरा कोई बेटा नहीं है.. मैं और रोहित एक दूसरे का सहारा हैं.. जब तक हाथ पैर चल रहे हैं तब तक टिफिन का काम करूंगी… दो और औरतों को रख लिया है… यही जीवन है शायद… अपने कोख से निहाल को जनम देने के पाप का शायद मै प्रायश्चित कर रही हूं.. पर उसे कभी माफ नहीं करूंगी..

#स्वलिखित सर्वाधिकार सुरक्षित #

 

Veena singh

Leave a Comment

error: Content is Copyright protected !!